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इस्राएली हमले में ईरानी खुफिया प्रमुख मजीद खादेमी की मौत

आयुष यादव एपी, एएफपी, डीपीए | आदर्श शर्मा रॉयटर्स, एएनआई
प्रकाशित ६ अप्रैल २०२६आखिरी अपडेट ६ अप्रैल २०२६

ईरानी सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि सोमवार को हुए एक इस्राएली हवाई हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के खुफिया प्रमुख मजीद खादेमी मारे गए हैं.

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मजीद खादेमी
खादेमी उन 25 लोगों में शामिल थे, जो सोमवार को ईरान पर अमेरिका और इस्राएल द्वारा किए गए हवाई हमलों की लहर में मारे गए.तस्वीर: Iranian Supreme Leader's Office/ZUMA/picture alliance
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ईरान युद्ध के चलते जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा खाना और दवाएं को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

ईरान युद्ध के चलते जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा खाना और दवाएं

सूडान में खाद्य सहायता लेने के लिए लाइन में लगीं महिलाएं
ऊर्जा और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन के करीब 670 डिब्बे भारत में फंसे हुए हैं, जिन्हें सोमालिया के कुपोषित बच्चों के लिए भेजा जाना थातस्वीर: Marwan Ali/AP Photo/picture alliance

सहायता समूहों ने चेतावनी दी है कि मध्यपूर्व में जारी युद्ध के चलते दुनियाभर में लाखों जरूरतमंद लोगों तक खाना और दवाएं पहुंचाने की उनकी क्षमता कम हो गई है. समूहों का कहना है कि अगर संघर्ष जारी रहा तो यह स्थिति और गंभीर हो जाएगी. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कोविड के बाद से यह सप्लाई चेन में सबसे बड़ी बाधा है और इसके चलते शिपमेंट की लागत 20 प्रतिशत तक बढ़ गई है. 

दरअसल, मध्यपूर्व में जारी जंग के चलते कई अहम शिपिंग रूट बाधित हो गए हैं. इससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट तो पैदा हुआ ही है, साथ ही सहायता समूहों की सप्लाई चेन भी बिगड़ गई हैं. अब सहायता सामग्री भेजने के लिए ऐसे मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जो महंगे हैं और समय भी ज्यादा लेते हैं. ईंधन और बीमा की कीमतें बढ़ने के चलते भी सहायता सामग्री को पहुंचाना महंगा हुआ है. 

विश्व खाद्य कार्यक्रम ने बताया है कि हजारों मीट्रिक टन खाद्य पदार्थ परिवहन में देरी के चलते अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सके हैं. इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी ने बताया है कि 130,000 डॉलर कीमत की दवाएं दुबई में फंसी हुई हैं, जबकि इन्हें युद्धग्रस्त सूडान में भेजा जाना था. इसके अलावा, ऊर्जा और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन के करीब 670 डिब्बे भारत में फंसे हुए हैं, जिन्हें सोमालिया के कुपोषित बच्चों के लिए भेजा जाना था. 

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अदाणी समूह के खिलाफ अपील पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

अदाणी समूह के खिलाफ अपील पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

उद्योगपति गौतम अदाणी की तस्वीर
अदाणी समूह और वेदांता, दिवालिया हो चुके जेपी समूह के अधिग्रहण को लेकर आमने-सामने आ गए हैंतस्वीर: Sam Panthaky/AFP/Getty Images

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अरबपति अनिल अग्रवाल की वेदांता कंपनी की उस अपील पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने अदाणी समूह द्वारा दिवालिया हो चुके जेपी समूह के अधिग्रहण को चुनौती दी थी. वेदांता ने अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के लिए निचली ट्रिब्यूनल उचित रहेगी और सुप्रीम कोर्ट को उसकी कार्यवाही में दखल देने की जरूरत नहीं है. 

