ईरानी मिसाइलों से सुरक्षित है यूरोप: जर्मन रक्षा मंत्री
प्रकाशित २७ मार्च २०२६आखिरी अपडेट २७ मार्च २०२६
आपके लिए अहम जानकारी
- 35 साल के बालेंद्र शाह बने नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री
- जर्मनी के रक्षा मंत्री ने कहा, नाटो के कारण ईरानी मिसाइलों से सुरक्षित है यूरोप
- जर्मन ऑटो कंपनी 'फोक्सवागन' कर रही है डिफेंस सेक्टर में घुसने की तैयारी
- फ्रांस ने यूस से कहा, जी20 की तैयारियों से द. अफ्रीका को अलग करना मंजूर नहीं: रॉयटर्स
- यूएस-इस्राएल के हमलों में 120 म्यूजियमों, ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान: ईरान
- यूक्रेन-रूस के ड्रोन युद्ध की चपेट में आ रहे बाल्टिक देशों ने की नाटो से अपील
- ईरान के विदेश मंत्री का आरोप, अमेरिका ने स्कूल पर "सोच-समझकर" किया हमला
- चीन में बच्चों को ज्यादा होमवर्क देने पर रोक, परीक्षाएं भी बार-बार नहीं होंगी
- पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटने से तेल कंपनियों का फायदा
- डॉलर के मुकाबले रुपया 94 के पार, सालभर में 10 फीसदी कीमत गिरी
- चक्रवात की चपेट में आए ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े गैस प्लांट, एलएनजी उत्पादन पर असर
- भारतीय फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों को कोच्चि स्टेडियम में घुसने से रोका गया
- होरमुज खुलवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय फोर्स में शामिल होने को तैयार यूएई: रिपोर्ट
- पहले पदासीन अमेरिकी राष्ट्रपति बनेंगे ट्रंप जिनके दस्तखत डॉलर पर छपेंगे
- श्रीलंका में ईंधन की राशनिंग, चार लीटर पेट्रोल की "जमाखोरी" पर जेल भेजा
मुश्किलों में घिरी फोक्सवागन कर रही है डिफेंस सेक्टर में घुसने की तैयारी
जर्मन ऑटो इंडस्ट्री की शान मानी जाने वाली फोक्सवागन आर्थिक संकट से निकलने की राह खोज रही है. कंपनी अब उत्तरी जर्मनी के अपने एक प्लांट में कार की जगह सैन्य परिवहन साधनों के उत्पादन की योजना बना रही है. ग्रुप के सीईओ ऑलिवर ब्लूम ने फ्रैंकफर्ट में एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि इसके लिए फोक्सवागन कई डिफेंस कंपनियों के संपर्क में है.
क्या भारत फोल्क्सवागन को 11,600 करोड़ टैक्स नोटिस पर राहत देगा
फोक्सवागन यूरोप की सबसे बड़ी ऑटो निर्माता कंपनी है. इलेक्ट्रिक कारों का बढ़ता चलन, चीनी कंपनियों से मिल रही तगड़ी प्रतियोगिता और प्रतिद्वंद्विता में पिछड़ने के कारण कंपनी की राह मुश्किल हो गई है. वह साल 2030 तक 50,000 छंटनियों की तैयारी कर रही है. बचत की कोशिशों के क्रम में, ओसनाब्रुक शहर में कारों का उत्पादन बंद होने जा रहा है. कंपनी इसे दूसरे तरीकों से इस्तेमाल करने के विकल्प खोज रही है. सीईओ ब्लूम ने डिफेंस कंपनियों के साथ संपर्क का जिक्र करते हुए कहा, "यह ओसनाब्रुक के लिए भी एक समाधान हो सकता है."
जर्मनी: क्या फोक्सवागन के संकट से उबर पाएगा वोल्फ्सबुर्ग शहर
इसी हफ्ते 'फाइनैंशियल टाइम्स' ने एक खबर में बताया कि फोक्सवागन, इस्राएल की रक्षा तकनीक कंपनी 'रफाएल अडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स' के साथ बातचीत कर रही है. मकसद है ओसनाब्रुक प्लांट में कार की जगह आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम के पुर्जे, भारी ट्रक और बिजली के जनरेटर बनाना. ओसनाब्रुक प्लांट में फिलहाल करीब 2,300 लोग काम करते हैं. साल 2024 में श्रमिक संगठनों के साथ बनी सहमति में धीरे-धीरे इस प्लांट को बंद करना भी शामिल था.
क्या जर्मन कार नीति की विफलता है फोक्सवागन संकट?
