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खेलअफगानिस्तान

अफगानी फुटबॉलर लड़ रही हैं वजूद और भविष्य की निर्णायक लड़ाई

मैट पियर्सन
२७ फ़रवरी २०२६

अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में वापसी के कुछ ही महीनों बाद अफगानिस्तान की फुटबॉल खिलाड़ी अपने अगले मैच का इंतजार कर रही हैं. 1 मार्च से ऑस्ट्रेलिया में शुरू होने वाला महिला एशियन कप उनके लिए प्रेरणा भी है और सबक भी.

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फरवरी 2026 में ब्रिटेन में एक ट्रेनिंग सेशन में हिस्सा लेने वाली तीन अफगान वीमेन युनाइटेड की फुटबॉलर
फरवरी 2026 में ब्रिटेन में एक ट्रेनिंग सेशन में हिस्सा लेने वाली तीन अफगान वीमेन युनाइटेड की फुटबॉलर तस्वीर: Ann Odong/FIFA

तीन साल पहले जब महिला फुटबॉल वर्ल्ड कप ऑस्ट्रेलिया के उन्हीं शहरों में खेला जा रहा था जहां ये निर्वासित अफगान महिला खिलाड़ी रह रही थीं, तो वे बड़े दुख और हताशा के साथ उसे देख रही थीं. अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगहों पर रह रही ये खिलाड़ी तब से अब तक एक लंबा सफर तय कर चुकी हैं, लेकिन 1 मार्च से ऑस्ट्रेलिया में शुरू होने वाला महिला एशियन कप उनके लिए एक प्रेरणा भी है और एक सबक भी. यह उन्हें याद दिलाता है कि अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के लिए उन्हें अभी भी कई मुश्किलों को पार करना बाकी है.

डिफेंडर मुर्सल सादात ने 2023 वर्ल्ड कप की अपनी यादें साझा करते हुए डीडब्ल्यू से कहा, "उस समय अफगानिस्तान की कोई महिला नेशनल टीम नहीं थी. वर्ल्ड कप के दौरान मैं पूरे समय अपने आंसू नहीं रोक पाई, क्योंकि उसने मुझे उस दौर की याद दिला दी जब मैं गर्व के साथ अपने देश के लिए खेल पाती थी. वह 2021 में तालिबान की वापसी से पहले का दौर था. मुझे उम्मीद है कि अगले क्वालीफाइंग राउंड में हमारी टीम भी हिस्सा लेगी.”

अफगानिस्तान: युवा महिलाएं घुटन वाले बुर्के से हो रही दूर

अफगानिस्तान की तरफ से वर्ल्ड कप में खेलने का सपना पिछले अक्टूबर में तब एक कदम और करीब आ गया, जब ‘अफगान वीमेन यूनाइटेड' के नाम से बनी अफगान महिला टीम को फीफा ने मान्यता दी. इस टीम ने मोरक्को में हुए एक फ्रेंडली टूर्नामेंट में हिस्सा भी लिया.

फिर से अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के लिए उत्सुक

चार साल के कड़े संघर्ष के बाद आखिरकार जब फुटबॉल की गवर्निंग बॉडी (फीफा) ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी, तो वह टीम के लिए एक भावुक कर देने वाली उपलब्धि थी. हालांकि, इस ऐतिहासिक शुरुआत के चार महीने बाद भी टीम को दोबारा मैदान पर उतरने का अवसर नहीं मिला है और वे अगले मुकाबले के इंतजार में हैं.

ब्रिटेन में रहने वाली गोलकीपर इलाहा सफदारी ने डीडब्ल्यू से कहा, "मोरक्को हमारे लिए एक बड़ा पड़ाव था, लेकिन यह तो बस शुरुआत है. एक खिलाड़ी के तौर पर, हम अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के लिए हमेशा बेताब रहते हैं. बेशक, हम और इंटरनेशनल मैच चाहते हैं, लेकिन हमने अपना अनुशासन नहीं खोया है. हम कड़ी मेहनत कर रहे हैं और एक टीम के रूप में खुद को बेहतर बना रहे हैं. हमें पता है कि हमारा स्टाफ पर्दे के पीछे से नए मौके तलाशने में जुटा है, इसलिए हम पूरी तरह तैयार और जोश में हैं.”