जेपी समूह की चार अरब डॉलर की संपत्तियों में घरों और सीमेंट प्लांटों के अलावा बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट भी शामिल है, जो भारत का इकलौता फॉर्म्यूला वन ट्रैक है. इन संपत्तियों को हासिल करने के लिए वेदांता और अदाणी समूह दोनों ने ही बोलियां लगाई थीं. 

वेदांता का आरोप है कि उसकी 1.8 अरब डॉलर की बोली बेहतर थी लेकिन ऋणदाताओं के पैनल ने अदाणी समूह के पक्ष में फैसला सुनाया क्योंकि उसकी 1.5 अरब डॉलर की बोली में अग्रिम भुगतान राशि अधिक थी. वेदांता ने पैनल के इसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी. 

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कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे बोले, “भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं हिमंता बिस्वा सरमा” को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे बोले, “भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं हिमंता बिस्वा सरमा”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तस्वीर
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को असम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए हिमंता बिस्वा सरमा पर निशाना साधातस्वीर: AICC/ANI Photo

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को असम में एक जनसभा को संबोधित करते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि हिमंता बिस्वा सरमा “भ्रष्टाचार में डूबे” हुए हैं और “हजम नहीं हो रहा, इतना खा चुके हैं.”

इससे पहले कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं, दुबई में दो संपत्तियां हैं और 52 हजार करोड़ रुपये की कंपनी है. कांग्रेस का आरोप है कि रिंकी भुइयां के पास यूएई, एंटीगुआ-बारबुडा और मिस्र का पासपोर्ट है. 

हिमंता बिस्वा सरमा ने इन सभी आरोपों को नकारा है और पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की बात कही है. वहीं, रिंकी भुइयां सरमा ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा है कि उनकी, उनके बच्चों की या उनके पति की दुबई में या भारत से बाहर कहीं भी कोई संपत्ति नहीं है. 

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इस्राएली हवाई हमले में ईरानी खुफिया प्रमुख मजीद खादेमी की मौत को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

इस्राएली हवाई हमले में ईरानी खुफिया प्रमुख मजीद खादेमी की मौत

 रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के खुफिया प्रमुख मजीद खादेमी
खादेमी उन 25 लोगों में शामिल थे, जो सोमवार को ईरान पर अमेरिका और इस्राएल द्वारा किए गए हवाई हमलों में मारे गएतस्वीर: Iranian Supreme Leader's Office/ZUMA/picture alliance

ईरानी सरकारी मीडिया ने पुष्टि की है कि सोमवार को हुए एक इस्राएली हवाई हमले में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के खुफिया प्रमुख मजीद खादेमी मारे गए हैं. खादेमी उन 25 लोगों में शामिल थे, जो सोमवार को ईरान पर अमेरिका और इस्राएल द्वारा किए गए हवाई हमलों में मारे गए. इस्राएली रक्षा मंत्री इस्राएल कात्स ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि वे "आतंकियों के नेताओं" को चुन-चुनकर निशाना बना रहे हैं और यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान की सैन्य कमान पूरी तरह कमजोर नहीं हो जाती.

युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने अपने कई शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों को खोया है, जिनमें सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और गार्ड्स के कमांडर-इन-चीफ मोहम्मद पाकपुर शामिल हैं. हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की विकेंद्रीकृत कमान संरचना के कारण वरिष्ठ अधिकारियों की मौत के बावजूद वह अपनी सैन्य कार्रवाइयों और हमलों का समन्वय जारी रखने में सक्षम है. यही कारण है कि नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचने के बाद भी जमीनी स्तर पर ईरान की आक्रामकता कम नहीं हुई है.

जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी रविवार देर रात और सोमवार सुबह इस्राएल और खाड़ी के देशों पर ड्रोन और मिसाइलें दागीं. इस्राएल के हाइफा शहर में एक अपार्टमेंट पर हुए ईरानी मिसाइल हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई.

