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विज्ञानलैटिन अमेरिका

वेनेजुएला के तेल से क्यों दूर भागती हैं ऑयल कंपनियां

ऐडम बाहीज अडाडा | अमांडा कोलसन-ड्रासनर
२५ मार्च २०२६

ईरान युद्ध के चलते पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच दुनिया, सबसे बड़े तेल भंडार वाले देश वेनेजुएला से तेल क्यों नहीं खरीद रही है? इसका जवाब छुपा है तेल की क्वालिटी और वेनेजुएला की राजनीति में.

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वेनेजुएला की एक तेल रिफाइनरी
तस्वीर: Jose Bula Urrutia/Eyepix Group/IMAGO

वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है. वहां पूरे अमेरिका से पांच गुना ज्यादा तेल मौजूद है. जनवरी 2026 में डॉनल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंधक बनाकर सत्ता परिवर्तन कर दिया. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने वेनेजुएला के तेल उद्योग को दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों के सामने परोस दिया. लेकिन इसे लेकर ऑयल कंपनियों में बहुत उत्साह नहीं दिखा.

तेल बाजारों के लिए कितना मायने रखता है ईरान का भविष्य?

28 फरवरी 2026 को अमेरिका ने इस्राएल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया. इस हमले के बाद ईरान ने भी पलटवार किया और होर्मुज जलमार्ग को बंद कर दिया. होर्मुज जलमार्ग बंद होने से एशिया और यूरोप समेत दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस के दाम बढ़ गए. युद्ध के चौथे हफ्ते में दाखिल होने के बाद भी ऊर्जा संकट का हल होता नहीं दिख रहा है,  लेकिन इसके बावजूद वेनेजुएला के तेल को लेकर बहुत दिलचस्पी फिर भी नहीं दिख रही है.

न्यू यॉर्क में निकोलस मादुरो
जनवरी 2026 में अमेरिका ने वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति मादुरो को बंधक बनाकर अमेरिका पहुंचायातस्वीर: X account of Rapid Response 47/AFP

कच्चे तेल का कोई एक मानक बैरल नहीं है

कच्चे तेल के मामले में एक स्टैंडर्ड बैरल तेल जैसी कोई चीज नहीं होती. यहां तो सारा मामला केमिकल कंपोजिशन का होता है. तेल को कहां और कितनी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है, ये इस बात पर निर्भर है कि वह आया कहां से है.

20वीं सदी की शुरुआत में वेनेजुएला में तेल का पहला बड़ा भंडार खोजा गया. देश के पश्चिमी हिस्से में. गल्फ, शेल और स्टैंडर्ड ऑयल जैसी बड़ी तेल कंपनियां फौरन वहां पहुंची और उन्होंने जल्द ही वेनेजुएला को दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक और निर्यातक बना दिया. 1980 के दशक में देश के पूर्वी हिस्से में तेल का एक बड़ा और हाई वैल्यू भंडार मिला. और जल्द ही देश के मध्य में एक और बड़ा तेल रिजर्व मिला, इसे ओरिनोको बेल्ट नाम दिया गया.

ओरिनोको बेल्ट में 1.2 ट्रिलियन बैरल तेल होने का अनुमान है. वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी पेडावेजा के साथ 17 साल तक काम कर चुके लुइस पचेको कहते हैं कि 1.2 ट्रिलियन की इस संख्या में एक खेल छुपा है. सच्चाई तो ये है कि वहां से करीब 250 अरब बैरल तेल ही बाहर आ सकता है. पचेको के मुताबिक, "ज्यादातर तेल वहीं जमीन में दबा रहेगा, मौजूदा टेक्नोलॉजी की वजह से. भौतिक विज्ञान की वजह से."

कच्चे तेल की अलग अलग किस्में
कच्चे तेल की अलग अलग किस्मे, बिल्कुल हल्के रंग वाला तेल सबसे अच्छा माना जाता हैतस्वीर: Ministry of Mines – Ethiopia

कच्चे तेल की अलग अलग किस्में

इसे समझने के लिए अलग अलग किस्म के तेल की पहचान जरूरी है. पहली पहचान है, भार. हल्का तेल ज्यादा तरल होता है और उसे निकालना भी आसान होता है. आप जमीन पर ड्रिल कीजिए और जियोलॉजिकल हीट और प्रेशर से तेल ऊपर की तरफ बहने लगेगा.  दुनिया के सबसे बड़े और कुशलता से चलने वाले तेल भंडार इसी तरह काम करते हैं. इनमें से कई अमेरिका और सऊदी अरब में हैं.

लेकिन वेनेजुएला के सबसे बड़े भंडार का तेल सिर्फ भारी ही नहीं, बल्कि अत्यंत भारी है. एरिक मुलर केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं. वेनेजुएला में पैदा हुए मुलर ने वहां लंबे समय तक काम भी किया. इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रोफेसर मुलर कहते हैं, ये क्रूड बहुत ही ज्यादा हेवी है, इतना कि अगर आप उसे बीकर में डालें और फिर उसे उल्टा करें तो कुछ नहीं होता. वह गाढ़े और चिपचिपे टार जैसा दिखता है.