अपने उत्पादन में विविधता लाने, खासतौर पर रक्षा क्षेत्र में विस्तार से फोक्सवागन को फायदा हो सकता है. यूरोप में हथियार निर्माण का सेक्टर तेजी पर है. इसमें घुसने पर कंपनी को कार बाजार के नुकसान की भरपाई का मौका मिल सकता है. पिछले साल फोक्सवागन का मुनाफा एक दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. हालांकि, ब्लूम ने इस बात पर जोर दिया कि डिफेंस सेक्टर में कंपनी मिलिट्री टांसपोर्ट बनाने पर ध्यान देगी, क्योंकि यह उसकी मुख्य योग्यता है.
चीन की ईवी कंपनी बीवाईडी का सालाना मुनाफा 19 फीसदी घटा
चीन की इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाने वाली कंपनी 'बीवाईडी' ने 27 मार्च को बताया कि बीते साल उसका सालाना शुद्ध लाभ, 2024 की तुलना में 19 प्रतिशत कम हो गया है. पिछले साल बीवाईडी ने 32.6 अरब युआन का मुनाफा कमाया. इससे पहले साल 2024 में कंपनी का मुनाफा 40.3 अरब युआन था. दूसरी तरफ, 2025 में में कंपनी का राजस्व 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 804 अरब युआन पर पहुंच गया.
बीवाईडी का अंग्रेजी में पूरा नाम ‘बिल्ड यॉर ड्रीम्स’ है. हालिया सालों में यह कंपनी चीन के ईवी बाजार की सबसे बड़ी खिलाड़ी बनकर उभरी है. चीन का ईवी मार्केट दुनिया में सबसे बड़ा है और वहां घरेलू स्तर पर कंपनियों के बीच गलाकाट प्रतिस्पर्धा चल रही है. इसके अलावा, घरेलू खपत में भी कमी आई है. ऐसे में बीवाईडी समेत कई बड़ी चीनी कंपनियां अब अपना रुख विदेशी बाजारों की ओर कर रही हैं.
बीवाईडी, राजस्व के मामले में अमेरिका की ईवी कंपनी टेस्ला को पहले ही मात दे चुकी है. कंपनी का कहना है कि अब उसकी गाड़ियां दुनियाभर के 119 देशों में चलाई जा रही हैं, जिनमें भारत और यूरोपीय देश भी शामिल हैं. साल 2025 में चीनी गाड़ियों के निर्यात में 21 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. उसकी एक बड़ी वजह बीवाईडी जैसी कंपनियों की इलेक्ट्रिक गाड़ियां ही थीं.
पीएम मोदी की मिमिक्री करने वाले अध्यापक के निलंबन पर रोक
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक के निलंबन पर रोक लगा दी है. शिक्षक पर आरोप था कि इन्होंने एक वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री करते हुए, एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी पर व्यंग्य कसा. बीजेपी के स्थानीय विधायक प्रीतम लोधी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, जिसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने उन्हें निलंबित कर दिया था.
कानूनी खबरों की वेबसाइट ‘बार एंड बेंच’ के मुताबिक, हाईकोर्ट ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी उन सरकारी निर्देशों पर विचार करने में विफल रहे, जिनके अनुसार किसी सरकारी कर्मचारी को तभी निलंबित किया जा सकता है, जब उनपर कोई बड़ा दंड या जुर्माना लगाए जाने की संभावना हो. कोर्ट ने यह भी कहा कि निलंबन का आदेश जल्दबाजी में और स्थानीय विधायक के कहे अनुसार जारी किया गया.
शिक्षक साकेत कुमार पुरोहित के खिलाफ की गई शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने समाज में अशांति फैलाने के इरादे से “आपत्तिजनक वीडियो” पोस्ट किया था. इस मामले में कोर्ट ने निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है और जिला शिक्षा अधिकारी से कहा है कि वे इस मामले पर दोबारा से विचार करें, और इस दौरान राज्य सरकार द्वारा साल 2005 में जारी किए गए निर्देशों को ध्यान में रखें.
फ्रांस ने अमेरिका से कहा, जी20 की तैयारियों से दक्षिण अफ्रीका को अलग करना मंजूर नहीं: रॉयटर्स
फ्रांस ने अमेरिका से कहा है कि आगामी जी20 शिखर सम्मेलन की तैयारियों में हिस्सा लेने से दक्षिण अफ्रीका को अलग रखना अस्वीकार्य है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक फ्रेंच राजनयिक सूत्र के हवाले से यह खबर दी है. इस साल जी20 की अध्यक्षता अमेरिका के पास है. समूह का अगला शिखर सम्मेलन दिसंबर 2026 में फ्लोरिडा के मियामी में होना है.