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केंद्र सरकार के कहने पर ब्लॉक किए गए एक्स अकाउंट को बहाल करने का आदेश को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

केंद्र सरकार के कहने पर ब्लॉक किए गए एक्स अकाउंट को बहाल करने का आदेश

एक फोन की स्क्रीन पर दिखता एक्स का लोगो और उसकी तरफ बढ़ती एक अंगुली
सरकार ने कोर्ट में कहा कि यह अकाउंट "प्रधानमंत्री से संबंधित झूठी बातें फैला रहा था" और "उन्हें गलत तरीके से पेश कर रहा था"तस्वीर: Nikolas Kokovlis/NurPhoto/picture alliance

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में ब्लॉक किए गए एक एक्स अकाउंट को बहाल करने का आदेश दिया है. ‘डॉ निमो यादव’ नाम का यह अकाउंट 19 मार्च को केंद्र सरकार के आदेश के तहत भारत में ब्लॉक कर दिया गया था. इस अकाउंट का संचालन करने वाले प्रतीक शर्मा ने इसके खिलाफ याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सोमवार, 6 अप्रैल को यह निर्देश दिया. 

प्रतीक शर्मा ने अकाउंट को ब्लॉक करने की कार्रवाई को चुनौती दी थी और सरकार से ब्लॉकिंग ऑर्डर की मांग की थी. इसके बाद सरकार ने कोर्ट में कहा कि यह अकाउंट "प्रधानमंत्री से संबंधित झूठी बातें फैला रहा था" और "उन्हें गलत तरीके से पेश कर रहा था". ब्लॉकिंग आदेश में सरकार ने लिखा था कि विवादित पोस्टों के जरिए सरकार पर सवाल उठाए गए और पीएम मोदी की मानहानि की गई. 

यह भी पढ़ें- भारत में कई ऑनलाइन अकाउंट बंद, सरकार पर सेंसरशिप का आरोप

एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट में प्रतीक शर्मा का पक्ष रखा. उन्होंने सवाल पूछा कि अकाउंट को भारत में ब्लॉक करने से पहले उनके क्लाइंट को ब्लॉकिंग ऑर्डर क्यों नहीं दिया गया. उन्होंने इस आदेश को “अवैध और मनमाना” बताया. वहीं, सरकार का पक्ष रख रहे ए़़डिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि इस अकाउंट से देश के प्रमुख और विदेशी संबंधों के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं. 

सभी पक्षों को सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने एक्स अकाउंट को भारत में बहाल करने का निर्देश दिया. साथ ही यह भी कहा कि जिन पोस्टों को केंद्र सरकार ने आपत्तिजनक बताया है, वे अस्थायी तौर पर ब्लॉक रहेंगी. प्रतीक शर्मा को एक समीक्षा समिति के सामने पेश होने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि ब्लॉक की गई पोस्टों को लेकर अंतिम फैसला लिया जा सके. 

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पीएम मोदी बोले, महिला आरक्षण कानून से राज्यों के प्रतिनिधित्व पर नहीं होगा असर को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

पीएम मोदी बोले, महिला आरक्षण कानून से राज्यों के प्रतिनिधित्व पर नहीं होगा असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गंभीर मुद्रा में तस्वीर
मौजूदा सीटों को बढ़ाया जाएगा और महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटें देने की व्यवस्था की जाएगीतस्वीर: Debajyoti Chakraborty/NurPhoto/picture alliance

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार, 6 अप्रैल को कहा कि महिला आरक्षण कानून की वजह से लोकसभा में राज्यों के प्रतिनिधित्व पर कोई असर नहीं होगा. उन्होंने असम में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, “देश के सभी राज्यों को इससे फायदा ही होगा. किसी भी राज्य को इससे नुकसान नहीं होगा. चाहे वह पूर्वोत्तर हो या दक्षिण भारत हो, जहां जनसंख्या को नियंत्रित किया गया है, उनका प्रतिनिधित्व बिल्कुल कम नहीं होगा.”

पीएम मोदी ने बताया कि इसके लिए 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है और देश की सभी राजनीतिक पार्टियों से इस बारे में चर्चा कर ली गई है. उन्होंने कहा कि मौजूदा सीटों को बढ़ाया जाएगा और महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटें देने की व्यवस्था की जाएगी. 

