ईरान संकट: अब तक 1,200 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित निकाले गए
प्रकाशित २ अप्रैल २०२६आखिरी अपडेट २ अप्रैल २०२६
आपके लिए अहम जानकारी
ट्रंप की नई धमकी, "ईरान पर अगले दो-तीन हफ्ते भारी हमले"
आर्टेमिस-2 मिशन लॉन्च, 50 साल बाद चांद की ओर इंसानों की उड़ान
इंडोनेशिया में आया 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप
अमेरिका ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति से हटाए प्रतिबंध
ईंधन की बढ़ती कीमतों के लिए ईरान जिम्मेदार: ट्रंप
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकी जनता के नाम लिखा खुला पत्र
भारत के रक्षा निर्यात में वित्त वर्ष 2026 में 62% की बड़ी उछाल
विदेशों में हर दिन 20 से ज्यादा भारतीय कामगारों की मौत
एलपीजी संकट से सबक, पाइप वाली गैस को बढ़ावा देगा भारत
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने पर चीन ने अमेरिका‑इस्राएल को ठहराया जिम्मेदार
साइरस पूनावाला ने ₹1.50 अरब में खरीदी राजा रवि वर्मा की पेंटिंग
मुंबई में हुई एक ऐतिहासिक नीलामी में भारतीय कलाकार राजा रवि वर्मा की एक पेंटिंग ने वैश्विक रिकॉर्ड बना दिया है. 'यशोदा और कृष्ण' नामक इस ऑयल पेंटिंग को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के चेयरमैन साइरस पूनावाला ने 1.79 करोड़ डॉलर में खरीदा है. भारतीय मुद्रा में इसकी कीमत लगभग ₹150.36 करोड़ है, जो किसी भी आधुनिक भारतीय कलाकृति के लिए चुकाई गई अब तक की सबसे अधिक कीमत है.
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1890 के दशक में बनाई गई यह कलाकृति राजा रवि वर्मा की सबसे उत्कृष्ट कृतियों में से एक मानी जाती है. नीलामी के दौरान इस पेंटिंग ने अपने अनुमानित मूल्य (लगभग ₹72 करोड़ से ₹108 करोड़) को काफी पीछे छोड़ दिया.
पेंटिंग खरीदने के बाद साइरस पूनावाला ने 'द टाइम्स ऑफ इंडिया' से बात करते हुए कहा कि यह एक राष्ट्रीय खजाना है. उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर की कि इस बेशकीमती धरोहर को केवल निजी संग्रह तक सीमित रखने के बजाय समय-समय पर सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि आम लोग भी इसे देख सकें. कला विशेषज्ञों ने पूनावाला के इस निर्णय की सराहना की है, क्योंकि इससे भारतीय सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे जनता के साथ साझा करने को बढ़ावा मिलेगा.
सीरिया ने कहा, शरणार्थियों की जबरन वापसी मंजूर नहीं
सीरियाई सरकार ने जर्मनी से शरणार्थियों के जबरन निर्वासन के किसी भी प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है. यह बयान बर्लिन में चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स और सीरियाई अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के बीच हुई उस बैठक के बाद आया है, जिसमें अगले तीन वर्षों के भीतर जर्मनी में रह रहे 9 लाख से अधिक सीरियाई नागरिकों में से 80 फीसदी की वापसी का लक्ष्य रखा गया था.
सीरियाई विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि विदेशों में रह रहे सीरियाई नागरिक देश के लिए एक रणनीतिक संसाधन हैं, न कि कोई आर्थिक बोझ. सरकार वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ मिलकर युद्ध से क्षतिग्रस्त हुए बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण पर काम कर रही है, ताकि ऐसी स्थितियां पैदा की जा सकें जहां शरणार्थी अपनी इच्छा से और सम्मानजनक तरीके से वापस लौट सकें. सीरिया का मानना है कि जबरन वापसी के बजाय सुरक्षा और सुविधाओं की गारंटी देना स्वैच्छिक वापसी के लिए अधिक प्रभावी कदम होगा.
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जर्मनी, जिसने 14 साल लंबे सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान यूरोपीय संघ में सबसे अधिक शरणार्थियों को पनाह दी है, अब इस विशाल कार्य की चुनौतियों को लेकर चर्चा में है. फिलहाल, दोनों देशों के बीच शरणार्थियों की सुरक्षित और स्वैच्छिक घर वापसी को लेकर बातचीत का सिलसिला जारी है, लेकिन सीरिया ने यह साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में आकर अपने नागरिकों को जबरन स्वीकार नहीं करेगा.