फ्रांस भी जी20 का सदस्य है. वह इस साल जी7 की भी अध्यक्षता कर रहा है. वही जी7 के जून सम्मेलन की मेजबानी करेगा. 26 मार्च को दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति के प्रवक्ता विंसेंट मागवेन्या ने एएफपी को बताया, "हमें बताया गया कि दक्षिण अफ्रीका को आमंत्रित करने पर अमेरिकियों ने जी7 के बहिष्कार की धमकी दी है." कुछ घंटों बाद राष्ट्रपति रामाफोसा ने कहा कि "उनकी जानकारी" के मुताबिक, "किसी भी देश से" कोई दबाव नहीं था. दक्षिण अफ्रीका जी7 का सदस्य नहीं है, लेकिन उसे पहले भी अध्यक्षता कर रहे देश की ओर से बुलाया जाता रहा है. 2025 में कनाडा ने भी उसे न्योता दिया था और राष्ट्रपति रामाफोसा ने हिस्सा भी लिया था.
अमेरिका की गैर-हाजिरी में पहली बार अफ्रीका में जी20 समिट
उधर, फ्रांस के विदेश मंत्री जॉं नोएल बारो ने कहा कि उनके देश पर किसी ने "कोई दबाव नहीं डाला." बल्कि "जी7 स्ट्रीमलाइन" करते हुए और "भू-आर्थिक विषयों पर मुख्य रूप से ध्यान देते हुए" फ्रांस ने केन्या को आमंत्रित किया. ताकि,मई में नैरोबी में हो रहे फ्रांस और अफ्रीकी देशों के सम्मेलन की तैयारी में पेरिस को मदद मिले. पॉलिटिको मैगजीन के मुताबिक, 26 मार्च को ही माक्रों के एक सलाहकार ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि राष्ट्रपति रामाफोसा और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की को जी7 सम्मेलन का न्योता नहीं भेजा गया था.
औपचारिक हैंडओवर के बिना खत्म हुआ जी20
ट्रंप प्रशासन और दक्षिण अफ्रीका के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं. पिछले साल जी20 की अध्यक्षता दक्षिण अफ्रीका के पास थी. वहां हुए शिखर सम्मेलन में अमेरिका शामिल नहीं हुआ था. प्रिटोरिया का कहना है कि फ्रेंच राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों जब शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे, तभी उन्होंने निजी तौर पर रामाफोसा को आमंत्रित किया था. एएफपी के मुताबिक, फिलहाल दक्षिण अफ्रीका को ग्रुप के कामकाज से अलग रखा गया है.
ईरान युद्ध के चलते उर्वरक आपूर्ति पर संकट, बढ़ सकते हैं खाने-पीने के दाम
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का प्रभाव दुनियाभर के किसानों पर पड़ा है. अमेरिका और इस्राएल के हमलों के बाद, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर, जिससे उर्वरकों की वैश्विक आपूर्ति में कमी दर्ज की जा रही है. इसके अलावा, युद्ध के कारण एलपीजी की आपूर्ति घटी है और कीमतें भी बढ़ी हैं. उर्वरक बनाने के लिए बड़े पैमाने पर एलपीजी का इस्तेमाल किया जाता है.
फर्टिलाइजर बनाने के लिए मुख्य तौर पर नाइट्रोजन और फॉस्फेट का इस्तेमाल होता है. होरमुज स्ट्रेट बंद होने के चलते इनकी सप्लाई संकट में है. कमोडिटी कंसल्टेंसी फर्म 'सीआरयू ग्रुप' के क्रिस लॉसन के मुताबिक, इस संघर्ष के कारण 30 फीसदी वैश्विक यूरिया व्यापार प्रभावित हुआ है. फॉस्फेट की सप्लाई भी दबाव में है.
विशेषज्ञों का कहना है कि फर्टिलाइजर की कमी के चलते, विकासशील देशों में किसानों की आजीविका के लिए खतरा पैदा हो गया है. कम उर्वरक का इस्तेमाल करने पर पैदावार कम हो सकती है, इससे दुनियाभर में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं. न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, अमेरिका और यूरोप में उर्वरक की कमी महसूस की जाने लगी है. वहीं, एशियाई देशों में आने वाले महीनों में इसकी कमी का एहसास होगा.