ब्रिटेन में रहने वाली गोलकीपर इलाहा सफदारी ने डीडब्ल्यू से कहा कि अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के लिए हम हमेशा बेताब रहते हैं
ब्रिटेन में रहने वाली गोलकीपर इलाहा सफदारी ने डीडब्ल्यू से कहा कि अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के लिए हम हमेशा बेताब रहते हैंतस्वीर: Ann Odong/FIFA

काफी समय की चुप्पी के बाद, सोमवार को फीफा ने एलान किया कि जून के इंटरनेशनल ब्रेक के दौरान अफगानिस्तान की टीम दो मैचों में हिस्सा लेगी, हालांकि विपक्षी टीमों के नाम अभी तय नहीं हुए हैं. इसकी पूरी जानकारी आने वाले महीनों में दी जाएगी. इस महीने की शुरुआत में यूरोप में रहने वाली खिलाड़ियों ने इंग्लैंड के डॉनकास्टर में एक ट्रेनिंग कैंप में हिस्सा लिया, जबकि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली खिलाड़ियों के लिए भी इसी साल ऐसा ही कैंप लगाने की योजना है.

अफगानिस्तान: क्या 4 साल बाद भी अलग-थलग पड़ा हुआ है तालिबान?

टीम की मान्यता के लिए संघर्ष, पिछली घटनाओं का सदमा और चार साल तक अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से दूर रहने के कारण पैदा हुए अंतर को देखते हुए, अगले साल ब्राजील में होने वाला वर्ल्ड कप अफगान टीम के लिए बहुत जल्दबाजी जैसा होता. मार्च में होने वाला एशियन कप ही यह तय करेगा कि एशिया से कौन सी टीमें ‘ब्राजील 2027' के लिए क्वालीफाई करेंगी. सेमीफाइनल में पहुंचने वाली टीमें सीधे वर्ल्ड कप में जगह बनाएंगी. वहीं, जो टीमें क्वार्टर फाइनल में हार जाएंगी, उनके पास अभी भी मौका होगा. उन्हें शेष चार एशियाई स्लॉट्स के लिए प्लेऑफ मैचों के दौर से गुजरना होगा.

महिला टीम का वीजा खारिज होने की वजह

अफगानिस्तान की तरह यूएई भी 'ब्राजील 2027' वर्ल्ड कप का हिस्सा नहीं होगा, क्योंकि वह एशियाई कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया. यह भी तय माना जा रहा है कि जून में यूएई इस टीम का मुकाबला नहीं करेगा, क्योंकि पिछले अक्टूबर में इसी खाड़ी देश ने अफगान खिलाड़ियों को अपने यहां आने की अनुमति देने से मना कर दिया था, जिसके चलते आखिरी समय में टूर्नामेंट को मोरक्को शिफ्ट करना पड़ा था.

फीफा ने इसके बाद से डॉयचे वेले के उन सवालों का जवाब देने से बार-बार इनकार किया है कि आखिर यूएई ने अपना वादा क्यों तोड़ दिया, जबकि वह इससे पहले टीम की मेजबानी और उनके साथ खेलने के लिए तैयार था. अब यह पूरी तरह साफ लग रहा है कि तालिबान के साथ यूएई के रिश्ते ही इस इनकार की असली वजह थे.

अफगान टीम को ऑस्ट्रेलिया में शरण दिलाने में मदद करने वाली और खिलाड़ियों के करीब रहने वाली मानवाधिकार वकील एलिसन बैटिसन ने डीडब्ल्यू से कहा, "यही सबसे तर्कसंगत और सही वजह लगती है. यूएई किसी भी टीम के लिए चंद घंटों में वीजा जारी कर सकता है. अगर यह सच है कि उन्होंने उस हफ्ते फीफा से बात करना बंद कर दिया, दिए हुए वीजा वापस ले लिए या नए वीजा नहीं दिए, तो यह वाकई में बहुत अजीब और असाधारण बात है.”

