बड़ी मजेदार है जानवरों की संगीत भरी दुनिया
पक्षियों के गाने के गुण के बारे में तो सब जानते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ जानवर भी सुर में सुर मिलाते हैं? आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ गाने वाले जानवरों के बारे में.

हंपबैक व्हेल की जादुई आवाजें
हंपबैक व्हेल अपने अनोखे आवाज निकालने की क्षमता के लिए मशहूर हैं. इनकी आवाज इतनी शक्तिशाली होती है कि इन्हें मीलों दूर तक सुना जा सकता है. माना जाता रहा है कि व्हेलें अपने साथी को आकर्षित करने या पास बुलाने के लिए गाना गाती हैं. हाल ही के एक शोध से पता चला है कि वे इन आवाजों का इस्तेमाल न सिर्फ दूसरी व्हेल को अपनी जगह बताने के लिए करते हैं, बल्कि मित्र और दुश्मन व्हेल की पहचान के लिए भी करते हैं.
पैसिफिक ट्री-फ्रॉग होते हैं रात के गायक
मेंढक की यह प्रजाति दक्षिणी अलास्का से लेकर मेक्सिको तक पाई जाती है. मादा को आकर्षित करने के लिए यह मेंढक रात में बहुत जोर-जोर से टर्राता है और ऐसा लगता है मानो एक साथ बहुत सारे नर-मेंढक गाना गा रहे हों. इसलिए इस प्रजाति को "पैसिफिक कोरस फ्रॉग" यानी की समूह में गाने वाला मेंढक भी कहा जाता है. नर-मेंढक अपने गाने से दूसरे नरों को अपने प्रजनन क्षेत्र के पास न आने की चेतावनी भी देते हैं.
बेलुगा व्हेल है हमारी समुद्री कैनरी चिड़ियां
बेलुगा व्हेल को उसके चमकदार सफेद रंग और और अनोखी आवाज निकालने कि क्षमता की वजह से “कैनरी ऑफ द सी” भी कहा जाता है. यह व्हेल ठंडे आर्कटिक समुद्रों में रहती है और एक सामाजिक जीव है. यह व्हेल तीखी चहचहाहट और क्लिक जैसी आवाजें निकालती है. वह संवाद करने, रास्ता खोजने और खाना ढूंढने के लिए इन आवाजों का उपयोग करती हैं, खासकर अंधेरे और बर्फीले आर्कटिक पानी में जहां नजर से तेज और बेहतर आवाज पहुंचती है.
झींगुर हैं धरती के सबसे पुराने गायक
इन छोटे से शोर मचाने वाले झींगुरों को कौन नहीं जानता. माना जाता है कि लगभग 30 करोड़ साल पहले जब डायनासोर धरती पर घूमते थे, तब झींगुर भी यहां थे. यह जीव अपने पंखों को रगड़कर एक विचित्र प्रकार की आवाज पैदा करते हैं. नर-झींगुर मुख्य रूप से मादा को आकर्षित करने के लिए यह आवाज निकालते हैं. इसकी अलग अलग प्रजातियों की अपनी अलग चहचहाहट होती है जिसकी रफ्तार मौसम के अनुसार बदलती है.
मैक्सिकन फ्री‑टेल्ड चमगादड़ होते हैं तेज उड़ने वाले गायक
इस प्रजाति का जीवन प्रवास से भरा होता है. यह सर्दियों में अक्सर दक्षिण अमेरिका और गर्मियों में मेक्सिको पहुंच जाते हैं. यह अपने साथी को आकर्षित करने के लिए रोमांटिक अंदाज में आवाजें निकालने वाले जीव भी हैं. अपने बच्चों का पता लगाने के लिए भी यह चमगादड़ विचित्र तरह की आवाजें पैदा करते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, इनके गीत अलग-अलग ध्वनियों से बने होते हैं और चमगादड़ इन्हें एक तय पैटर्न में दोहराते हैं.
एन्टिलोप गिलहरी की आवाज है इसका अलार्म सिस्टम
अमेरिका और मैक्सिको के सूखे रेगिस्तानी व झाड़ियों वाले इलाकों में रहने वाली गिलहरी अपनी चहचहाहट का इस्तेमाल सुरक्षित रहने के लिए करती है. वह आवाज को किसी अलार्म की तरह इस्तेमाल करती है ताकी बाकी गिलहरियां आने वाले खतरे से सावधान हो जाएं. वो इसकी मदद से अपने साथी और बच्चे को ढूंढती भी है. अगर गिलहरी आपको देख कर आवाज निकाल रही है, तो समझ जाइए कि वह अपने साथियों को आपके बारे में बता रही है.
पैसिफिक टोडफिश है गुनगुनाने वाली मछली
यह मछली दिखने में मेंढक जैसी होती हैं और आम तौर पर दुनिया के गर्म और मध्यम जलवायु वाले समुद्री तटों के पास पाई जाती है. इसके शरीर में खास ध्वनि मांसपेशियां होती हैं जो तरह-तरह की आवाजें निकालने में मदद करती हैं. ये अक्सर रात में घंटों तक गुनगुनाती है. चूंकि यह बाकी मछलियों की तुलना में कुछ खास आकर्षक नहीं मानी जाती, इसलिए नर-मछली अपनी आवाज का इस्तेमाल कर मादा को अपने घोंसले की ओर आकर्षित करती है.
ओरका या किलर व्हेल है समुद्र की सबसे ताकतवर आवाज
ठंडे समुद्री क्षेत्रों में अधिक संख्या में पाई जाने वाली ओरका व्हेल अल्ट्रासोनिक ध्वनि प्रणाली का प्रयोग करती हैं, जिसे इंसान केवल खास उपकरण से ही सुन पाते हैं. चूंकि किलर व्हेल के बड़े झुंडों में 30 से 150 तक व्हेलें लंबी यात्राएं करती हैं, इसलिए उनकी आपसी संवाद की क्षमता बेहद विकसित होती है. वह शिकार खोजने के लिए क्लिक की आवाजें और साथियों से बातचीत के लिए सीटी जैसी आवाज का इस्तेमाल करते हैं.