दुनिया भर के अनोखे और खूबसूरत लेटरबॉक्स
कभी हमारे रोजमर्रा का हिस्सा रही डाक पेटियां आज की डिजिटल दुनिया में अपने निशान खोती जा रही हैं. डेनमार्क जैसे कुछ देशों में इतिहास बन चुके हैं लेटरबॉक्स. लेकिन कई देशों में आज भी मौजूद हैं कई खास तरह की डाक पेटियां.

18वीं सदी का ऐतिहासिक स्वयंचलित डाकघर
गैलापागोस द्वीप समूह का पोस्ट ऑफिस बे एक ऐतिहासिक जगह है, जिसकी शुरुआत 18वीं सदी में हुई थी. उस समय व्हेल का शिकार करने वाले नाविकों ने एक लकड़ी का पीपा खड़ा कर उसे अस्थायी डाकघर जैसे इस्तेमाल करना शुरू किया था. वह अपना पता लिखकर चिट्ठियां उसमें छोड़ देते थे. जो भी दूसरा नाविक उस ओर जा रहा होता था, वह चिट्ठी पहुंचा देता था. आज भी पर्यटक इस अनोखी परंपरा को जारी रखे हुए हैं.
कोलोनियल दौर की विरासत
यह लेटर बॉक्स मूल रूप से जर्मन ईस्ट अफ्रीका (यानी आज के तंजानिया) के उसांबारा रेलवे लाइन के एक स्टेशन पर लगाया गया था. 1916 में जब ब्रिटिश सेना ने इस इलाके पर कब्जा किया, तो एक ब्रिटिश अधिकारी ने यह डाक पेटी लाहौर (पाकिस्तान) के पोस्ट ऑफिस को भेंट कर दी. आज यह लेटर बॉक्स पाकिस्तान के गोलरा शरीफ रेलवे म्यूजियम का हिस्सा है.
दुनिया का सबसे रोमांटिक पोस्ट बॉक्स
उत्तर-पश्चिमी जर्मनी के 500 साल से भी अधिक पुराने ओक के पेड़ को “ब्रॉयटिगाम्सआइशे” या “दूल्हे का ओक” भी कहा जाता है. करीब 100 सालों से यह पेड़ दुनिया भर के अकेले दिलों की चिट्ठियों का पता बना हुआ है. सच्चे प्यार की तलाश कर रहा कोई भी व्यक्ति इन चिट्ठियों को निकालकर पढ़ सकता है. कहा जाता है कि इस अनोखी परंपरा से अब तक 100 से ज्यादा शादियां हो चुकी है.
झील से भेजी जाने वाली डाक
कश्मीर की डल झील में दुनिया का इकलौता तैरता हुआ पोस्ट ऑफिस होने का दावा किया जाता है. करीब 200 साल पुरानी हाउसबोट पर बना यह पोस्ट ऑफिस साल 1953 से मौजूद है. तब स्थानीय डाक सेवा ने झील के आसपास रहने वाले लोगों तक डाक पहुंचाने के लिए यह सेवा शुरू की थी. आज भी स्थानीय लोगों और पर्यटक इस तैरते हुए पोस्ट ऑफिस का इस्तेमाल करते हैं.
पानी के अंदर डाक पेटी
1999 में जापान के शहर सुसामी में अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए स्थानीय पोस्टमास्टर ने पानी के अंदर एक डाक पेटी लगवाई. ताकि गोताखोर लगभग 33 फीट नीचे जाकर खास वाटरप्रूफ पोस्टकार्ड इस डाक पेटी में डाल सके. बाद में स्थानीय डाइव शॉप का मालिक इन पोस्टकार्ड्स को निकालकर पोस्ट ऑफिस तक पहुंचा देता है. भले ही यह थोड़ा अजीब लगे, लेकिन इसके कारण सुसामी आज एक लोकप्रिय डाइविंग केंद्र बन गया है.
सार्वजनिक कला
स्लोवाकिया की राजधानी में मूर्तिकार लादिस्लाव साबो की बनाई यह कला कृति स्केटबोर्डिंग से आराम लेती हुई दो युवा लड़कियों को दिखाती है. उनमें से एक लड़की जिस चीज पर टिकी हुई है, वह स्लोवाक डाक विभाग की आधिकारिक डाक पेटी है. यह कलाकृति और पेटी शहर की पहली डाक पेटी की याद में रखे गए हैं.
पर्यटकों का मुख्य आकर्षण
2015 में जब ताइवान में टाइफून साउडेलोर आया, तो ताइपे में एक साइन बोर्ड गिरकर दो डाक पेटियों से जा टकराया. जिससे वह एक तरफ झुक गए और उनकी बनावट एक इंसानी चेहरे जैसी लगने लगी. यह डाक पेटियां जल्द ही वायरल हो गई. ताइवान की डाक सेवा ने यहां डाली गई चिट्ठियों के लिए एक खास पोस्टमार्क भी शुरू किया है.
एलियंस के लिए चिट्ठी
नेवादा का हाइवे 375, जिसे एक्स्ट्राटेरेस्ट्रियल हाइवे भी कहा जाता है. उसके किनारे एक काला डाक बक्सा है. यह जगह परंपरागत रूप से यूएफओ खोजने वालों की मुलाकात का ठिकाना रहा है. शुरुआत में यह डाक पेटी निजी थी, लेकिन कई लोग इसका इस्तेमाल एलियन जीवन से संपर्क की कोशिश के लिए करने लगे. बाद में इसके मालिक ने इसे छोड़ दिया और यह डाक पेटी एलियंस के नाम संदेश छोड़ने की जगह बन गया.
मेलबॉक्स जिसने एक संरक्षित क्षेत्र को बचाया
करीब 40 साल पहले, उत्तरी कैरोलिना के बर्ड आइलैंड के एक दूर के हिस्से में दो लोगों ने किंड्रेड स्पिरिट मेलबॉक्स बनाया. इसमें एक किताब रखी गई, जिसमें आने वाले लोग अपने विचार और भावनाएं लिखते थे. इन संदेशों ने द्वीप को निर्माण कार्य से बचाने में मदद की. जिस कारण यह इलाका आज भी संरक्षित प्रकृति क्षेत्र बना हुआ है.
ध्यान खींचने वाला लाल डब्बा
जुलाई 2023 में स्कॉटलैंड के सेल्किर्क मार्केट स्क्वायर के दौरे के दौरान किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला एक डाक पेटी देखते हैं. जिस पर हाथ से बुना हुआ मुकुट लगा है. नागरिकों के हाथों से बने यह अनोखी कला अब इन लाल डब्बों की शोभा बढ़ाते हैं. ऐतिहासिक घटनाओं या त्योहारों की याद अक्सर उन्हें लगाया जाता है.
लोकप्रिय थे लेकिन अब इतिहास का हिस्सा
कई तरह के स्टिकर और अतरंगी ग्रैफिटी से अक्सर ढकी रहने वाली डेनमार्क की डाक पेटियां भी अपने लाल रंग के लिए जानी जाती थी. लेकिन यह दौर 2025 में ही खत्म हो गया. डेनिश डाक सेवा ने सार्वजनिक डाक वितरण बंद कर दिया और सभी लाल डाक पेटियां हटा दी और ज्यादातर डाक पेटियां ऑनलाइन निजी लोगों को बेच दी गई.