यह भी पढ़ें- भारत में यूरिया की मांग बढ़ी, घरेलू उत्पादन पीछे छूटा
ईरान ने कहा, अमेरिका-इस्राएल के हमलों में 120 म्यूजियमों, ऐतिहासिक इमारतों को नुकसान
ईरान ने कहा है कि अमेरिका और इस्राएल के हमलों में सांस्कृतिक या ऐतिहासिक महत्व की कम-से-कम 120 इमारतों को नुकसान पहुंचा है. समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, राजधानी तेहरान में सिटी काउंसिल की हैरिटेज कमेटी के प्रमुख अहमद अलावी ने यह आंकड़ा दिया है, "कई प्रांतों को मिलाकर कम-से-कम 120 म्यूजियमों, ऐतिहासिक इमारतों और सांस्कृतिक जगहों को सीधे निशाना बनाया गया और उन्हें गंभीर ढांचागत नुकसान पहुंचा है."
ईरान की सरकारी टीवी ने बताया कि अलावी ने यूनेस्को की वर्ल्ड हैरिटेज साइट गोलेस्तान पैलेस, तेहरान के मार्बल पैलेस और सादाबाद महल का भी नाम लिया. सादाबाद महल, तेहरान की सबसे ज्यादा घूमी जाने वाली जगहों में है. इस परिसर में ईरानी इतिहास को दिखाने वाले संग्रहालय हैं. सांस्कृतिक संस्थानों के अलावा इस परिसर के पास ही ईरानी राष्ट्रपति और तेहरान प्रांत के गवर्नर के आवास भी हैं.
ईरान का इतिहास सदियों पुराना है. यहां सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व की कई जगहें हैं, जो अब भी बड़े स्तर पर पर्यटन से बची हैं. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, यूनेस्को में सूचीबद्ध ईरान की 29 जगहों में से कम-से-कम चार को वर्तमान युद्ध से नुकसान पहुंचा है. इनमें गोलेस्तान पैलेस और प्रागैतिहासिक स्थल खुर्रमाबाद घाटी शामिल है. यूनेस्को ने अपने बयान में कहा था कि वह पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा के बीच सांस्कृतिक विरासत स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है.
भारत ने 2.38 लाख करोड़ रुपये के सैन्य खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी
भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद ने शुक्रवार, 27 मार्च को 2.38 लाख करोड़ रुपये के सैन्य खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी. रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि रूस के एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम, मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, धनुष गन सिस्टम और एरियल सर्विलांस सिस्टम आदि की खरीद को मंजूरी दी गई है.
मंत्रालय के मुताबिक, एस-400 सिस्टम दुश्मन के लंबी दूरी के हवाई हमलों का मुकाबला करेगा. मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट एन32 और आईएल76 विमानों के मौजूदा बेड़े की जगह लेंगे. धनुष गन सिस्टम तोपखाने की क्षमताओं को बढ़ाएगा, जिससे लंबी दूरी पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता में बढ़ोतरी होगी.
रक्षा मंत्रालय की प्रेस रिलीज के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में 6.73 लाख करोड़ रुपये के सैन्य खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है. फरवरी में ही भारतीय वायुसेना के लिए रफाएल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई थी. 12 फरवरी को हुई बैठक में 3.60 लाख करोड़ रुपए के सैन्य साजोसामान खरीदने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी.
जर्मनी के रक्षा मंत्री ने कहा, नाटो के कारण ईरानी मिसाइलों से सुरक्षित है यूरोप
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने उन आशंकाओं को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा है यूरोप भी ईरानी मिसाइलों की चपेट में आ सकता है. उन्होंने कहा कि नाटो के साथ यूरोपीय महाद्वीप सुरक्षित है. रक्षा मंत्री, हिंद-प्रशांत देशों की अपनी यात्रा के क्रम में ऑस्ट्रेलिया पहुंचे हैं. यहां ब्रिसबेन शहर के नजदीक बैरकों का दौरा करते हुए उन्होंने कहा, "यूरोप सुरक्षित है, खासकर इसलिए कि एयर डिफेंस में जर्मनी केवल अपनी सुरक्षा नहीं कर रहा है, बल्कि इसका संदर्भ नाटो एयर डिफेंस फोर्सेज से है."
