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इस्राएल ने ईरान के अली लारिजानी को मारने का दावा किया

निखिल रंजन एपी, एएफपी | आदर्श शर्मा एएनआई, रॉयटर्स
प्रकाशित १७ मार्च २०२६आखिरी अपडेट १७ मार्च २०२६

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काला चश्मा लगाए हुए अली लारिजानी की तस्वीर
अली लारिजानी ईरान के सबसे मशहूर राजनीतिक परिवार से आते हैं. वे संसद के स्पीकर और वरिष्ठ नीति सलाहकार रह चुके हैंतस्वीर: Bilal Hussein/AP Photo/picture alliance
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होरमुज जलडमरुमध्य को खुलवाने में साथ नहीं देगा फ्रांस को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

होरमुज जलडमरुमध्य को खुलवाने में साथ नहीं देगा फ्रांस

फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों
फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा है कि उनका देश होरमुज जलडमरुमध्य को खुलवाने के अभियान में शामिल नहीं होगातस्वीर: Gonzalo Fuentes/REUTERS

फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने कहा है कि उनका देश होरमुज जलडमरुमध्य को खुलवाने के अभियान में कभी शामिल नहीं होगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि वहां युद्ध खत्म होने के बाद जहाजों की आवाजाही की आजादी सुनिश्चित कराने के लिए एक गठबंधन बनाने पर काम किया जा रहा है. 

फ्रेंच राष्ट्रपति का कहना है, "हम युद्ध में कोई पक्ष नहीं हैं, इसलिए फ्रांस मौजूदा संदर्भ में होरमुज जलडमरुमध्य को खुलवाने के किसी अभियान में शामिल नहीं होगा." मध्यपूर्व में चल रहे युद्ध पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक की शुरुआत में ही राष्ट्रपति ने यह बात कही. माक्रों का कहना है कि शांति कायम होने के बाद वह होरमुज जलडमरुमध्य में जहाजों की रक्षा के लिए तैयार हैं. 

कितने अलग थलग पड़ चुके हैं ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने होरमुज जलडमरुमध्य को सैन्य तरीके से खुलवाने के लिए नाटो समेत कई देशों से मदद मांगी है. हालांकि अब तक जर्मनी, जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत ज्यादातर देश इसके लिए मना कर चुके हैं. अब इसमें फ्रांस भी शामिल हो गया है. नाटो ने भी इसमें शामिल होने से इनकार किया है. 

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ईरान युद्ध के मसले पर अमेरिका के टॉप काउंटर टेररिज्म अधिकारी का इस्तीफा को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

ईरान युद्ध के मसले पर अमेरिका के टॉप काउंटर टेररिज्म अधिकारी का इस्तीफा

अमेरिका के नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के निदेशक जो केंट
अमेरिका के नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के निदेशक ने ईरान युद्ध के चलते इस्तीफा दे दिया है तस्वीर: Jenny Kane/AP Photo/picture alliance

अमेरिका के नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के प्रमुख जो केंट ने मंगलवार को ईरान युद्ध के चलते इस्तीफा दे दिया है. वे ट्रंप प्रशासन के पहले और सबसे वरिष्ठ अधिकारी हैं जिन्होंने ईरान युद्ध की वजह से इस्तीफा दिया है. उनका कहना है कि ईरान से अमेरिका को कोई खतरा नहीं है. 

जो केंट ने डॉनल्ड ट्रंप को लिखा एक पत्र एक्स पर पोस्ट किया है. इसमें उन्होंने लिखा है, "मैं अपने सही अंतःकरण से ईरान में चल रहे युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता. ईरान हमारे देश के लिए कोई खतरा नहीं है और यह साफ है कि हम ने यह युद्ध इस्राएल और उसकी मजबूत लॉबी के दबाव में शुरू किया है."

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा कानून के तहत अमेरिका को युद्ध शुरू करने के लिए जरूरी है कि आसन्न खतरा हो. अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस ने इस खबर पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. नेशनल इंटेलिजेंस के महानिदेशालय ने भी इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. 

