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फ्रांस की सरकार ने क्यों बदली बलात्कार की परिभाषा

३० अक्टूबर २०२५

फ्रांस की सरकार ने बलात्कार के कानून में एक बड़ा बदलाव किया है. अब फ्रांस में सहमति के बिना किए गए हर यौन कृत्य को यौन हिंसा माना जाएगा.

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गिजेल पेलिको की एक तस्वीर
गिजेल पेलिको के केस के सामने आने के बाद फ्रांस में बलात्कार के कानून को मजबूत करने की बहस शुरू हुई थी. तस्वीर: Laurent Coust/ABACA/picture alliance

गिजेल पेलिको का संघर्ष फ्रांस में बलात्कार के कानून की परिभाषा बदलने में कामयाब हुआ है. फ्रांस की सरकार ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दी है, जिसके तहत बिना सहमति किए गए हर यौन कृत्य को अब बलात्कार या यौन हिंसा माना जाएगा.

29 अक्टूबर को पारित हुए इस बिल के समर्थन में 327 सांसदों ने वोट किया. 15 सांसद मतदान से गैरहाजिर रहे. खास बात यह रही कि इस बिल के विरोध में एक भी वोट नहीं डाला गया.

फ्रांस की संसद में बलात्कार की परिभाषा को बदलने से जुड़ा यह बिल जनवरी में पेश किया गया था. सिर्फ 10 महीनों के अंदर ही अब यह कानून की शक्ल ले चुका है. फ्रांस के निचले सदन ने बीते हफ्ते ही इस बिल को मंजूरी दे दी थी. हालांकि, तब कुछ धुर-दक्षिणपंथी नेताओं ने इस बिल के विरोध में भी वोट किया था.

गिजेल पेलिको के समर्थन में आई एक महिला
अब फ्रांस की सरकार ने एक ऐसा बिल पास कर दिया है जिसमें रेप के कानून में सहमति को सबसे ऊपर रखा गया है.तस्वीर: Aurelien Morissard/AP Photo/picture alliance

नए कानून में सहमति की नई परिभाषा

फ्रांस के रेप के कानून में आया यह बदलाव इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि अब तक फ्रांस में हिंसा, डर या दबाव में किए गए पेनिट्रेशन या ओरल सेक्स ही बलात्कार की परिभाषा में शामिल थे. नए कानून में सहमति को बेहतर तरीके से परिभाषित किया गया है. इसके मुताबिक सहमति का मतलब है; अपनी मर्जी से, सोच-समझकर, पहले और विस्तार से दी गई सहमति जिसे कभी भी वापस लिया जा सकता है.

इसके अलावा इस नई परिभाषा में यह भी रेखांकित किया गया है कि अगर कोई यौन कृत्य दबाव, हिंसा, डर या अचानक किया जाए, तो उसमें सर्वाइवर की सहमति नहीं मानी जाएगी. साथ ही, यह भी जोड़ा गया है कि सहमति का अनुमान केवल सर्वाइवर की चुप्पी या हाव-भाव (या प्रतिक्रिया) की कमी से नहीं लगाया जा सकता है.

किन देशों में है सहमति आधारित रेप कानून

नए बदलाव के साथ ही फ्रांस उन देशों में शामिल हो गया है, जहां सहमति आधारित रेप कानून लागू हैं. जर्मनी, स्पेन, बेल्जियम में यह कानून पहले से ही मौजूद था.

फ्रेंच सरकार के इस फैसले की कई मानवाधिकार संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने सराहना की है. फ्रांस के महिला अधिकार संगठन 'सीआईडीएफएफ' ने इस बदलाव के साथ सेक्स एजुकेशन को भी बेहतर करने की मांग की है. सीआईडीएफएफ के मुताबिक पुलिस, जांचकर्ताओं और सर्वाइवरों को समर्थन देने वाले समूहों को विशेष ट्रेनिंग दिए जाने की भी जरूरत है.