जर्मनी में सैन्यीकरण की बहस के बीच बर्लिन की एक फैक्टरी सुर्खियों में
पिस्टोरियस ने कहा कि ईरानी बैलिस्टिक हथियारों की रेंज पहले से ही मालूम थी. उन्होंने कहा, "बेशक, सैद्धांतिक रूप से ये मिसाइलें यूरोप पहुंच सकती हैं. लेकिन हम यह जानते हैं, ईमानदारी से कहूं तो पहले से जानते हैं. सवाल है कि किस वॉरहेड के साथ और कितने सटीक तरीके से. यही वजह है कि हम नाटो की साझा रक्षा क्षमताओं में भरोसा करते हैं."
पिस्टोरियस ने इस्राएल से खरीदे गए एरो3 एयर डिफेंस सिस्टम का जिक्र करते हुए कहा कि यह जल्द सक्रिय हो जाएगा. अमेरिका की हरी झंडी के बाद साल 2023 में एरो3 की खरीद के लिए जर्मनी और इस्राएल के बीच करार हुआ था. यह सिस्टम 100 किलोमीटर से भी ज्यादा की ऊंचाई पर मिसाइलों को नष्ट करने में सक्षम है. जर्मन रक्षा मंत्री ने यह भी ध्यान दिलाया कि जल्द ही, अमेरिकी पैट्रिअट सिस्टम के लिए गाइडेड मिसाइलें भी जर्मनी में बनने लगेंगी.
ईरान के विदेश मंत्री का आरोप, अमेरिका ने स्कूल पर "सोच-समझकर" किया हमला
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने आरोप लगाया है कि पश्चिम एशिया में हालिया युद्ध छिड़ने के पहले दिन यानी 28 फरवरी को ईरानी स्कूल पर किया गया अमेरिका का हमला "कैलकुलेटेड" था. यानी, सोच-विचारकर किया गया था. 27 मार्च को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को भेजे गए अपने वीडियो संदेश में अरागची ने दक्षिण ईरान के मिनाब शहर में प्राथमिक स्कूल पर किए गए हमले की निंदा की. उन्होंने कहा कि इस घटना में 175 से ज्यादा छात्राएं और शिक्षक मारे गए.
ईरान और इस्राएल-अमेरिका युद्ध पर कहां खड़े हैं ब्रिक्स देश
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी सेना की एक शुरुआती जांच के हवाले से बताया कि टारगेट चुनने में हुई भूल के कारण एक यूएस टॉमहॉक मिसाइल ने स्कूल को निशाना बनाया. खबर के मुताबिक, अमेरिकी सेना नजदीक के एक ईरानी बेस पर बमबारी कर रही थी. स्कूल की इमारत पहले उसी बेस का हिस्सा थी और पुराने डाटा का इस्तेमाल करके टार्गेट के कॉर्डिनेट सेट किए गए. राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पहले तो संकेत दिया कि इसमें खुद ईरान जिम्मेदार हो सकता है.
ईरान यह मुद्दा मानवाधिकार परिषद ले गया.यहां बुलाई गई एक बहस में अरागची ने कहा, "ऐसे समय में जब अमेरिकी और इस्राएली हमलावर, जिनके खुद के दावों के मुताबिक, उनके पास सबसे आधुनिक तकनीकें हैं, सबसे सटीक सेना और डाटा सिस्टम हैं, यह कोई नहीं मान सकता कि स्कूल पर हमला जान-बूझकर और इरादतन के अलावा कुछ और हो सकता है." उन्होंने इसे "एक युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध" बताया. यह मांग भी की कि इस घटना की सभी के द्वारा स्पष्ट निंदा की जानी चाहिए और दोषियों की स्पष्ट जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
मानवाधिकार परिषद के प्रमुख फोल्कर टुर्क ने अमेरिका से अपील की है कि वह इस मामले में अपनी जांच जल्द पूरी करे. उन्होंने घटना को भयावह बताते हुए कहा, "वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि हमले की जांच की जा रही है. मैं अपील करता हूं कि वह प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी की जाए और निष्कर्ष को सार्वजनिक किया जाए. जो भयानक नुकसान हुआ है, उसके लिए न्याय होना ही चाहिए."
चीन में बच्चों को ज्यादा होमवर्क देने पर रोक, परीक्षाएं भी बार-बार नहीं होंगी
चीन के शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देते हुए एक नए फ्रेमवर्क की घोषणा की है. इसके तहत अब स्कूलों में बच्चों को अतिरिक्त होमवर्क नहीं दिया जा सकेगा. ना ही बार-बार परीक्षाएं नहीं ली जाएंगी और ना ही उनपर पढ़ाई का ज्यादा बोझ डाला जाएगा. इसके अलावा, उनके ब्रेक टाइम में दखलंदाजी नहीं की जा सकेगी. यानी, ब्रेक के दौरान उन्हें कक्षाओं से बाहर निकलने से रोका नहीं जाएगा.