केंट नेशनल इंटेलिजेंस की निदेशक तुलसी गाबार्ड के करीबी थे. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद तुलसी गाबार्ड ने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है. वह सार्वजनिक रूप से सिर्फ एक बार ही नजर आईं हैं जब इस महीने अमेरिकी सैनिकों के शव लाए गए. 

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ईरान में स्कूल पर हमले का सच पता लगाएगा संयुक्त राष्ट्र को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

ईरान में स्कूल पर हमले का सच पता लगाएगा संयुक्त राष्ट्र

मिसाइल हमले में ध्वस्त मिनाब का गर्ल्स स्कूल
दो मिसाइलों ने मिनाब के स्कूल को निशाना बनाया तस्वीर: Vantor/REUTERS

ईरान में लड़कियों के स्कूल पर मिसाइल हमले की जांच संयुक्त राष्ट्र ने शुरू कर दी है. जांच कमेटी के एक सदस्य ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को इसकी जानकारी दी है. ईरान के मिनाब शहर के शारजारेह तय्येबेह स्कूल पर दो मिसाइलों से एक के बाद एक हमला हुआ. ईरानी अधिकारियों ने सोमवार को जिनेवा में बताया कि इस हमले में 168 छात्राओं की मौत हुई. 

इससे पहले कई मीडिया रिपोर्टों में इस हमले के लिए अमेरिका को जिम्मेदार बताया गया था. हालांकि, इस मामले में विस्तृत जांच अब तक नहीं हुई है. अमेरिकी रक्षा विभाग ने भी इस हमले की जांच का दायरा बढ़ा दिया है. संयुक्त राष्ट्र के ईरान पर फैक्ट फाइंडिंग मिशन के सदस्य माक्स दू प्लेसिस ने जिनेवा में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा, "हम अभी जांच के शुरुआती चरण में हैं." उन्होंने ईरान की बताई मृतकों की संख्या को पुष्ट करने वाली भरोसेमंद रिपोर्टों का भी जिक्र किया. 

प्लेसिस का कहना है, "इस तरह की घटना के संदर्भ में हमारे लिए यह साफ है कि बेकसूर लोगों की मौत को देखते हुए इस जांच की सख्त जरूरत है, जिससे कि एक स्वतंत्र नतीजा आ सके." 

अगर इस हमले में अमेरिकी गलती की पुष्टि होती है तो यह मध्यपूर्व में कई दशकों में सैन्य हमले में बेकसूर लोगों के मारे जाने की सबसे भयावह घटना होगी. 

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काबुल में अस्पताल पर हुए घातक हमले की स्वतंत्र जांच हो: संयुक्त राष्ट्र को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

काबुल में अस्पताल पर हुए घातक हमले की स्वतंत्र जांच हो: संयुक्त राष्ट्र

कथित हमले वाली जगह का मुआइना करते तालिबान के सुरक्षाकर्मी
तालिबान का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने सोमवार रात को काबुल में स्थित एक नशामुक्ति अस्पताल पर हवाई हमले किए, जिससे करीब 400 लोगों की मौत हो गई और 250 लोग घायल हो गएतस्वीर: Wakil Kohsar/AFP/Getty Images

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने मांग की है कि काबुल में नशामुक्ति अस्पताल पर हुए हमले की स्वतंत्र जांच की जाए और उसके नतीजे सार्वजनिक किए जाएं. यूएन के मानवाधिकार प्रवक्ता थमीन अल-खीतान ने जिनेवा में रिपोर्टरों से कहा कि काबुल में नशामुक्ति केंद्र में हुए दुखद धमाके की “त्वरित, स्वतंत्र और पारदर्शी” तरीके से जांच की जानी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को "अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए."