संसद ने साल 2023 में महिला आरक्षण बिल पास किया था. अब बीजेपी शासित केंद्र सरकार इसमें संशोधन करना चाहती है, ताकि 2029 में होने वाले अगले लोकसभा चुनावों में महिला आरक्षण को लागू किया जा सके. इस संशोधन को पास करवाने के लिए दो तिहाई वोटों की जरूरत होगी, इसलिए केंद्र सरकार विपक्षी पार्टियों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है. 

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस बारे में कहा था कि महिला आरक्षण बिल को कांग्रेस का पूरा समर्थन है लेकिन इसे चुनाव में फायदे के लिए इस्तेमाल न किया जाए. उन्होंने कहा था, “मोदी सरकार महिला आरक्षण बिल को 30 महीने से तकिए के नीचे रखकर सो रही थी. अब चुनाव आया तो इन्हें महिला आरक्षण बिल की याद आई है.”
 

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जर्मनी में 'पोलोनियम 210' के लेबल वाली शीशी मिलने से हड़कंप को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

जर्मनी में 'पोलोनियम 210' के लेबल वाली शीशी मिलने से हड़कंप

मास्क लगाकर खड़े बचावकर्मी
'पोलोनियम 210' वही पदार्थ है जिसका उपयोग रूसी खुफिया अधिकारी की हत्या के लिए किया गया थातस्वीर: Karsten Schmalz/KS-Images.de/dpa/picture alliance

दक्षिण-पश्चिमी जर्मनी के वाइहिंगन आन डेय एंत्स शहर में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब ईस्टर के मौके पर अंडे खोजने निकले दो पुरुषों को एक बगीचे में 'पोलोनियम 210' लेबल वाली एक संदिग्ध शीशी मिली. यह पदार्थ एक अत्यंत घातक रेडियोधर्मी तत्व है. घटना की जानकारी मिलते ही अग्निशमन विभाग और पुलिस ने बड़े पैमाने पर आपातकालीन अभियान शुरू किया. हालांकि, राहत की बात यह रही कि दोनों व्यक्ति सुरक्षित पाए गए हैं.

सड़क से ऊपर बालकनी में ज्यादा जहरीली हवा का खतरा

जिला अग्निशमन प्रमुख एंडी डोरोच ने बताया कि सफेद रंग की इस प्लास्टिक की बोतल पर लाल रंग का ढक्कन था और इस पर आधिकारिक तौर पर 'पोलोनियम 210' लिखा हुआ था. शीशी का वजन लगभग 200 ग्राम था, जो पोलोनियम जैसे भारी पदार्थ के अनुरूप है. हालांकि, घटनास्थल पर की गई शुरुआती रेडियोधर्मिता जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई है, जिससे तत्काल खतरे की आशंका कम हुई है.

पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों ने जांच के लिए शीशी को जब्त कर लिया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसके भीतर वास्तव में क्या है. संघीय विकिरण संरक्षण कार्यालय के अनुसार, पोलोनियम सांस के जरिए या घावों के माध्यम से शरीर में जाने पर जानलेवा हो सकता है. यह वही पदार्थ है जिसका उपयोग 2006 में लंदन में पूर्व रूसी खुफिया अधिकारी अलेक्जेंडर लिट्विनेंको की हत्या के लिए किया गया था.

रूस ने नावाल्नी को दिया जहर: यूरोपीय देशों का दावा

सल्फर कब बन जाता है बहुत ज्यादा जहरीला

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होर्मुज संकट: दक्षिण कोरिया ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए शुरू की 'प्लान-बी' पर कवायद को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

होर्मुज संकट: दक्षिण कोरिया ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए शुरू की 'प्लान-बी' पर कवायद

होर्मुज से गुजरता एक जहाज
दक्षिण कोरियाई अधिकारी सऊदी अरब, ओमान और अल्जीरिया जैसे तेल उत्पादक देशों के साथ मिलकर नए रास्तों पर काम कर रहे हैंतस्वीर: REUTERS

मध्य पूर्व में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है. दक्षिण कोरिया अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है, जो फरवरी के अंत से ईरानी खतरों के कारण लगभग बंद है. इस वैश्विक ऊर्जा झटके से निपटने के लिए सियोल ने अब वैकल्पिक तेल आपूर्ति सुरक्षित करने हेतु कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं.

सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद अन डो-गियोल ने सोमवार को बताया कि दक्षिण कोरियाई अधिकारी सऊदी अरब, ओमान और अल्जीरिया जैसे तेल उत्पादक देशों के साथ मिलकर नए रास्तों पर काम कर रहे हैं. योजना के तहत दक्षिण कोरिया अपने ध्वज वाले तेल टैंकरों को लाल सागर के रास्ते भेजने की तैयारी में है. ये टैंकर सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह तक जाएंगे, जहां खाड़ी से पाइपलाइनों के जरिए कच्चा तेल निर्यात के लिए पहुंचता है. इससे होर्मुज के खतरनाक रास्ते से बचा जा सकेगा.

इससे पहले मार्च के मध्य में, दक्षिण कोरिया ने तेल की अल्पकालिक कमी को दूर करने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडार का एक हिस्सा भी जारी किया था. अब सरकार इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए विशेष दूत भेजने पर भी विचार कर रही है.

महंगे पेट्रोल से परेशान कार्टूनिस्ट ने बनाया ई-ट्रक

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होर्मुज स्ट्रेट को पार कर चुके हैं भारत के आठ एलपीजी टैंकर: रॉयटर्स को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

होर्मुज स्ट्रेट को पार कर चुके हैं भारत के आठ एलपीजी टैंकर: रॉयटर्स

भारत का एलपीजी टैंकर शिवालिक
भारत अपनी जरूरत की 60 फीसदी एलपीजी आयात से हासिल करता हैतस्वीर: IANS

भारतीय झंडे वाले दो और एलपीजी टैंकर खाड़ी क्षेत्र से निकलकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने एलएसईजी और क्पलर के डेटा के हवाले से यह जानकारी दी है. डेटा के मुताबिक, ग्रीन आशा और ग्रीन सानवी नामक ये टैंकर खाड़ी क्षेत्र को पार कर चुके हैं और फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में मौजूद हैं. इनके अलावा, एक तीसरा जहाज जग विक्रम अभी होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में है.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अब तक भारतीय झंडे वाले आठ एलपीजी टैंकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं. इनमें से छह भारत पहुंच चुके हैं और दो अभी रास्ते में हैं. भारत होर्मुज स्ट्रेट के आसपास फंसे अपने एलपीजी टैंकरों को धीरे-धीरे वहां से निकाल रहा है. 

28 फरवरी को इस्राएल और अमेरिका के हमले के बाद, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को काफी हद तक बंद कर दिया है. ईरान का कहना है कि सिर्फ “गैर-दुश्मन जहाज” ही ईरानी अधिकारियों की मदद से होर्मुज स्ट्रेट को पार कर सकते हैं. भारत और चीन समेत कई देशों के जहाज होर्मुज स्ट्रेट को पार कर चुके हैं, लेकिन युद्ध से पहले की तुलना में होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या अभी भी काफी कम है. 

सिलेंडर के बाद अब खाने पर भी संकट

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अमेरिका और ईरान को सौंपा गया 45 दिनों के युद्धविराम का ड्राफ्ट: रिपोर्ट को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

अमेरिका और ईरान को सौंपा गया 45 दिनों के युद्धविराम का ड्राफ्ट: रिपोर्ट

पाकिस्तान में मौजूद मिस्र, सउदी अरब, तुर्की के विदेश मंत्री
यह प्रस्ताव मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की के मध्यस्थों द्वारा तैयार किया गया हैतस्वीर: Muammer Tan/Turkish Foreign Ministry/REUTERS

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान को एकयुद्धविराम प्रस्ताव सौंपा गया है, जिसमें 45 दिनों के लिए लड़ाई रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अपील की गई है. समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, यह प्रस्ताव मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की के मध्यस्थों द्वारा तैयार किया गया है. इसे रविवार देर रात ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची और अमेरिकी मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ को भेजा गया है.

फिलहाल, दोनों देशों की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि, रॉयटर्स के अनुसार एक अज्ञात ईरानी अधिकारी ने संकेत दिया है कि ईरान अस्थायी युद्धविराम के हिस्से के रूप में जलडमरूमध्य को खोलने के पक्ष में नहीं है. साथ ही, ईरान ने इस प्रस्ताव की समीक्षा के लिए किसी भी तरह की समय सीमा को मानने से इनकार कर दिया है.

यह शांति प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को मंगलवार तक की नई मोहलत दी है. डॉनल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने तय समय तक होर्मुज जलमार्ग को नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर बड़े हमले शुरू कर देगा.

पाकिस्तान में बने जेट कितने दमदार और भरोसेमंद

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अरुणाचल प्रदेश: सीएम के रिश्तेदारों को सरकारी ठेके देने के आरोपों की होगी सीबीआई जांच को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

अरुणाचल प्रदेश: सीएम के रिश्तेदारों को सरकारी ठेके देने के आरोपों की होगी सीबीआई जांच

अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू एक कार्यक्रम में बोलते हुए
एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि पेमा खांडू की पत्नी, मां और भतीजे की कंपनियों को सरकारी ठेके दिए गएतस्वीर: Pitamber Newar/ANI

अरुणाचल प्रदेश की सरकार पर आरोप लगे हैं कि उसने मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों की कंपनियों को करोड़ों रुपये के सरकारी ठेके दिए. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 6 अप्रैल को इन आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने आदेश दिया है कि सीबीआई को दो हफ्तों में अपनी जांच शुरू करनी होगी और 16 हफ्तों के अंदर अपनी स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश करनी होगी. 

कानूनी खबरों की वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक, कोर्ट ने कहा है कि जनवरी 2015 से दिसंबर 2025 के दौरान दिए गए सरकारी ठेके सीबीआई जांच के दायरे में आएंगे. जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने राज्य सरकार को जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि सरकारी ठेकों से जुड़ा कोई भी रिकॉर्ड नष्ट नहीं होना चाहिए.

इस मामले में एक एनजीओ ने जनहित याचिका दायर कर जांच की मांग की थी. याचिकाकर्ता ने सीएम पेमा खांडू पर आरोप लगाया था कि वे राज्य को एक निजी कंपनी की तरह चला रहे हैं. याचिका में आरोप लगाया गया है कि पेमा खांडू की पत्नी, मां और भतीजे की कंपनियों को सरकारी ठेके दिए गए. याचिकाकर्ता के मुताबिक, सीएम के रिश्तेदारों को करीब 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके अवैध रूप से दिए गए. 

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आर्टेमिस 2 मिशन: 50 साल बाद चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में पहुंचे इंसान को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

आर्टेमिस 2 मिशन: 50 साल बाद चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में पहुंचे इंसान

अंतरिक्ष यान में मौजूद यात्री
1972 के बाद यह पहली बार है जब कोई मानवयुक्त यान चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा हैतस्वीर: NASA/dpa/picture alliance

नासा का आर्टेमिस-2 मिशन सोमवार को एक बड़े मील के पत्थर पर पहुंच गया है. अंतरिक्ष यान 'ओरियन' अब चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है. इसका मतलब है कि अब इस कैप्सूल के लिए पृथ्वी की तुलना में चंद्रमा का खिंचाव अधिक शक्तिशाली है. 1972 के बाद यह पहली बार है जब कोई मानवयुक्त यान चंद्रमा के इतने करीब पहुंचा है. वर्तमान में ओरियन चंद्रमा से लगभग 63,000 किलोमीटर और पृथ्वी से लगभग 3,73,000 किलोमीटर की दूरी पर है.

