गोबर, गुड़ और आटा दूर कर रहा भारत में खाद संकट
भारत में खरीफ की बुवाई से पहले किसानों के बीच डाय-अमोनियम फॉस्फेट और यूरिया जैसे प्रमुख रासायनिक खाद की कमी हो गई है. कुछ महिलाएं गोबर, गुड़ और आटा से खेती के लिए जैविक खाद बना रही है.

उत्तर प्रदेश में महिलाएं बना रही जैविक खाद
57 साल की कमलेश देवी उत्तर प्रदेश के टप्पल कस्बे में ‘टप्पल समृद्धि महिला किसान लिमिटेड’ नाम की संस्था चलाती हैं. इस संस्था में गांव की महिलाएं गोबर, गुड़, आटा और दूसरी स्थानीय चीजों का इस्तेमाल करके छोटे किसानों के लिए जैविक खाद तैयार कर रही हैं. आज इस संस्था से 92 गांवों की लगभग 1,050 महिलाएं जुड़ी हैं.
भारत में जैविक खाद की बढ़ी मांग
रासायनिक खाद के विकल्प की तलाश में अब किसानों के बीच जैविक खाद की मांग बढ़ रही है. भारत का जैविक खाद बाजार लगभग 15 करोड़ डॉलर का है और यह हर साल लगभग 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. इस संस्था ने केवल इस साल में आसपास के गांवों के करीब 200 किसानों को जैविक खाद उपलब्ध कराया है.
ग्रामीण महिलाओं की भूमिका बदली
इस पहल ने महिलाओं को खेती से जुड़े निर्णयों और आर्थिक गतिविधियों में अधिक भागीदारी का अवसर दिया है. इस संगठन की सदस्य जोगिंदर ने कहा, “पहले हम घर तक ही सीमित रहते थे. खेती के सभी फैसले मेरे पति लेते थे. लेकिन अब मैं भी उन्हें खेतों में क्या और कब इस्तेमाल करना है, इसकी सलाह देती हूं.”
महंगा लेकिन असरदार
जैविक खाद की 40 किलो की बोरी 300 रुपये में मिलती है, जबकि 50 किलो यूरिया 266 रुपये और 50 किलो डीएपी लगभग 1,350 रुपये का मिल जाता है. यह थोड़ा महंगा जरूर है लेकिन जैविक खाद का इस्तेमाल करने वाली 28 वर्षीय किसान नीतू बताती हैं कि इस खाद का इस्तेमाल कर उन्होंने बाजरा की फसल में यूरिया की मात्रा को लगभग एक-तिहाई तक घटा दिया है. वह अब धान की खेती में भी रासायनिक खाद का इस्तेमाल घटाने का सोच रही हैं.
पर्यावरण और मिट्टी के लिए लाभकारी जैविक खाद
जैविक खाद मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक तत्वों को पौधों तक पहुंचाने में मदद करते हैं और मिट्टी की गुणवत्ता भी सुधारते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, जैविक खाद मिट्टी में कार्बन बढ़ाने, मिट्टी की सेहत सुधारने और रासायनिक खाद की वजह से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में मददगार साबित होते हैं.
पूरी तरह से रासायनिक खाद की जगह नहीं ले सकते
विशेषज्ञों का मानना है कि जैविक खाद बेशक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल होते हैं लेकिन वह फिलहाल पूरी तरह से रासायनिक खाद का विकल्प नहीं बन सकते. चूंकि, जैविक खाद के इस्तेमाल से काफी धीमी गति से फायदा मिलता है. साथ ही, जैविक खाद सभी तरह की फसलों के लिए कारगर नहीं हैं.