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना ने सोमवार रात को काबुल में स्थित एक नशामुक्ति अस्पताल पर हवाई हमले किए, जिससे करीब 400 लोगों की मौत हो गई और 250 लोग घायल हो गए. पाकिस्तान ने इन आरोपों को झूठा और भ्रामक बताते हुए इससे इनकार किया है. पाकिस्तान का कहना है कि उसने सैन्य ठिकानों और आतंकवादियों की मदद करने वाले बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया था.

इस बीच यूरोपीय संघ ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान दोनों से संयम बरतने की अपील की है. ईयू ने अपील की है कि इस संघर्ष को जल्दी से जल्दी खत्म किया जाना चाहिए.

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सोनम वांगचुक बोले, सरकार ने की "रचनात्मक और सार्थक संवाद" की पेशकश को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

सोनम वांगचुक बोले, सरकार ने की "रचनात्मक और सार्थक संवाद" की पेशकश

सोनम वांगचुक की तस्वीर
सोनम वांगचुक ने कहा कि बातचीत में दोनों पक्षों को लचीला होना चाहिए और किसी एक पक्ष का नुकसान नहीं होना चाहिएतस्वीर: Debarchan Chatterjee/NurPhoto/picture alliance

हाल ही में जेल से बाहर आए लद्दाख केपर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा है कि सरकार ने उनके सामने "रचनात्मक और सार्थक संवाद" करने का प्रस्ताव रखा है. वांगचुक ने कहा कि हम तो शुरुआत से यही चाहते थे. उन्होंने रिपोर्टरों से यह भी कहा कि बातचीत में दोनों पक्षों को लचीला होना चाहिए और किसी एक पक्ष का नुकसान नहीं होना चाहिए. 

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को भारतीय संविधान की छठवीं अनुसूची में शामिल करवाने की मांग लंबे समय से उठ रही है. पिछले साल सितंबर में इसी मांग के लिए हो रहे प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसके चलते चार लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, एनएसए के तहत गिरफ्तार कर लिया था. 

शनिवार, 17 मार्च को भारत के गृह मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने "उचित विचार-विमर्श" के बाद वांगचुक की हिरासत को "तत्काल प्रभाव से" खत्म करने का फैसला लिया है. इसके बाद करीब छह महीने जेल में बंद रहे वांगचुक बाहर आए. अब उन्होंने संकेत दिया है कि भारत सरकार के साथ बातचीत नए सिरे से शुरू हो सकती है. 

लद्दाख साल 2019 तक जम्मू-कश्मीर का हिस्सा था. आर्टिकल 370 की समाप्ति के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया गया था. अब ये दोनों ही केंद्र शासित प्रदेश राज्य के दर्जे की मांग कर रहे हैं. पाकिस्तान और चीन की सीमा से सटे होने की वजह से ये दोनों ही प्रदेश, भारत के लिए महत्वपूर्ण और संवेदनशील हैं. 

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गाजा में इस्राएली हवाई हमले में 3 लोगों की मौत को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

गाजा में इस्राएली हवाई हमले में 3 लोगों की मौत

इस्राएल के हवाई हमले का शिकार बनी गाड़ी को देखते गाजा वासी
खान यूनिस में इस्राएल के हवाई हमले में तीन लोगों की मौत हुई है तस्वीर: Abdel Kareem Hana/AP Photo/picture alliance

मंगलवार को इस्राएल के हवाई हमले में गाजा पट्टी में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई. मरने वालों में एक बच्चा भी शामिल है. स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी है. ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्राएल की लड़ाई में गाजा पट्टी का संघर्षविराम काफी तनाव झेल रहा है. स्वास्थ्यकर्मियों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि पश्चिम के खान यूनिस में एक गाड़ी इस्राएली हमले का निशाना बनी. इसमें तीन लोगों की मौत हुई जबकि 12 अन्य लोग घायल हो गए. इस्राएल ने इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. 