'एमनेस्टी इंटरनैशनल फ्रांस' की एडवोकेसी ऑफिसर लोला शूलमान के मुताबिक, यह बदलाव सिर्फ एक कदम है. उन्होंने कहा, "लैंगिक और यौन हिंसा के मामलों में सजा से मुक्ति दिए जाने का चलन खत्म करने के लिए अभी हमें बेहद लंबी लड़ाई लड़नी है."


क्या हैं सहमति आधारित बलात्कार के कानून?

सहमति के आधार पर बने रेप कानूनों का इतिहास महज कुछ ही साल पुराना है. साल 2017 में दुनियाभर में शुरू हुए 'मीटू' आंदोलन के बाद ही इसकी मांग तेज होने लगी थी. खासकर कई यूरोपीय देशों ने इस आंदोलन के बाद ही रेप के कानून में संबंधित बदलाव किए. उदाहरण के तौर पर, स्पेन और नीदरलैंड्स में बलात्कार के कानून में सहमति की अवधारणा को 'मीटू' आंदोलन के बाद ही जोड़ा गया.

'मीटू' आंदोलन के बाद महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने बहस छेड़ी कि दबाव आधारित रेप के कानूनों की जगह, सहमति के आधार पर बने बलात्कार लाए जाएं. उनके मुताबिक, सहमति के आधार पर बने कानून अलग-अलग पहचान से आने वाले बलात्कार के सर्वाइवर को सुरक्षा देते हैं, और इनसे लैंगिक हिंसा में कमी आती है. वहीं, दबाव आधारित कानून सर्वाइवर के अनुभवों को तरजीह नहीं देता. साथ ही, सर्वाइवर पर ही अपने साथ हुई हिंसा को साबित करने का दबाव होता है.

हालांकि, कई आलोचकों का यह भी मानना है कि सहमति को परिभाषित करना या उसे साबित करना बेहद मुश्किल है, या फिर सहमति अपने आप में एक बेहद अस्पष्ट अवधारणा है. सहमति क्या है, इसे लेकर आज भी ज्यादातर लोगों के बीच जागरूकता की कमी है. नारीवादी और महिला अधिकार आंदोलन लगातार इस बात की मांग करते रहे हैं कि यौन हिंसा से जुड़े सभी कानूनों में सर्वाइवर की सहमति को सबसे ऊपर रखा जाए.

फ्रांस में गिजेल पेलिको के समर्थन में आई एक महिला
सहमति के आधार पर बनने वाले रेप के कानून की मांग लगातार तेज हुई है. महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक ऐसे कानून सर्वाइवर के लिए अधिक संवेदनशील और प्रगतिशील होते हैं.तस्वीर: Manon Cruz/REUTERS

गिजेल पेलिको कैसे बनीं इस बदलाव की अगुआ

फ्रांस के शहर एविन्यां की एक अदालत में जारी मुकदमे में सुनवाई के लिए आतीं गिजेल पेलिको आज महिला अधिकार आंदोलन का एक चेहरा बन चुकी हैं. पेलिको के पूर्व पति और 50 दूसरे पुरुषों को नशे की हालत में उनका बलात्कार करने का दोषी पाया गया था. उनके पूर्व पति ने दूसरे पुरुषों के साथ मिलकर, साल 2011 से 2020 के बीच  सुनियोजित तरीके से पेलिको के साथ यौन हिंसा की.

फ्रांस में आए इस बड़े बदलाव के पीछे गिजेल पेलिको की लड़ाई शामिल है. उनके केस ने ही फ्रांस में रेप के कानून में बदलाव लाए जाने की बहस तेज की. मानवाधिकार और महिला अधिकार संगठनों ने इस केस का हवाला देते हुए इस आंदोलन को मजबूत किया. इस केस के सामने आने के बाद खुद फ्रांस की सरकार ने भी बलात्कार के कानून को बदलने के लिए हामी भरी थी. यूरोपीय देशों में 'मीटू' आंदोलन के बाद अब गिजेल पेलिको, बलात्कार के कानून में आए एक बड़े बदलाव की प्रतीक बनकर उभरी हैं.

 

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