इस एक्स्ट्रा हेवी क्रूड को जमीन की गहराई से निकालना बहुत ही मुश्किल होता है. एक तरीका स्टीम इंजेटिंग है, यानी भंडार के करीब गर्म भाप डालना. गर्मी गाढ़े तेल को तरल बनाती है और फिर उसे पंप कर बाहर निकाला जाता है. वेनेजुएला के ओरिनोको में दूसरा नेफ्था वाला तरीका इस्तेमाल किया जाता है. इसमें तेल भंडार में हल्का नेफ्था डाला जाता है. इससे क्रूड कम चिपचिपा हो जाता है. लेकिन ये प्रक्रियाएं महंगी हैं.

नाइजीरिया की एक रिफाइनरी
एक्स्ट्रा हेवी कच्चे तेल की रिफाइनिंग में उत्सर्जन भी खूब होता हैतस्वीर: PIUS UTOMI EKPEI/AFP

रिफाइनिंग खर्चीली और जटिल भी

हल्के तेल को शुद्ध करना काफी आसान है. इसे डिस्टिलरी में डालिए, और बिना ज्यादा ताम झाम के शुद्ध तेल निकालिए. लेकिन वेनेजुएला के जैसे, बहुत ही हेवी तेल को साफ करने में खूब मशक्कत लगती है. पहले तो रिफानरी को ही अपग्रेड करना पड़ता है, ताकि तेल, रिफाइनरी की पाइपलाइनों में बहने लायक तो बन सके. इसके बाद भी एक बड़ा अंतर बचता है. 

डेब्रा गॉर्डन, कई दशकों से अलग अलग किस्म के तेल और गैस से होने वाले उत्सर्जन पर रिसर्च कर रही हैं. गॉर्डन कहती हैं, "सऊदी या वेस्ट टेक्सस बैरल से ज्यादा पेट्रोल और जेट फ्यूल बनता है. तेल से जुड़ी अर्थव्यवस्था में अभी इसी की तो बड़ी मांग हैं. वेनेजुएला, कनाडा का एक्स्ट्रा हेवी बैरल, कोलतार, रूफिंग प्रोडक्ट्स, हेवी फ्यूल और शिंपिग में काम आता है."

वेनेजुएला की एक मात्र सरकारी तेल कंपनी पेडावेजा
वेनेजुएला की एक मात्र सरकारी तेल कंपनी पेडावेजातस्वीर: Carlos Garcia Rawlins/REUTERS

उत्सर्जन भी बड़ी समस्या

वेनेजुएला के कच्चे तेल के साथ मीथेन उत्सर्जन की भी बड़ी समस्या है. गॉर्डन बताती हैं, "मीथेन, सीओटू के मुकाबले 80 गुना ज्यादा ताकतवर है. आप दोनों को नहीं चाहते. ऐसे में कोशिश की जाती है कि मीथेन तो कम से कम ही हो."

इस गैस से निपटने का आसान तरीका है, इसे जलाना. फ्लैरिंग कही जाने वाली इस प्रक्रिया में सीओटू बनती है. लेकिन मीथेन लपटों को बरकरार रखना पड़ता है. फिलहाल वेनेजुएला का तेल उद्योग ऐसा मेंटेन करने की हालत में नहीं है. अगर आप हर तरह के तेल से होने वाले उत्सर्जन को देखेंगे तो भी वेनेजुएला का तेल झटका देता है. यह भले ही सस्ता लगे लेकिन यह सबसे ज्यादा उत्सर्जन भी करता है.

वेनेजुएला में तेल का खनन का एक बर्बाद ढांचा
विदेशी दक्षता के अभाव ने भी वेनेजुएला के तेल उद्योग को नुकसान पहुंचायातस्वीर: Leonardo Fernandez Viloria/REUTERS

वेनेजुएला से क्यों कतराती हैं विदेशी तेल कंपनियां

विदेशी तेल कंपनियों के साथ वेनेजुएला का इतिहास मुश्किलों से भरा भी रहा है. वे दो बार देश निकाला देख चुकी हैं. एक बार 1946 में तेल उद्योग के राष्ट्रीयकरण के दौरान सभी तेल कंपनियों की संपत्तियां जब्त कर, पेडावेजा कंपनी के गठन के दौरान. दूसरी बार ह्यूगो शावेज के कार्यकाल में. 1998 में राष्ट्रपति चुने जाने के बाद शावेज ने, देश के तेल उद्योग को हर तरह के विदेशी कर्मचारियों और प्रभावों से मुक्त कर दिया.

इससे वेनेजुएला के पास हर चीज को ढंग से चलाए रखने के लिए जरूरी दक्षता नहीं बची. धीरे धीरे तेल उद्योग से जुड़ा ढांचा और उत्पादन कमजोर पड़ने लगा. दूसरी तरफ विदेशी कंपनियों को लगा कि वेनेजुएला में नया निवेश कभी भी बर्बादी में बदल सकता है. इसलिए वे जरूरी निवेश से कतराने लगीं.

वेनेजुएला के तेल भंडार के साथ सबसे बड़ी समस्या