इस्राएली सेना ईरान में और लेबनान में हिज्बुल्लाह के साथ युद्ध में गाजा पर भी हमले कर रही है. रविवार को गाजा में 12 लोगों को मार दिया गया, जिनमें 9 पुलिसकर्मी भी शामिल थे. इस्राएल का कहना है कि उसने एक हमास सेल को निशाना बनाया था. सेना ने हमलों का कारण हमास की तरफ से फायरिंग के खतरे को बताया है. बीते साल अक्टूबर में संघर्ष विराम के बाद अब तक इस्राएल के हमलों में 670 लोगों की जान गई है. ईरान पर अमेरिका और इस्राएल का हमला शुरू होने के बाद गाजा में 40 लोग इस्राएली हमलों का निशाना बने हैं.  

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जर्मन सरकार देश में एआई प्रोसेसिंग की क्षमता चार गुना बढ़ाएगी को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

जर्मन सरकार देश में एआई प्रोसेसिंग की क्षमता चार गुना बढ़ाएगी

प्रतीकात्मक तस्वीर
जर्मनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की प्रोसेसिंग की क्षमता को चार गुना बढ़ाएगातस्वीर: Serjunco/Westend61/IMAGO

जर्मन सरकार ने देश में डाटा सेंटरों की क्षमता को भारी पैमाने पर बढ़ाने का फैसला किया है. यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तकनीकी संप्रभुता के मामले में पीछे ना रह जाए, इसलिए इस काम की योजना बनी है. डिजिटल मंत्रालय के एक नीति पत्र में इसका जिक्र है. इसे बुधवार,18 मार्च को कैबिनेट में स्वीकार किए जाने की संभावना है. 

इसके तहत, डाटा सेंटर के प्रदर्शन को 2025 के मुकाबले 2030 तक कम से कम दोगुना किया जाएगा. इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमता को भी कम से कम चार गुना बढ़ाया जाएगा. डाटा इंटेंसिव एआई एप्लिकेशन, क्लाउड सर्विस और डिजिटलाइजेशन दुनिया भर में प्रोसेसिंग पावर को तेजी से बढ़ाने की मांग का कारण हैं.  

योजना के तहत बेकार हो चुकीं लिग्नाइट खदानों के बिजली स्टेशनों को डाटा सेंटर में बदला जाएगा क्योंकि वे पहले से ही ग्रिड से जुड़े हुए हैं. स्थानीय लोग इन्हें स्वीकार कर सकें इसलिए डाटा सेंटरों के बिजनेस टैक्स सीधे उसी स्थानीय निकाय को दिए जाएंगे जहां वे होंगे. आमतौर पर यह टैक्स कंपनी के मुख्यालयों से वसूला जाता है, जो अकसर कहीं और होते हैं. 

डाटा सेंटर भविष्य में पूरी तरह से अक्षय ऊर्जा से चलेंगे. सरकार यूरोपीय संघ के स्तर पर यह अभियान भी चलाने की कोशिश में है कि इन केंद्रों से जो अतिरिक्त उष्मा हासिल होगी वह स्थानीय हीटिंग नेटवर्क को मुफ्त में बिना किसी टैक्स के दी जाए. 

नीति पत्र में गैर यूरोपीय क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर मसलन एमेजॉन एडब्ल्यूएस, गूगल क्लाउड और माइक्रोसॉफ्ट अजूर पर निर्भरता घटाने की भी बात है. इनकी बजाय जर्मन और यूरोपीय कंपनियों को प्राथमिकता दी जाए. 
 

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भारत ने म्यांमार से लौटे छह विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

भारत ने म्यांमार से लौटे छह विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया

म्यांमार में उग्रवादी समूह बीपीएलए के नए सदस्यों की ट्रेनिंग की तस्वीर
इन नागरिकों पर आरोप है कि इन्होंने म्यांमार में ऐसे सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण दिया, जिनका भारत में मौजूद उग्रवादी समूहों से संबंध हैतस्वीर: REUTERS

भारत की जांच एजेंसियों ने सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जिनमें छह यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक है. इन पर आरोप है कि इन्होंने आधिकारिक परमिट के बिना भारत के संवेदनशील राज्य मिजोरम में प्रवेश किया और वहां से पड़ोसी देश म्यांमार चले गए. ऑल इंडिया रेडियो की खबर के मुताबिक, जांच एजेंसियों का कहना है कि इन नागरिकों ने म्यांमार में ऐसे सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण दिया, जिनका भारत में मौजूद उग्रवादी समूहों से संबंध है. 