उन्होंने आगे कहा, "मेरे लिए इसका मतलब यही है कि बिना किसी स्पष्टीकरण के, किसी बहुत बड़े अधिकारी ने बीच में दखल दिया और कहा कि हमें 'दूसरे हितों' को प्राथमिकता देनी होगी. उस अधिकारी को महिलाओं के खेलों की कोई परवाह नहीं थी और मैं यही मान सकती हूं कि वे हित अफगानिस्तान में मौजूद आर्थिक फायदे ही हैं.”

तालिबान के खिलाफ अफगानिस्तान की पहली महिला ओलंपियन का अभियान

फीफा ने यूएई के साथ रिश्ते पर जोर दिया

डीडब्ल्यू का मानना है कि यही संदेह कई खिलाड़ियों को भी है, लेकिन फीफा की खामोशी की वजह से स्थिति अब भी साफ नहीं है. जियानी इनफैनटिनो की अगुवाई वाली यह संस्था उस समय इतनी खामोश नहीं थी, जब उसने वीजा देने से इनकार करने के ठीक दो महीने बाद, 29 दिसंबर को दुबई (यूएई) में एक नए ‘सालाना विश्व फुटबॉल पुरस्कार' समारोह के आयोजन का एलान किया था.

इस मौके पर प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि इस साल से ये अवार्ड्स ‘फीफा का आधिकारिक वार्षिक पुरस्कार समारोह' होंगे, जहां दुनिया की सबसे प्रभावशाली फुटबॉल हस्तियां जुटेंगी. इसमें पिछले साल के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों, टीमों और इस खूबसूरत खेल की उपलब्धियों का जश्न मनाया जाएगा. अक्टूबर में जो कुछ भी हुआ उसे देखते हुए, यह कहना गलत नहीं होगा कि ‘अफगान वीमेन यूनाइटेड' की खिलाड़ी इस तरह के किसी समारोह में शामिल नहीं हो पाएंगी.

अफगानिस्तान को भूल गई दुनिया, तालिबान के दमन से लोग परेशान

अफगानिस्तान की पुरानी और नई खिलाड़ी फीफा के समर्थन के लिए आभार तो जताती हैं, लेकिन फीफा का उस देश (यूएई) को इतना खुला समर्थन देना जिसने उसी टीम को ठुकरा दिया जिसे फीफा मान्यता दे चुका है, समझ से परे है. यह बात फीफा के उस वादे से मेल नहीं खाती, जिसमें उसने ‘संबंधित संगठनों और संस्थाओं के साथ कूटनीतिक बातचीत' के जरिए अफगान महिलाओं के लिए खेल के रास्ते खोलने का भरोसा दिलाया था.

अपनी बाकी साथियों की तरह, अफगान डिफेंडर सादात भी अपने हक के लिए मजबूती से आवाज उठाती रही हैं. हालांकि भू-राजनीति पर इन खिलाड़ियों का कोई बस नहीं है, फिर भी उन्हें पूरा भरोसा है कि वे हर मुश्किल को झेल लेंगी और 2029 के अगले एशियन कप क्वालीफायर में जरूर खेलेंगी. सादात ने डीडब्ल्यू से कहा, "निर्वासन में रहकर अफगान महिला नेशनल टीम को फिर से खड़ा करना और उसे पहचान दिलाना लाखों अफगान लोगों की चाहत है, क्योंकि यह तालिबान शासन के खिलाफ एक विरोध है."

उन्होंने आगे कहा, "यह फुटबॉल की दुनिया की तरफ से उनके चेहरे पर एक तमाचा है कि ‘तुम उन्हें खामोश करने और उनका खेल छीनने की कोशिश कर रहे हो, लेकिन हम अभी भी यहां मौजूद हैं. हम उन्हें आगे बढ़ने और चमकने का मंच दे रहे हैं, ताकि वे अपने खेल को ‘लिंग-आधारित भेदभाव' और अन्याय के खिलाफ एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकें."