भारत में राजनीतिक पार्टी कैसे बनती है?
क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में नई राजनीतिक पार्टी बनाना कितना आसान या मुश्किल होता है? आवेदन से लेकर चुनावी मान्यता तक किसी दल को क्या-क्या कदम उठाने पड़ते हैं...तस्वीरों में जानिए पूरा सिस्टम.

शुरुआत कैसे होती है?
भारत में राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए सबसे पहले एक संगठन बनाना होता है और उसका नाम तय किया जाता है.
चुनाव आयोग में आवेदन
राजनीतिक पार्टी बनने के 30 दिनों के भीतर भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के पास रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करना जरूरी होता है.
पार्टी का संविधान
आवेदन के साथ 10,000 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना अनिवार्य है. इसके अलावा, पार्टी के मेमोरेंडम, नियम-कायदे या संविधान की प्रिंटेड कॉपी भी शामिल करनी होती है. पार्टी के संविधान में यह स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए कि संगठन के अलग‑अलग स्तरों पर आंतरिक चुनाव कैसे और कितनी अवधि में होंगे, साथ ही संगठन के अधिकारियों का कार्यकाल क्या होगा.
अखबार में घोषणा
मौजूदा नियमों के तहत, आवेदन करने वाली पार्टी को अपने प्रस्तावित नाम को दो राष्ट्रीय और दो स्थानीय अखबारों में प्रकाशित कराना होता है. इसके बाद, प्रकाशन की तारीख से 30 दिनों के भीतर आयोग को पार्टी के रजिस्ट्रेशन पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए 2 दिन का समय दिया जाता है.
जरूरी दस्तावेज
पार्टी को यह भी दिखाना होता है कि उसके कम से कम 100 सदस्य पंजीकृत मतदाता हैं, जिसके लिए उनकी नवीनतम मतदाता सूची जमा करनी होती है. इसके साथ ही, पार्टी के अध्यक्ष या महासचिव द्वारा प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट/शपथ आयुक्त/नोटरी के सामने शपथ-पत्र देना होता है, जिसमें यह पुष्टि की जाती है कि पार्टी का कोई भी सदस्य किसी अन्य पंजीकृत राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं है.
रजिस्ट्रेशन का फायदा
यह स्पष्ट है कि चुनाव लड़ने के लिए आयोग में पार्टी का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य नहीं है. हालांकि, रजिस्ट्रेशन कराने पर पार्टी को प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत मिलने वाले कई कानूनी और प्रक्रियात्मक लाभ उठाने में आसानी होती है. इसमें चुनाव चिह्न देने के मामले में प्राथमिकता भी शामिल है.
मान्यता कब मिलती है?
नियमों के मुताबिक, अगर किसी पार्टी को "राज्य पार्टी" का दर्जा मिलता है, तो उस राज्य में उसके उम्मीदवारों को उसका निर्धारित चुनाव चिह्न विशेष रूप से आवंटित किया जाता है. अगर "राष्ट्रीय पार्टी" का दर्जा मिले तो पार्टी के उम्मीदवारों को पूरे देश में वही आरक्षित चुनाव चिह्न मिलता है.
राज्य पार्टी के नियम
राज्य में तय वोट प्रतिशत और सीटें हासिल करने के आधार पर पार्टी को "राज्य पार्टी" का दर्जा मिलता है.
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा
किसी राजनीतिक पार्टी को "राष्ट्रीय पार्टी" का दर्जा हासिल करने के लिए कम से कम चार राज्यों में मान्यता मिली होनी चाहिए. इसके अलावा चार राज्यों में छह प्रतिशत वोट और चार सांसद या फिर लोकसभा की कुल सीटों में से कम से कम 2 प्रतिशत सीट जीतने पर भी राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल सकता है. ये उम्मीदवार कम से कम तीन राज्यों से होने चाहिए.
पार्टी को सुविधाएं
मान्यता प्राप्त पार्टियों को पार्टी दफ्तर के लिए सब्सिडी वाली जमीन जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं. मान्यता प्राप्त पार्टियां आम चुनाव के दौरान आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रचार के लिए समय हासिल कर सकती हैं.