म्यांमार से वापस भारत लौटने के बाद इन्हें हिरासत में लिया गया. न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, छह यूक्रेनी नागरिकों को दिल्ली और लखनऊ से, जबकि अमेरिकी नागरिक को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया. सोमवार, 16 मार्च को दिल्ली की एक अदालत ने इन्हें 11 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया. इंडियन एक्सप्रेस अखबार के मुताबिक, इन लोगों पर भारत के खिलाफ आतंकवादी कार्रवाइयों को अंजाम देने की साजिश रचने का आरोप है. इस अपराध के लिए उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है. 

भारत की म्यांमार के साथ करीब 1,600 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है, जिस पर अब बाड़ बनाने का काम भारत कर रहा है. यह सीमा सुदूर जंगलों और बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियों से होकर गुजरती है, जिससे यहां निगरानी रखना बेहद मुश्किल होता है. 

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साइबर हमलों का निशाना बनने के मामले में दूसरे नंबर पर भारत: मेटा रिपोर्ट को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

साइबर हमलों का निशाना बनने के मामले में दूसरे नंबर पर भारत: मेटा रिपोर्ट

साइबर हमले को दर्शाती एक प्रतीकात्मक तस्वीर, जिसमें एक व्यक्ति लैपटॉप पर कुछ टाइप कर रहा है और स्क्रीन से रंग-बिरंगी रोशनी निकल रही है
रिपोर्ट में बताया गया है कि साइबर हमलों में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और इसने एक उद्योग का रूप ले लिया हैतस्वीर: Westend61/IMAGO

मेटा की एक हालिया रिपोर्ट में सामने आया है कि आपराधिक स्कैम सिंडिकेट सबसे ज्यादा अमेरिका में अंग्रेजी बोलने वाले यूजर को निशाना बनाते हैं. इसके बाद भारतीय यूजर साइबर हमलों का सबसे ज्यादा निशाना बनते हैं. फिर चीन, ताइवान, हांगकांग और सिंगापुर में रह रहे और मैंडरिन बोलने वाले यूजर का नंबर आता है. 

रिपोर्ट में बताया गया है कि साइबर हमलों में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और इसने एक उद्योग का रूप ले लिया है. स्कैम सेंटरों में लोगों को साइबर धोखाधड़ी करने की ट्रेनिंग दी जाती है और फिर उनसे काम लिया जाता है. इसके अलावा, जरूरतमंद लोगों की जरूरत का फायदा उठाते हुए, उन्हें निशाना बनाया जाता है. जैसे- घर ढूंढ़ रहे एक व्यक्ति को प्रॉपर्टी एजेंट बनकर कॉल किया जाता है. 

मेटा ने अपनी इस रिपोर्ट में बताया है कि "कम जोखिम" वाले निवेशों पर ऊंचे रिटर्न का वादा करके लोगों को लुभाया जाता है. उन्हें ऑनलाइन जुआ या सट्टेबाजी के जरिए जल्दी पैसे कमाने का लालच दिया जाता है. इसके अलावा, रोमांस स्कैम भी होते हैं, जिनमें साइबर ठग पहले पीड़ित के साथ एक भावनात्मक रिश्ता बनाते हैं और कुछ समय बाद किसी जरूरत का हवाला देते हुए उनसे पैसे मांग लेते हैं. 