चीन सरकार बच्चों के ऊपर अकादमिक दबाव कम करना चाहती है और उनके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाना चाहती है. दरअसल, दुनिया के कई और देशों की तरह चीन में भी बच्चों से अपेक्षा की जाती है कि वे खूब पढ़ाई करें और अच्छे नंबर लाएं. विशेषज्ञों के मुताबिक, वहां स्कूलों में काफी ज्यादा होमवर्क देना आम बात है. इससे बच्चों की नींद पर असर पड़ता है, डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी परेशानियां जन्म लेती हैं.
यह भी पढ़ें- चीनी यूनिवर्सिटियों में मिलेगी प्यार की पढ़ाई, घटती आबादी से निपटने की तैयारी
चीन ने पिछले साल नवंबर में भी स्कूलों को निर्देश दिया था कि वे बच्चों के होमवर्क को सख्ती से नियंत्रित करें. साथ ही, और प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों के बच्चों को हर दिन खेलने-कूदने के लिए कम-से-कम दो घंटे दें. हाल ही में चीन ने कहा है कि स्कूलों में शरद और वसंत ऋतु की छुट्टियां भी शुरू की जाएंगी, जो सर्दी-गर्मी की पारंपरिक छुट्टियों से अलग होंगी.
यूक्रेन-रूस के ड्रोन युद्ध की चपेट में आ रहे बाल्टिक देशों ने की नाटो से अपील
एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया ने नाटो से हवाई सुरक्षा मजबूत करने की अपील की है. तीनों देशों के रक्षा मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि ड्रोनों से प्रतिरक्षा समेत, नाटो के एयर डिफेंस को मजबूत करने के उपाय तेज किए जाने चाहिए. फ्रेंच अखबार 'ले मोंद' के मुताबिक, बाल्टिक देशों को यूक्रेन युद्ध की चपेट में आकर 'कोलेट्रल डैमेज' बनने का डर है. उन्हें आशंका है कि युद्ध छलककर उनके भूभाग में दाखिल हो सकता है.
इसी हफ्ते तीनों बाल्टिक देशों के हवाई क्षेत्र में ड्रोन घुस आए और क्रैश हो गए. समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार, उत्तर-पश्चिम रूस के ठिकानों को निशाना बनाते हुए यूक्रेन ने ये ड्रोन छोड़े थे. इनके कारण किसी के घायल होने या कोई खास नुकसान होने की खबर नहीं है. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से कई बार ड्रोन रास्ता भटककर बाल्टिक देशों के हवाई क्षेत्र में घुस चुके हैं.
तीनों देशों के रक्षा मंत्रियों- एस्टोनिया के हन्नो पेवकूर, लातविया के आंद्रीस स्प्रूड्स और लिथुआनिया के रॉबेरतस कोनस ने ताजा घटना के संदर्भ में कहा, "ये घटनाएं रेखांकित करती हैं कि अपनी तैयारियों और रक्षा क्षमताओं में निवेश बढ़ाने की तत्काल जरूरत है." तीनों देशों ने यूरोपीय संघ (ईयू) के रक्षा खर्च में लगातार इजाफा करने की भी अपील की.
परमाणु ढाल तैयार करने पर यूरोप में तेज हुई बहस
बाल्टिक देश 2004 से अपने लड़ाकू विमान नहीं उड़ाते हैं. नाटो, अपने सहयोगी देशों के एयरक्राफ्टों और सैन्यकर्मियों की तैनाती के जरिये बाल्टिक हवाई क्षेत्र की रक्षा करता है. नाटो ने सितंबर 2025 में 'ऑपरेशन ईस्टर्न सेंट्री' शुरू किया था. रूसी लड़ाकू विमानों और कामिकेज ड्रोनों द्वारा हवाई क्षेत्र के उल्लंघन के मद्देनजर इस ऑपरेशन का मकसद, इलाके में निगरानी और हवाई रक्षा की क्षमता बढ़ाना है.
नाटो एयरस्पेस: क्या बाल्टिक देशों के स्टार्टअप रूस के ड्रोन का मुकाबला कर सकते हैं?
बाल्टिक देशों की सीमा रूस और उसके सहयोगी बेलारूस से लगती है. लिथुआनिया की बेलारूस संग 679 किलोमीटर और रूस के साथ 274 किलोमीटर लंबी सीमा है. लातविया की पूरब की ओर रूस से 283 किलोमीटर और दक्षिणपूर्व में बेलारूस से 173 किलोमीटर लंबी सीमा है. एस्टोनिया-रूस सीमा 333.7 किलोमीटर है. हालांकि, उसकी बेलारूस के साथ सीमा नहीं है.
चक्रवात की चपेट में आए ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े गैस प्लांट, वैश्विक आपूर्ति पर बढ़ सकता है दबाव
ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े राज्य 'वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया' में शक्तिशाली चक्रवात 'नरेल' के कारण देश के दो सबसे बड़े एलएनजी प्लांटों में उत्पादन प्रभावित हुआ है. ईरान युद्ध के कारण पहले ही गैस की वैश्विक आपूर्ति दबाव में है. अब ऑस्ट्रेलिया में शेवरॉन और वुडसाइड कंपनियों के प्लांटों में उत्पादन प्रभावित होने से संकट गहराने की आशंका है. युद्ध शुरू होने के बाद कतर ने उत्पादन रोक दिया था, जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया एलएनजी का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया.
ईरानी तेल की खरीद पर ट्रंप प्रशासन ने दी 30 दिनों की ढील
शेवरॉन ने बताया कि वह गोगन और वीटस्टन एलएनजी संयंत्रों में उत्पादन वापस चालू करने पर काम कर रहा है. गोगन, ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यात संयंत्र है. यहां सालाना 1.56 करोड़ मीट्रिक टन एलएनजी का उत्पादन होता है. वीटस्टन की वार्षिक उत्पादन क्षमता 89 लाख मीट्रिक टन है. वुडसाइड ने भी बताया कि चक्रवात के कारण उसके कारथा गैस प्लांट में उत्पादन प्रभावित हुआ है. यह प्लांट, ऑस्ट्रेलिया की सबसे पुरानी एलएनजी परियोजना 'नॉर्थ वेस्ट शेल्फ प्रॉजेक्ट' का प्रसंस्करण संयंत्र है. यहां सालाना 1.43 करोड़ मीट्रिक टन का उत्पादन होता है.
ईरान युद्ध से पूरी दुनिया में पैदा हो सकता है खाद्य संकट
एमएसटी मार्की के विश्लेषक सॉल कावोनिक ने रॉयटर्स से बातचीत में अनुमान जताया कि चक्रवात के कारण ऑस्ट्रेलियाई एलएनजी सप्लाई में सालाना तीन करोड़ टन से ज्यादा का व्यवधान आ सकता है. उन्होंने बताया कि अगर पश्चिम एशिया से मिले झटके के साथ जोड़कर देखें, तो फिलहाल वैश्विक एलएनजी आपूर्ति का 25 फीसदी से अधिक हिस्सा प्रभावित है, "यह एशिया और यूरोप में गैस बाजार की तंगी को और गहरा करेगा. खासतौर पर तब, अगर ऑस्ट्रेलियाई उत्पादन क्षमता को फिर से सामान्य बनाने में ज्यादा दिन लगें."
क्या ईरान युद्ध तेल की कीमतों को ले जाएगा 100 डॉलर प्रति बैरल के पार?
शेवरॉन ने बताया कि जैसे ही हालात सुरक्षित होंगे, वह प्रभावित संयंत्रों में उत्पादन फिर शुरू कर देगा. वुडसाइड ने भी कहा है कि जैसे ही वह अपने कर्मचारियों को प्रभावित संयंत्र में भेज पाएगा, वैसे ही नॉर्थ वेस्ट शेल्फ प्रॉजेक्ट में उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा. कंपनी ने यह भी जोड़ा कि अगर चक्रवात के कारण संयंत्र को कोई नुकसान पहुंचा होगा, तो वह मार्केट को जानकारी देगा.
भारतीय फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों को कोच्चि के स्टेडियम में घुसने से रोका गया
भारतीय फुटबॉल टीम के कोच खालिद जमील और कुछ खिलाड़ियों को कोच्चि के 'जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम' में घुसने से रोक दिया गया, जिसके बाद उन्हें अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द करनी पड़ी. यह घटना गुरुवार, 26 मार्च को हुई. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के हवाले से बताया है कि टीम को एंट्री इसलिए नहीं दी गई, क्योंकि 'केरल स्टेट सॉकर एसोसिएशन' ने शहर प्रशासन को सिक्यॉरिटी डिपॉजिट नहीं दिया था.