ट्रंप की 'नाटो' छोड़ने की धमकी के बीच मार्क रूटे करेंगे वॉशिंगटन की यात्रा
नाटो के महासचिव मार्क रूटे अगले सप्ताह वॉशिंगटन का दौरा करेंगे, जहां वे राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और अन्य अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च-स्तरीय बातचीत करेंगे. नाटो के एक प्रवक्ता ने गुरुवार को पुष्टि की कि यह एक "लंबे समय से नियोजित" यात्रा है. हालांकि, यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन और अन्य नाटो सहयोगियों के बीच दरार ऐतिहासिक रूप से गहरी हो गई है.
विवाद की मुख्य वजहें
- ईरान युद्ध पर मतभेद: ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष (जो 28 फरवरी से शुरू हुआ) को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों की राय अलग-अलग है. ट्रंप ने यूरोपीय देशों द्वारा सक्रिय रूप से युद्ध में शामिल न होने पर नाराजगी जताई है.
- होर्मुज जलडमरूमध्य: ट्रंप ने नाटो सहयोगियों से इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित करने और खुलवाने के लिए युद्धपोत भेजने की मांग की थी, जिसे ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन जैसे देशों ने काफी हद तक ठुकरा दिया है.
- बेस और एयरस्पेस का उपयोग: स्पेन ने अमेरिकी विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है और ब्रिटेन ने अपने बेस का उपयोग केवल "रक्षात्मक मिशन" के लिए सीमित कर दिया है, जिससे ट्रंप बेहद नाराज हैं.
बुधवार को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे अमेरिका को इस सैन्य गठबंधन से बाहर निकालने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं. उन्होंने नाटो को महज 'कागजी शेर' करार दिया.
225 साल बाद मिला डेनमार्क का ऐतिहासिक युद्धपोत
डेनमार्क के समुद्री पुरातत्वविदों ने कोपेनहेगन बंदरगाह की गहराई में 225 साल पुराने ऐतिहासिक युद्धपोत 'दानेब्रोग' के मलबे की खोज की है. वाइकिंग शिप म्यूजियम ने गुरुवार को इस बड़ी उपलब्धि की घोषणा की, जो ठीक उसी दिन हुई जब 1801 में 'कोपेनहेगन की लड़ाई' लड़ी गई थी. यह युद्धपोत ब्रिटिश एडमिरल होरेशियो नेल्सन के हमले के दौरान भीषण विस्फोट के बाद समुद्र में समा गया था और अब इसे लगभग 15 मीटर की गहराई में घनी तलछट के नीचे से निकाला जा रहा है.
इस खोज के दौरान गोताखोरों को जहाज की दो तोपें, नाविकों की वर्दी के अवशेष, जूते, कांच की बोतलें और धातु के प्रतीक चिन्ह मिले हैं. यहां तक कि एक नाविक के जबड़े का हिस्सा भी बरामद हुआ है, जिसे 1801 की लड़ाई में लापता हुए चालक दल के सदस्यों में से एक का माना जा रहा है. विशेषज्ञों ने लकड़ी की वैज्ञानिक जांच के आधार पर पुष्टि की है कि यह ढांचा 48 मीटर लंबे उसी प्रसिद्ध युद्धपोत का है, जो उस समय डेनमार्क की नौसेना का मुख्य स्तंभ हुआ करता था.
पुरातत्वविद् वर्तमान में समय के खिलाफ एक कठिन जंग लड़ रहे हैं, क्योंकि जिस स्थान पर यह मलबा मिला है, वहां जल्द ही एक विशाल हाउसिंग प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य शुरू होने वाला है. पानी के नीचे दृश्यता लगभग शून्य होने के बावजूद टीम इस ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित निकालने में जुटी है, ताकि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले इसे हमेशा के लिए दफन होने से बचाया जा सके.
ईरान संकट: 1,200 से ज्यादा भारतीय सुरक्षित निकाले गए, 845 छात्र भी
ईरान में जारी युद्ध के बीच भारत ने अब तक 1,200 से अधिक भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला है. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में बताया कि इनमें 845 छात्र शामिल हैं. उन्होंने कहा कि 996 भारतीयों को आर्मेनिया और 204 को अजरबैजान भेजा गया है, जहां से उन्हें आगे भारत लाने की व्यवस्था की जा रही है.
जायसवाल के अनुसार, यह निकासी अभियान भारत सरकार द्वारा स्थानीय प्रशासन और भारतीय मिशनों के साथ समन्वय में संचालित किया जा रहा है. आर्मेनिया और अजरबैजान में फंसे नागरिकों के लिए अस्थायी आवास और अन्य सहायता की व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें सुरक्षित रूप से भारत वापस लाया जा सके.