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जर्मनी में धुर दक्षिणपंथी चरमपंथी गुट के ठिकानों पर पुलिस की छापेमारी को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

जर्मनी में धुर दक्षिणपंथी चरमपंथी गुट के ठिकानों पर पुलिस की छापेमारी

प्रतीकात्मक तस्वीर
जर्मन पुलिस ने देश में कई जगहों पर धुर दक्षिणपंथी चरमपंथी गुट के लोगों से जुड़े ठिकानों पर छापे मारे हैं तस्वीर: Michael Bihlmayer/IMAGO

जर्मन पुलिस ने मंगलवार को देश भर में एक धुर दक्षिणपंथी चरमपंथी गुट के ठिकानों पर छापा मारा. माना जा रहा है कि यह गुट जर्मनी में प्रवासियों और राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ हमले की योजना बना रहा है. द लास्ट वेव ऑफ डिफेंस नाम के इस गुट से जुड़े कम से कम 10 संदिग्धों के ठिकानों पर पुलिस ने छापा मारा है. 

इन लोगों में इस गुट का मुखिया भी शामिल है. ये लोग इस गुट से 2024 में अप्रैल से दिसंबर के बीच जुड़े थे. पुलिस ने पांच राज्यों में संदिग्ध ठिकानों पर छापे मारे हैं हालांकि अब तक किसी की गिरफ्तारी की खबर नहीं आई है. कार्ल्सरुहे के संघीय अभियोजन विभाग कार्यालय के मुताबिक, इन लोगों पर घरेलू आतंकवादी संगठन की सदस्यता के आरोप लगे हैं. 

जर्मन पुलिस ने पहली बार पिछले साल मई में इस गुट के खिलाफ कार्रवाई की थी. तब गुट से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था. ये सभी किशोर उम्र के थे और इन पर प्रवासियों के खिलाफ हमले की योजना बनाने का संदेह था. अभियोजकों के मुताबिक, यह गुट खुद को "जर्मन राष्ट्र" के रक्षक के तौर पर देखता है. इसका लक्ष्य हिंसक कार्रवाइयों के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म करना है.

इस महीने की शुरुआत में हैम्बर्ग की अदालत में 8 लोगों पर मुकदमे की शुरुआत हुई. इनमें वो पांच किशोर भी शामिल थे जिन्हें 2024 में गिरफ्तार किया गया था. इन लोगों पर हत्या के प्रयास, हत्या की साजिश रचने और गंभीर शारीरिक चोट पहुंचाने के आरोप हैं.  

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पितृत्व अवकाश को मान्यता देने वाला कानून लेकर आए केंद्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

पितृत्व अवकाश को मान्यता देने वाला कानून लेकर आए केंद्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की बिल्डिंग के गुंबद की तस्वीर
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि कानूनी रूप से बच्चा गोद लेने वाली हर महिला मातृत्व अवकाश की हकदार हैतस्वीर: Tsering Topgyal/AP Photo/picture alliance

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह पितृत्व अवकाश को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने वाला कानून लेकर आए. कानूनी खबरों की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि छुट्टी की अवधि, माता-पिता और बच्चे की जरूरत को ध्यान में रखते हुए तय की जाए. मौजूदा स्थिति में केंद्र सरकार के कर्मचारी 15 दिन तक का पितृत्व अवकाश ले सकते हैं. 

जस्टिस जेबी पादरीवाला और आर महादेवन की बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही. इस याचिका में सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 60(4) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी. यह धारा कहती है कि बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं को 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाशसिर्फ तभी मिल सकता है, जब बच्चा तीन महीने से छोटा हो. 

कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुनाते इस धारा को असंवैधानिक ठहराया. कोर्ट ने कहा कि कानूनी रूप से बच्चा गोद लेने वाली हर महिला मातृत्व अवकाश की हकदार है, चाहे गोद लिए गए बच्चे की उम्र कितनी भी हो. कोर्ट ने कहा कि सभी माताओं को समान मातृत्व लाभ दिए जाने चाहिए, चाहे उनका बच्चा जैविक हो या गोद लिया गया हो. कोर्ट का कहना है कि गोद लिए गए बच्चे को भी मां की जरूरत, एक जैविक बच्चे जितनी ही होती है. 

यह खबर भी पढ़ें- मिस्कैरिज के लिए भी मातृत्व अवकाश देगा जर्मनी

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पश्चिम बंगाल: भबानीपुर सीट पर होगी ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी की टक्कर को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

पश्चिम बंगाल: भबानीपुर सीट पर होगी ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी की टक्कर

शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी की तस्वीर
पिछले चुनावों में नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी आमने-सामने थेतस्वीर: Saikat Paul/ANI | Utpal Sarkar/ANI

पश्चिम बंगाल में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है. पश्चिम बंगाल में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं. टीएमसी ने इनमें से 291 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है. पार्टी ने बताया है कि राज्य की मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी कोलकाता की भबानीपुर सीट से चुनाव लड़ेंगी. 

इससे पहले सोमवार को भारतीय जनता पार्टी बीजेपी ने घोषणा की थी कि नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी दो सीटों- नंदीग्राम और भबानीपुर से चुनाव लड़ेंगे. यानी अब यह साफ हो गया है कि भबानीपुर सीट पर दोनों नेता आमने-सामने होंगे. साल 2021 में हुए पिछले विधानसभा चुनावों में दोनों नेताओं ने नंदीग्राम सीट पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था. तब शुभेंदु अधिकारी को जीत हासिल हुई थी. 

इस बार टीएमसी ने नंदीग्राम सीट से पबित्र कर को टिकट दिया है, जो बीजेपी को छोड़कर टीएमसी में शामिल हुए हैं. पश्चिम बंगाल में अगले महीने 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोटिंग होगी और नतीजे 4 मई को सामने आएंगे. चुनाव की तारीखों की घोषणा करने के बाद चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को भी बदला है. 

यह रिपोर्ट भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल में लाखों लोगों के मताधिकार पर सवाल

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इस्राएल ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी को मारने का दावा किया को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

इस्राएल ने ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी को मारने का दावा किया

अली लारिजानी की एक फाइल तस्वीर
इस्राएल ने ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के महासचिव अली लारिजानी को मारने का दावना किया हैतस्वीर: Marwan Naamani/ZUMA/IMAGO

इस्राएल के रक्षा मंत्री ने ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के महासचिव अली लारिजानी को हवाई हमलों में मारने का दावा किया है. इसके पहले इस्राएली मीडिया में भी उनकी मौत की खबर आई थी. रक्षा मंत्री इस्राएल कात्ज ने इन खबरों की पुष्टि की है. हालांकि, ईरान की तरफ से इन खबरों की पुष्टि अब तक नहीं हुई है. 

इस्राएल ने ईरान के बासिज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर को भी मारने का दावा किया है. इस्राएली रक्षामंत्री के मुताबिक इन दोनों की मौत सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात को हवाई हमलों में हुई.  बासिज को ईरान में विरोध प्रदर्शनों को बल पूर्वक दबाने के लिए जिम्मेदार बताया जाता है. 

लारिजानी ईरान के सबसे मशहूर राजनीतिक परिवार से आते हैं. वह संसद के स्पीकर और वरिष्ठ नीति सलाकार रह चुके हैं. उन्हें ट्रंप प्रशासन से परमाणु बातचीत के लिए अयातोल्लाह अली खमेनेई का सलाहकार भी बनाया गया था. इस्राएल पहले ही इस युद्ध में ईरान के सत्ता तंत्र के कई प्रमुख लोगों को निशाना बना चुका है. इनमें सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खमेनेई भी शामिल हैं. उन्हें तेहरान में 28 फरवरी को निशाना बनाया गया था. 

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एक और एलपीजी टैंकर होरमुज के रास्ते भारत पहुंचा को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

एक और एलपीजी टैंकर होरमुज के रास्ते भारत पहुंचा

मुंद्रा पोर्ट के करीब पहुंचे शिवालिक जहाज की तस्वीर
भारतीय झंडे वाला शिवालिक जहाज करीब 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर सोमवार को गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुंचातस्वीर: IANS

भारतीय एलपीजी टैंकर 'नंदा देवी' मंगलवार, 17 मार्च को गुजरात के जामनगर पहुंचा. यह होरमुज जलडमरूमध्य को पार करते हुए भारत आने वाला दूसरा एलपीजी टैंकर है. नंदा देवी जहाज 46,500 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत पहुंचा है. इससे पहले सोमवार को शिवालिक जहाज करीब 46 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुंचा था.

भारत इस समय लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी)  की कमी से जूझ रहा है क्योंकि उसकी एलपीजी सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा होरमुज जलडमरूमध्य के रास्ते से आता है. अमेरिका और इस्राएल के साथ जारी युद्ध के चलते, ईरान ने इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही रोक रखी है. हालांकि, बीते कुछ दिनों में भारत के कुछ जहाजों को इस रास्ते से निकलने की अनुमति ईरान ने दी है. 

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि ईरान ने भारतीय जहाजों को होरमुज के रास्ते गुजरने की अनुमति देने के बदले में भारत से मांग की थी कि वह फरवरी में युद्ध की शुरुआत से पहले जब्त किए गए ईरान से संबंधित तीन टैंकरों को छोड़ दे. भारत ने भारतीय जलक्षेत्र के पास से इन टैंकरों को जब्त किया था. इन पर अपनी पहचान बदलने या छिपाने और अवैध शिप-टू-शिप ट्रांसफर में शामिल होने का आरोप था. 

हालांकि, भारत का कहना है कि इस बारे में ईरान के साथ उसका कोई समझौता नहीं हुआ है. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि होरमुज से भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति देने को लेकर कोई व्यापक समझौता नहीं हुआ है और ईरान को इसके बदले में कुछ नहीं मिला है. उन्होंने इस अनुमति का पूरा श्रेय कूटनीतिक प्रयासों को दिया. 

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हरदीप पुरी की बेटी को जेफ्री एप्सटीन से जोड़ने वाले कंटेंट पर रोक को स्किप करें
१७ मार्च २०२६

हरदीप पुरी की बेटी को जेफ्री एप्सटीन से जोड़ने वाले कंटेंट पर रोक

यूएन के एक कार्यक्रम में बोलते हुए हरदीप पुरी
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थीतस्वीर: AP

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार, 17 मार्च को आदेश दिया कि केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को अमेरिकी बाल यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन के साथ जोड़ने वाले विवादित कंटेंट को हटाया जाए. कानूनी खबरों की वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक, कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को इससे जुड़ी सभी पोस्टों को हटाने का आदेश दिया. 

कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसी पोस्ट डालने वाले लोग अपने कंटेंट को हटाने में विफल रहते हैं तो सोशल मीडिया कंपनियों को उनकी विवादित पोस्ट, वीडियो, लिंक या कमेंट आदि को हटा देना चाहिए. हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश भारत में उपलब्ध और भारत से अपलोड किए गए कंटेंट पर ही लागू होंगे. कोर्ट ने कहा कि बाहरी देशों के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया गया है. 

हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी पुरी एक अमेरिकी नागरिक हैं. उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि 22 फरवरी से सोशल मीडिया पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उनके जेफ्री एप्सटीन के साथ व्यावसायिक और वित्तीय संबंध थे. उन्होंने इन आरोपों को गलत बताते हुए, ऐसा दावा करने वाली पोस्टों को हटाने की अपील की थी और हर्जाने के तौर पर 10 करोड़ रुपये की मांग की थी. 

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निखिल रंजन
निखिल रंजन निखिल रंजन एक दशक से डॉयचे वेले के लिए काम कर रहे हैं और मुख्य रूप से राजनैतिक विषयों पर लिखते हैं.
आदर्श शर्मा
आदर्श शर्मा डीडब्ल्यू हिन्दी के साथ जुड़े आदर्श शर्मा भारतीय राजनीति, समाज और युवाओं के मुद्दों पर लिखते हैं.