पुराने फैशन वाला कीमती पत्थर 'ऐम्बर' फिर बना हिप
अपने खूबसूरत सुनहरे रंग की वजह से ऐम्बर के गहने पुराने जमाने में बहुत पसंद किए जाते थे. लेकिन अब पोलैंड के कुछ युवा ज्वेलरी डिजाइनर इन कीमती प्राकृतिक रत्नों को एक आधुनिक पहचान दिलाने में लगे हैं.

आधुनिकता और परंपरा का संगम
इस हार का ऐम्बर (पेड़ों की रेजिन) के परंपरागत गहनों से कोई लेना देना नहीं है. ऐम्बर का इस्तेमाल कर पोलिश राजधानी गदांस्क के फाइन आर्ट्स अकादमी के स्टूडेंट्स ने कुछ अनूठे गहनों का निर्माण किया है. इन्हें रूप देने के लिए उन्होंने ड्रिल, पॉलिशिंग मशीन जैसे पारंपरिक आभूषण बनाने वाले औजारों के साथ‑साथ 3डी प्रिंटर जैसे आधुनिक उपकरणों का भी उपयोग किया.
युवाओं की रचनात्मक पहल
ऐम्बर से बने गहनों को आउटडेटेड कहा जाने लगा है. इसी धरणा को तोड़ने के लिए कुछ युवा डिजाइनर इस पीले पत्थर जैसे दिखने वाले रत्न को नया रूप देना चाहते हैं. 26 वर्षीय छात्रा मार्टिना गोलींस्का ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, "हम शुरुआत से ही इसे डिजाइन करने की पूरी प्रक्रिया को सीख रहे हैं. इस प्रक्रिया में रचनात्मक सोच और आधुनिक तकनीकें भी शामिल हैं."
समय में जमी प्रकृति
ऐम्बर कोई मामूली पत्थर नहीं है. यह लाखों साल पुरानी फॉसिलाइज्ड ट्री-रेजिन से बनता है. आपको ताज्जुब होगा कि इस टुकड़े की रचना करीब 40 लाख साल पहले ही शंकुधारी वृक्ष के रेजिन से हो चुकी थी. आमतौर पर ऐम्बर के भीतर हवा के छोटे बुलबुले फंसे हुए होते हैं और कभी‑कभी तो जीवाश्मीकरण के दौरान इनमें पौधों के टुकड़े या कीड़े फंस जाते हैं जो हर टुकड़े को अनोखा बनाते हैं.
'बाल्टिक गोल्ड'
ऐम्बर इकट्ठा करने वाले बाल्टिक सागर के लाश्का समुद्र तट पर नारंगी‑पीले जीवाश्मों की खोज के लिए हाइड्ऱॉलिक उपकरणों का उपयोग करते हैं. प्राचीन काल में 'ऐम्बर रोड' नामक प्रमुख व्यापार मार्ग हुआ करता था. यह मार्ग पोलैंड के समुद्री तट से होकर गुजरता था. इसी मार्ग से 'बाल्टिक गोल्ड' के नाम से प्रसिद्ध ऐम्बर भूमध्यसागरीय इलाकों तक भेजा जाता था.
दुनिया भर में हैं ऐम्बर के प्रेमी
ऐम्बर की लोकप्रियता दुनिया भर में फैली हुई है. जहां चीन में इसे कथित स्वास्थ्य लाभों के कारण सराहा जाता है, वहीं इस्लाम में इसका उपयोग इन तस्वीरों में दिख रही तस्बीह (प्रार्थना माला) बनाने के लिए किया जाता है. गदांस्क के ओल्ड टाउन इलाके में लगभग हर कोने में ऐम्बर की दुकानें और स्टॉल दिखाई देते हैं. यही वजह है कि इस बाल्टिक शहर को 'ऐम्बर की वैश्विक राजधानी' भी कहा जाता है.
नए की खोज में युवा डिजाइनर
गदांस्क में एक ट्रेड फेयर के दौरान एक मॉडल आधुनिक ऐम्बर ज्वेलरी पहने हुए नजर आ रही है. डोमिनिका अफेल्टोविच नामक छात्रा ने एएफपी को बताया, "युवा कुछ नए की तलाश में हैं." उनके अनुसार उभरते डिजाइनर कुछ अलग करने की कोशिश कर रहे हैं. चूंकि ऐम्बर को आकार देना आसान होता है इसलिए इसके साथ प्रयोग करना सहज है.
ऐम्बर का भविष्य
इन कलात्मक कृतियों को डिजाइन की छात्रा मार्टिना गोलींस्का ने 3डी प्रिंटर का इस्तेमाल कर के बनाया है. इसमें गहरे रंग का जड़ा हुआ ऐम्बर पहली नजर में पहचान में भी नहीं आ रहा है. स्टूडेंट्स की कोशिश है कुछ ऐसा बनाना, जो रेडी-टू-वेयर फैशन और मॉडर्न फैशन जगत दोनों में जगह पा सके. युवा पोलिश डिजाइनरों का लक्ष्य ऐम्बर को भविष्य की डिजाइन दुनिया से जोड़े रखना है.