दक्षिण अफ्रीका की इस गुफा में हैं लाखों साल पुराने इंसानी कंकाल
दक्षिण अफ्रीका में स्टर्कफोंटेन गुफाएं लाखों साल पुराने इंसानों और जानवरों के जीवाश्मों को अपने अंदर संजो कर रखने के लिए मशहूर हैं. यूनेस्को की यह वर्ल्ड हेरिटेज साइट सैलानियों के लिए अब दोबारा खोल दी गई है.

पहले प्रवेश द्वार ढूंढें
स्टर्कफोंटेन गुफाओं में जाने के लिए सबसे पहले उसका प्रवेश द्वार ढूंढें. यह गुफाएं दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग से ज्यादा दूर नहीं है. 1999 में इन गुफाओं को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज घोषित किया था. पुरातात्विक कलाकृतियों के अलावा, यहां ऑस्ट्रेलोपिथेकस अफारेन्सिस के जीवाश्म भी पाए गए. ऑस्ट्रेलोपिथेकस अफारेन्सिस होमिनिडे परिवार से आते हैं जो ना तो पूरे इंसान होते थे और ना ही बंदर.
अंधेरे के बाद उजाला
वैसे तो गुफाओं में सीढ़ियां मौजूद हैं, लेकिन अंदर अंधेरा और नमी होने के कारण, आपको थोड़ी हिम्मत से काम लेना होगा. साथ ही स्वस्थ भी होना होगा. वो इसलिए क्योंकि अंदर काफी पतले पतले रास्ते हैं जहां से आपको शायद टेढ़ा होकर या फिर झुक कर निकलना होगा.
प्रवेश द्वार में सावधानी
इस तस्वीर में टूर गाइड केनेथ मावेटे आपको प्रवेश द्वार से गुफाओं में जाते हुए दिख रहे हैं. "स्टर्कफोंटेन" नाम का मतलब अफ्रीकी भाषा में "भयंकर बहाव वाला झरना" होता है. अब यहां से ही पर्यटकों को आगे का रास्ता समझाया जाता है.
मरने के बाद हुए मशहूर
इस तस्वीर में आप ऑस्ट्रेलोपिथेकस अफारेन्सिस की कॉपी देख रहे हैं. स्टर्कफोंटेन में जो जीवशम हैं, जब वो कभी जब जिंदा रहे होंगे तो कुछ ऐसे ही दिखते होंगे. तस्वीर में ‘लूसी’ है जिसे इथियोपिया के हदर में 1974 में खोजा गया था. माना जाता है कि लूसी लगभग 32 लाख साल पहले कभी रही होगी.
इसे कहते हैं ‘क्रेडल ऑफ ह्यूमनकाइंड’
इन गुफाओं को ‘क्रेडल ऑफ ह्यूमनकाइंड’ भी कहा गया है, जिसका मतलब है मानवजाति का पालना. वो इसलिए क्योंकि इन गुफाओं में आज के इंसानों के सबसे करीबी पूर्वज पाए गए थे. यहां पर एक कंकाल भी पाया गया था जिसका नाम बाद में ‘लिटिल फुट’ रखा गया. वो करीब 30 लाख साल पुराना बताया जाता है - यह कंकाल पुरामानवविज्ञान जगत में खासा मशहूर है.
‘लिटिल फुट प्रोजेक्ट’
ऑस्ट्रेलोपिथेकस प्रोमेथियस "लिटिल फुट" की प्रतिकृति को दक्षिण अफ्रीका के क्रियशदॅार्प के विजिटर सेंटर के संग्रहालय में देखा जा सकता है. इसकी खुदाई में 15 साल लग गए, क्योंकि हड्डियां बहुत कठोर डोलोमाइट चट्टान में धंसी हुई थीं और उन्हें इन पतली और कठिन पहुंच वाली गुफाओं में हाथों से तराशना था.
कितनी बड़ी है गुफा
पूरी गुफा प्रणाली 47 किलोमीटर (29 मील) से ज्यादा लंबी है; लोग केवल एक छोटे से बंद क्षेत्र में ही प्रवेश कर सकते हैं. आज तक यहां कोई बड़ी दुर्घटना तो नहीं हुई, लेकिन खुदाई के दौरान ऐसा कई बार हुआ कि भूवैज्ञानिक या पुरामानवविज्ञानी यहां फंस गए हों या उन्हें बचने के लिए रस्सियों की जरूरत पड़ी हो.