अगले कुछ घंटों में यह यान चंद्रमा के सबसे निकटतम बिंदु (लगभग 7,500 किलोमीटर दूर) से गुजरेगा. इस दौरान अंतरिक्ष यात्री एक अद्भुत नजारा देखेंगे, जहां वे एक ही फ्रेम में पृथ्वी और चंद्रमा को एक साथ देख सकेंगे. यह मिशन 'फिगर ऑफ एट' (8 के अंक) जैसा रास्ता तय कर रहा है, जो अंतरिक्ष यात्रियों को इतिहास में किसी भी इंसान की तुलना में पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तक ले जाएगा.

इस मिशन का नेतृत्व चार अंतरिक्ष यात्री कर रहे हैं. अमेरिकी चालक दल में विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और रीड वाइसमैन शामिल हैं. जबकि जेरेमी हैनसन कनाडा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.आर्टेमिस-2 की यह सफलता भविष्य के 'आर्टेमिस-3' मिशन के लिए रास्ता साफ करेगी, जिसका लक्ष्य इंसानों को फिर से चंद्रमा की सतह पर उतारना है.

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ईरान युद्ध के चलते भारत में गाड़ियों की आपूर्ति भी हो सकती है प्रभावित को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

ईरान युद्ध के चलते भारत में गाड़ियों की आपूर्ति भी हो सकती है प्रभावित

ऑटो एक्स्पो के दौरान, हुंडई की एक इलेक्ट्रिक कार को देखता एक व्यक्ति
गाड़ियां बनाने में मुख्य तौर पर इस्तेमाल होने वाली धातुओं जैसे एल्युमीनियम, कॉपर और स्टील के भी दाम बढ़ गए हैंतस्वीर: Pradeep Gaur/SOPA Images/Sipa USA/picture alliance

भारत के ऑटोडीलरों ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं और इस वजह से वाहनों की आपूर्ति में बाधा आ सकती हैं. युद्ध की वजह से तेल और गैस के दाम बढ़ गए हैं, जिससे ऑटो सप्लाई चेन में ईंधन और लॉजिस्टिक का खर्च बढ़ गया है. इसके अलावा, गाड़ियां बनाने में मुख्य तौर पर इस्तेमाल होने वाली धातुओं जैसे एल्युमीनियम, कॉपर और स्टील के भी दाम बढ़ गए हैं. 

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (एफएडीए) के एक सर्वे में शामिल आधे से ज्यादा डीलरों ने माना कि उन्हें जारी संघर्ष के चलते आपूर्ति में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है. करीब 17 फीसदी डीलरों ने कहा कि उन्होंने तीन हफ्ते या उससे भी ज्यादा देरी का सामना किया. करीब 35 फीसदी डीलरों को लगता है कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ी हुई कीमतें उपभोक्ताओं के वाहन खरीदने के फैसलों को प्रभावित करेंगी.

एसोसिएशन के मुताबिक, पिछला वित्त वर्ष वाहनों की बिक्री के लिहाज से काफी अच्छा रहा है. इस दौरान वाहनों की बिक्री में करीब 13.3 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. मार्च 2026 में ही यात्री वाहनों की बिक्री करीब 21 फीसदी बढ़ी और वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री करीब 15 फीसदी बढ़ गई.

इलेक्ट्रिक कारों की मुश्किल

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सर्बिया और हंगरी ने कहा, रूसी गैस पाइपलाइन के पास मिले विस्फोटक को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

सर्बिया और हंगरी ने कहा, रूसी गैस पाइपलाइन के पास मिले विस्फोटक

सर्बिया में मौजूद पाइपलाइन
यूक्रेन ने इस घटना में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया हैतस्वीर: Darko Vojinovic/AP Photo/picture alliance

सर्बिया और हंगरी के नेताओं ने रविवार को खुलासा किया कि सर्बिया के उत्तरी हिस्से में मौजूद एक रूसी गैस पाइपलाइन के पास शक्तिशाली विस्फोटक बरामद किए गए हैं. सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच के अनुसार, ये विस्फोटक बाल्कन स्ट्रीम पाइपलाइन से मात्र कुछ सौ मीटर की दूरी पर डेटोनेटर के साथ दो बड़े पैकेटों में पाए गए.

