फरात नदी के बनने की कहानी
वैज्ञानिकों ने फरात नदी के बनने की कहानी ढूंढ ली है. तुर्की, सीरिया और इराक से होकर बहने वाली इस नदी के मैदान प्राचीन सभ्यता का आंगन रहे हैं. इस नदी की कहानी में मानव सभ्यता के विकास का ब्यौरा मिलता है.

मानव सभ्यता का पालना
दुनिया का पहला मेट्रोपॉलिस कहा जाने वाला उरुक लिखित भाषा की जन्मभूमि है. इसे फरात नदी से जीवन मिला और यह प्राचीन मेसोपोटामिया का सबसे बड़ा शहर था. फरात और उसकी सखी दजला के बीच की उर्वर जमीन को उन जगहों में गिना जाता है जहां मानव सभ्यता को शुरुआती दौर में फलने फूलने का मौका मिला.
पहली बार कैसे बनी फरात नदी
कई हजार साल पहले नगरीय सभ्यता के बड़े ठिकानों का जन्म होने से पहले की भौगोलिक परिस्थितियों का पता लगा कर रिसर्चरों ने इतिहास खंगाला है. भूकंपीय तस्वीरों और दबी हुई परतों के साथ ही दूसरे आंकड़ों की मदद से उन्होंने बताया है कि फरात नदी का जन्म करीब 36 -16 लाख साल के बीच उनसे पहले की दो नदियों के संगम से हुआ था. तुर्की के दक्षिण में टॉरस पर्वतों में भूगर्भीय गतिविधियों ने इस घटना को अंजाम दिया था.
2,800 किलोमीटर लंबी फरात नदी
दक्षिण-पश्चिमी एशिया की सबसे बड़ी नदी फरात का विस्तार करीब 2,800 किलोमीटर में हैं. तुर्की से निकल कर यह सीरिया और इराक से बहती हुई खाड़ी के समंदर में जा कर मिलती है. वर्तमान में तुर्की के बिरेजिक, सीरिया के रक्का और इराक के रामादी, फलुजा और नसरियाह शहर इसी नदी के किनारे बसे हुए हैं. फरात नदी के किनारे बसे प्राचीन शहरों में उर और मारी भी शामिल हैं.
नदी के रास्ते मानव विकास की कहानी
फरात नदी ने लंबे समय से इस इलाके के भूगोल को आकृति दी है. हालांकि इसकी उत्पत्ति और आधुनिक रूप में ढलने की कहानी अब भी रहस्यमय है. रिसर्चरों का कहना है कि नदी के पीछे की कहानी को जानना इसके जलक्षेत्र के इलाके में मानव संस्कृति के कृषि, लेखन और शहरी विकास के साथ ही कई और क्षेत्रों के अहम पड़ावों को समझने के लिए जरूरी है.
मुरात और करासू की पूर्वज
भूमध्य सागर के नीचे भूविज्ञानियों ने सतह से नीचे के भूकंपीय आंकड़ों का इस्तेमाल कर एक दबी हुई खाड़ी जैसी चीज का पता लगाया. इसकी आयु 50 लाख साल से ज्यादा है. उस वक्त सागर का बड़ा हिस्सा सूख गया था. इस घटना को मेसिनियन सैलिनिटी क्राइसिस कहा जाता है. रिसर्चरों का कहना है कि आधुनिक तुर्की के करासु और मुरात नदियों की पूर्वज दो नदियां तुर्की और सीरिया के इलाकों से बहते हुए खाड़ी में गिरती थीं.
दो नदियों का मिलना
वैज्ञानिक मानते हैं कि भूकंप के लिए संवेदनशील इन इलाकों में भूगर्भीय घटनाओं ने मुरात की पूर्वज को खाड़ी की तरफ मोड़ दिया. दूसरी तरफ करासू की पूर्वज बाद में उससे आकर मिल गई. इन्हीं दो नदी प्रणालियों के मिलने से एक ताकतवर नदी प्रणाली का जन्म हुआ जिसे फरात कहा जाता है.
कैसे पता लगाया वैज्ञानिकों ने
वैज्ञानिकों की इस रिसर्च का मुख्य औजार था भूकंपीय चित्रण. इस तकनीक में पृथ्वी की उपसतह का विस्तृत 3डी नक्शा तैयार होता है. इसके लिए जमीन के भीतर ध्वनि तरंगों की यात्रा और चट्टानों की परतों में टकराकर लौटने के मार्ग आधार बनते हैं. इसी भूकंपीय चित्रण के जरिए उन्होंने सागर के तल के नीचे छिपे प्राचीन नदी की खाड़ी का पता चला. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक कुछ कुछ अल्ट्रासाउंड जैसी है.
दजला फरात का तेज बहाव
जमीन के भीतर मौजूद कारकों का मॉडल बना कर वैज्ञानिकों ने बताया है कि प्राचीन काल में दजला और फरात नदी का बहाव काफी तेज था. टॉरस पर्वत में घाटियों की तलछटों और कोयले के खदानों से मिले आंकड़ों से वैज्ञानिक इस निश्चय पर पहुंचे हैं कि आधुनिक दौर की करासू और मुरात नदियां सागर के नीचे मिली खाड़ी का स्रोत रही होंगी. किसी समय नदियों का संपर्क निचली घाटियों से कट गया और ये आपस में मिल कर फरात नदी बन गईं.
नदी और सभ्यता का विकास
आज फरात और दजला नदी का पानी बसरा के पास मिल कर फारस की खाड़ी के ऊपर एक विशाल डेल्टा बनाता है. इन नदियों ने मेसोपोटामियाई मैदानों के एक विशाल भूभाग को भर दिया जिस पर शुरुआती खेती के साथ ही नगर राज्यों और लिखने की कला का विकास हुआ. शुरुआती मानव सभ्यता के क्रम में इन जगहों पर हुए विकास मील का पत्थर साबित हुए.
बदल सकती है नदी की धारा
भौगोलिक घटनाएं बेहद ताकतवर नदियों की धारा भी बदल सकती हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती की सबसे बड़ी नदी अमेजन पहले पश्चिम की ओर आधुनिक दौर के कोलंबिया और पेरू की तरफ और उसके पैलियो पैसिफिक डेल्टाई तटों की ओर बहती थी. ये तब की बात है जब एंडीज पर्वतों का उभार शुरू नहीं हुआ था. लाखों साल पहले एंडीज पर्वत के उभार के बाद सारी सहायक नदियों की दिशा बदल गई और अब अमेजन अटलांटिक में जा कर गिरती है.