भारतीय टीम को इसी स्टेडियम में 31 मार्च को हांगकांग के खिलाफ मैच भी खेलना है. ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (एआईएफएफ) ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में बताया कि घटना की वजह से मैच के आयोजन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. फेडरेशन ने कहा, “हमें पूरा भरोसा है कि केरल फुटबॉल एसोसिएशन, स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर सभी औपचारिकताओं को पूरा कर लेगा.”
यह रिपोर्ट भी पढ़ें- भारत में क्रिकेटरों की तरह फुटबॉलर क्यों नहीं पैदा होते
फेडरेशन को इससे पहले भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था, जब एशिया कप में हिस्सा लेने ऑस्ट्रेलिया गईं महिला खिलाड़ियों को छोटे साइज की किट दे दी गई थी. इसके बाद टीम स्टाफ को स्थानीय जर्सियां खरीदनी पड़ी थीं. इस टूर्नामेंट में तीन मैच हारने के बाद भारतीय टीम ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई थी. एक मुकाबले में जापान ने भारत को 11-0 के बड़े अंतर से हराया था.
डॉलर के मुकाबले रुपया 94 के पार, सालभर में 10 फीसदी कीमत गिरी
भारत का रुपया शुक्रवार, 27 मार्च को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. यह डॉलर के मुकाबले 94.65 के स्तर तक गिर गया. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से यह चार फीसदी गिर चुका है. वहीं, 31 मार्च 2025 से अब तक इसमें डॉलर के मुकाबले 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की जा चुकी है.
27 मार्च को भारतीय शेयर बाजार की बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 और सेंसेक्स में भी गिरावट दर्ज की जा रही है. दोपहर करीब एक बजे सेंसेक्स 1,220 पॉइंट नीचे और निफ्टी 50 करीब 340 पॉइंट नीचे कारोबार कर रहा था. बीते दिन, यानी 25 मार्च को शेयर बाजार तेजी के साथ बंद हुआ था.
इससे पहले 26 मार्च को अमेरिका के शेयर बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद ट्रंप ने एलान किया कि वह ईरान को होरमुज स्ट्रेट खोलने के लिए 6 अप्रैल तक का वक्त दे रहे हैं. ट्रंप ने चेताया कि ऐसा न होने पर उनकी सेना ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमला करेगी. मोहलत देने की शुरुआत ट्रंप ने 48 घंटे से की थी. फिर समयसीमा बढ़ाते हुए उन्होंने ईरान को पांच दिन की और मोहलत दी. हालांकि, ऐसी रिपोर्टें भी आ रही हैं कि ट्रंप पश्चिम एशिया में और अमेरिकी सैनिक भेजने पर विचार कर रहे हैं. इसके कारण निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है.
श्रीलंका में चार लीटर पेट्रोल की "जमाखोरी" पर एक शख्स को जेल
श्रीलंका में एक शख्स ने चार लीटर पेट्रोल की 'जमाखोरी' की और इसके लिए उसे तीन हफ्ते की जेल हुई है. ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए गंभीर ऊर्जा संकट के चलते श्रीलंका में ईंधन की कमी है. राशनिंग करते हुए लोगों को सीमित मात्रा में ईंधन दिया जा रहा है. मसलन, गाड़ी चलाने वालों को हर दूसरे दिन ईंधन मिलता है.
वेनेजुएला के तेल से क्यों दूर भागती हैं ऑयल कंपनियां
स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक, अपने पास चार लीटर तेल रखने पर जिस शख्स को जेल हुई उसने पहले कहा कि बगीचे की घास काटने वाली मशीन के लिए उसने ईंधन लिया. बाद में उसने जमाखोरी का आरोप स्वीकार लिया. जज ने फैसला सुनाया कि ऐसे समय में जब ऊर्जा संकट के कारण प्रशासन ईंधन की खपत सीमित कर रहा है, आरोपित ने चार लीटर पेट्रोल जमा किया और कालाबाजारी की कोशिश की. जेल के अलावा उसपर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है.
प्रशासन ने कहा है कि देश के पास डीजल का जितना भंडार है, वह मई महीने के पहले पखवाड़े तक के लिए काफी है. पेट्रोल का रिजर्व इससे करीब एक हफ्ते ज्यादा चल सकता है. श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके के दफ्तर ने बताया कि वैकल्पिक तेल आपूर्ति के लिए रूस से बात चल रही है. इस संबंध में रूस के उप ऊर्जा मंत्री रोमान मारशाविन से चर्चा हुई, जो श्रीलंका पहुंचे हुए हैं. राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया कि रूसी मंत्री ने मदद के लिए तैयार होने का आश्वासन दिया है.