इस पाइपलाइन के जरिए तुर्की और बुल्गारिया के रास्ते रूसी गैस हंगरी तक पहुंचाई जाती है, जो पूरे क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तुरंत रक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई. बैठक के बाद उन्होंने स्पष्ट रूप से इसे 'सुनियोजित कार्रवाई' करार दिया. हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी पर आरोप नहीं लगाया, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि यूक्रेन लंबे समय से यूरोप को रूसी ऊर्जा आपूर्ति से काटने की कोशिश करता रहा है. वहीं, यूक्रेन ने इस घटना में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया है.

इस घटना ने यूरोप में पहले से ही जारी ऊर्जा संकट और युद्ध के तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है. वर्तमान में दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां मामले की गहन जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन शक्तिशाली विस्फोटकों को वहां किसने और किस मकसद से रखा था.

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ईरान में दुनिया का सबसे लंबा इंटरनेट ब्लैकआउट, 37 दिनों से इंटरनेट बंद को स्किप करें
६ अप्रैल २०२६

ईरान में दुनिया का सबसे लंबा इंटरनेट ब्लैकआउट, 37 दिनों से इंटरनेट बंद

विरोध प्रदर्शन करते लोग
ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट को लगातार 37 दिन पूरे हो चुके हैंतस्वीर: Seiya Tanase/NurPhoto/picture alliance

इंटरनेट मॉनिटरिंग ग्रुप 'नेटब्लॉक्स' के अनुसार, ईरान में जारी इंटरनेट शटडाउन ने विश्व रिकॉर्ड बना दिया है. रविवार (5 अप्रैल 2026) तक ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट को लगातार 37 दिन पूरे हो चुके हैं. यह किसी भी देश में अब तक का सबसे लंबा राष्ट्र-स्तरीय इंटरनेट शटडाउन है, जो अपनी गंभीरता और व्यापकता के मामले में दुनिया के अन्य सभी समान मामलों से कहीं अधिक है.

ईरान में इंटरनेट सेवाओं को 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इस्राएल के साथ युद्ध शुरू होने के साथ ही पूरी तरह बंद कर दिया गया था. तब से देश की आम जनता की वैश्विक इंटरनेट तक पहुंच खत्म हो गई है. केवल कुछ मुट्ठी भर अधिकृत लोगों को ही इंटरनेट इस्तेमाल की अनुमति है. यद्यपि कुछ लोग वीपीएन या स्टारलिंक के जरिए इस पाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरानी प्रशासन ने ऐसा करने वालों के लिए जेल की सजा का कड़ा प्रावधान कर रखा है.

नेटब्लॉक्स ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि हालांकि कुछ देशों में लंबे समय तक रुक-रुक कर या क्षेत्रीय स्तर पर इंटरनेट बंद रहा है, लेकिन पूरे देश में एक साथ इतने लंबे समय तक पूर्ण ब्लैकआउट अभूतपूर्व है. उत्तर कोरिया जैसे देश भले ही वैश्विक इंटरनेट से कभी नहीं जुड़े, लेकिन एक आधुनिक डिजिटल कनेक्टिविटी वाले देश में 37 दिनों का यह शटडाउन संचार, शिक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हो रहा है.

इंटरनेट की लत से निकलना होगा

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आयुष यादव
आयुष यादव एडिटर, डीडब्ल्यू हिन्दीhttps://x.com/aayush9906?s=21
आदर्श शर्मा
आदर्श शर्मा डीडब्ल्यू हिन्दी के साथ जुड़े आदर्श शर्मा भारतीय राजनीति, समाज और युवाओं के मुद्दों पर लिखते हैं.