रूसी हमले से लड़ने के लिए छोटा सा देश फिनलैंड कैसे तैयारी कर रहा है
संभावित रूसी हमले से निपटने के लिए छोटे-से पड़ोसी देश फिनलैंड के सैनिक माइनस 28 डिग्री सेल्सियस में तैयारी कर रहे हैं. आखिर क्यों फिनलैंड अपने सबसे बड़े पड़ोसी रूस को बड़ा खतरा मानता है?

अगर पड़ोसी हमला कर दे..
उत्तरी यूरोप के छोटे से देश फिनलैंड में नवंबर से मार्च के दिन सबसे ठंडे होते हैं. दिसंबर के इस सर्द महीने में फिनलैंड के सैनिक लड़ने का अभ्यास कर रहे हैं. बर्फीली सरहद पर, जहां तापमान माइनस 28 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क रहा है, वहां ये सैनिक सीख रहे हैं कि अगर किसी दिन उनका पड़ोसी हमला कर दे, तो अपने देश को किस तरह बचाया जाएगा.
रूस के साथ फिनलैंड का ऐतिहासिक अनुभव
दिसंबर 1917 में रूसी साम्राज्य से आजादी हासिल करने के बाद फिनलैंड ने सोवियत संघ से दो युद्ध लड़े. पहला, 1939-1940 का विंटर वॉर. दूसरा, 1941-1944 का 'कन्टिन्यूएशन वॉर.' अपने इतिहास और अतीत के अनुभवों के कारण फिनलैंड, रूस को अपना सबसे बड़ा जोखिम और चुनौती मानता रहा है.
फिनलैंड और रूस की लंबी सीमा
छोटे से फिनलैंड का विशालकाय पड़ोसी है, रूस. दोनों के बीच 1,340 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है. फिनलैंड को रूसी हमले की आशंका साल रही है. यूक्रेन पर रूस का हमला और पुतिन का विस्तारवादी रुझान, इनके कारण फिनलैंड को खतरे का आभास हो रहा है.
यूक्रेन पर हमला था खतरे की घंटी!
यही वजह है कि सैन्य गुटनिरपेक्षता की नीति पर चलने वाला फिनलैंड अप्रैल 2023 में नाटो का हिस्सा बन गया. हालांकि, सदस्य बनने से पहले भी फिनलैंड नाटो का सहयोगी था. साल 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, तो ईयू का अकेला सदस्य फिनलैंड ही था जिसकी सरहद रूस से लगती है लेकिन वो नाटो में नहीं है.
देश की रक्षा, हर नागरिक की जिम्मेदारी
फिनलैंड का संविधान कहता है कि हर नागरिक देश की रक्षा में हिस्सा लेने के लिए बाध्य है. यह राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का हिस्सा है. इस संबंध में तीन प्रमुख कानून हैं: कन्सक्रिप्शन ऐक्ट, सिविल सर्विस ऐक्ट और वॉलंटरी मिलिट्री सर्विस फॉर विमेन ऐक्ट. फिनलैंड की इस सैन्य व्यवस्था के कारण उसके इतिहास से भी जुड़े हैं.
किस उम्र के पुरुष करते हैं सैन्य सेवा
18 से 60 आयुवर्ग के फिनिश पुरुष अनिवार्य सैन्य सेवा के लिए बाध्य है. इसमें हथियारबंद या बिना हथियार की सैन्य सेवा, या फिर नॉन-मिलिट्री सर्विस शामिल है. विकलांगता, बीमारी या स्वास्थ्य कारणों से सैन्य सेवा से छूट दी जाती है.
महिलाएं भी कर सकती है वॉलेंटरी सर्विस
साल 1995 से महिलाएं भी स्वेच्छा से सैन्य सेवा के लिए आवेदन कर सकती हैं. इसके लिए तय आयुवर्ग 18 से 29 साल है. यह भी जरूरी है कि आवेदक की सेहत सैन्य प्रशिक्षण के लिए मुफीद हो. महिलाओं और पुरुषों, दोनों को लीडरशिप ट्रेनिंग और सेना में संभावित करियर की आर्हता पाने के लिए समान अवसर का अधिकार है.
कैसे काम करती है अनिवार्य सैन्य सेवा
हर पुरुष नागरिक को 18 साल का होने पर सैन्य सेवा के लिए बुलाया जाता है. इसे कॉल-अप कहते हैं. यहीं मिलिट्री सर्विस के लिए फिटनेस भी तय की जाती है. अगर हथियारबंद सेवा की इच्छा ना हो, तो ऐसी मिलिट्री सर्विस की जा सकती है जिसमें हथियारों की ट्रेनिंग नहीं दी जाती. नॉन-मिलिट्री सर्विस का भी विकल्प है, मगर इसकी भी ट्रेनिंग दी जाती है और काम करना पड़ता है.
क्या ट्रेनिंग के बाद जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?
अनिवार्य सैन्य सेवा पूरी करने के बाद लोग रिजर्व में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं. जिन लोगों ने सशस्त्र प्रशिक्षण पूरा किया होता है, उन्हें 60 साल का होने तक जरूरत पड़ने पर फिर से ट्रेनिंग के लिए बुलाया जा सकता है. या, अगर मौका आए तो फिनलैंड की रक्षा के वास्ते लड़ने के लिए बुलाया जा सकता है.
युद्धकाल में नागरिक सेवाओं में हिस्सेदारी
जो लोग कन्सक्रिप्शन में नॉन-मिलिट्री ट्रेनिंग लेते हैं, उन्हें युद्ध की स्थिति में भी सेना में काम करने के लिए नहीं कहा जा सकता. हां, मगर जंग का खतरा हो तो ऐसे लोगों को युद्धकाल में नागरिक जिम्मेदारियों में काम करना होगा.
रूस का बढ़ता खतरा
अनिवार्य सैन्य सेवा के 2025 के बैच में करीब 1,900 लोग थे. इन्होंने छह महीने की ट्रेनिंग पूरी की. इनके अलावा कई रिजर्व फोर्सेज, या पार्ट-टाइम सैनिकों को भी ड्रिल में शामिल किया गया. इन्होंने रूसी सीमा से करीब 32 किलोमीटर दूर, वूसान्का के बर्फीले जंगल में अभ्यास में किया. रिजर्व सैनिकों ने कहा कि रूस के हमला करने की स्थिति में अपने देश के लिए लड़ना उनका फर्ज है.
"सब समझते हैं खतरा तो है"
यूक्रेन युद्ध ने फिनलैंड की असुरक्षा बढ़ा दी है. इस चिंता को रेखांकित करते हुए मेजर कारी साउकोनेन ने बताया, "अगर मैं अपने सिविलियन दोस्तों की तरफ देखूं, तो हर कोई यूक्रेन में शांति आने की उम्मीद कर रहा है. हर कोई सोच रहा है कि शांति आने के बाद रूसी क्या करेंगे. सब समझते हैं कि खतरा तो है."