इटली की कंपनी पर फर्जी व्हॉट्सऐप के जरिए जासूसी का आरोप
मैसेजिंग सर्विस व्हॉट्सऐप ने दावा किया है कि इटली की एक निगरानी कंपनी ने लगभग 200 यूजर्स को धोखे से उसके फर्जी ऐप को डाउनलोड करने के लिए बहकाया, जिसे जासूसी के मकसद से डिजाइन किया गया था. मेटा प्लेटफॉर्म्स के स्वामित्व वाली कंपनी के मुताबिक, यह ऐप असली व्हॉट्सऐप जैसा दिखता था, लेकिन इसके जरिए यूजर्स की निगरानी की जा रही थी.
व्हॉट्सऐप ने अपने बयान में कहा कि यह "अत्यंत लक्षित" अभियान इटली स्थित ASIGINT नामक कंपनी ने चलाया, जो उत्तरी इटली की साइबर कंपनी SIO की सहायक इकाई है. SIO की वेबसाइट पर वह खुद को “हाई‑परफॉर्मेंस साइबर इंटेलिजेंस सॉल्यूशंस” देने वाली कंपनी बताती है. व्हॉट्सऐप ने बताया कि ज्यादातर पीड़ित इटली में थे, हालांकि उनकी पहचान उजागर नहीं की गई.
SIO का कहना है कि वह कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों के साथ काम करती है, लेकिन इस मामले पर कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. इटली के गृह मंत्रालय ने सवालों को पुलिस के पास भेज दिया. यह पिछले 15 महीनों में दूसरी बार है जब मेटा ने इटली में स्पायवेयर गतिविधियों को सार्वजनिक रूप से बाधित किया है. इससे पहले 2025 की शुरुआत में अमेरिकी कंपनी पैरागन के स्पायवेयर से जुड़ा निगरानी मामला सामने आया था, जिसके बाद इटली और पैरागन के बीच संबंध समाप्त हो गए थे.
विदेशों में हर दिन 20 से ज्यादा भारतीय कामगारों की मौत
विदेशों में काम कर रहे भारतीय कामगारों की स्थिति को लेकर सामने आए सरकारी आंकड़े गंभीर चिंता पैदा करते हैं. पिछले पांच वर्षों में रोजाना औसतन 20 से अधिक भारतीय कामगारों की विदेशी धरती पर मौत हुई है. विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 29 जनवरी को राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि 2021 से 2025 के बीच कुल 37,740 भारतीय कामगारों की विदेशों में मृत्यु हुई, हालांकि इन मौतों के कारणों का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया.
सबसे ज्यादा कहां हुईं मौतें
आंकड़ों के अनुसार, 2021 में सबसे अधिक 8,234 मौतें दर्ज की गईं. इसके बाद 2022 में यह संख्या घटकर 6,614 रही, लेकिन फिर इसमें लगातार वृद्धि हुई, 2023 में 7,291, 2024 में 7,747 और 2025 में 7,854 मौतें हुईं. कुल मौतों में से 86 प्रतिशत से अधिक खाड़ी देशों में दर्ज की गईं. सबसे ज्यादा मौतें संयुक्त अरब अमीरात (12,380) और सऊदी अरब (11,757) में हुईं, इसके बाद कुवैत, ओमान, मलेशिया और कतर का स्थान रहा.
इसी अवधि में विदेशों में भारतीय मिशनों को 80,985 शिकायतें मिलीं, जिनमें दुर्व्यवहार, शोषण और कार्यस्थल से जुड़े मामले शामिल थे. सबसे अधिक शिकायतें यूएई से आईं, जहां 16,965 मामलों की सूचना दी गई. इसके बाद कुवैत, ओमान और सऊदी अरब रहे.
एलपीजी संकट से सबक, पाइप वाली गैस को बढ़ावा देगा भारत
ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न एलपीजी संकट को भारत सरकार घरेलू गैस सप्लाई व्यवस्था को सुधारने और पाइप्ड कुकिंग गैस (पीएनजी) की ओर तेजी से बदलाव के अवसर के रूप में इस्तेमाल कर रही है. सरकार ने आपात शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं कि सीमित एलपीजी सप्लाई केवल वास्तविक घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचे. साथ ही, जिन उपभोक्ताओं के पास पाइप्ड गैस कनेक्शन है, उन्हें तीन महीने बाद एलपीजी सप्लाई बंद करने का फैसला किया गया है.
पढ़ें रिपोर्ट: गैस महंगी, मिट्टी का चूल्हा मजबूरी: महानगर से गांव लौट रहे हैं कई प्रवासी मजदूर
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार पाइपलाइन बुनियादी ढांचे को भी तेजी से विस्तार दे रही है. पिछले महीने नए गैस पाइपलाइन अनुमोदनों के लिए समयसीमा तय की गई, जिसमें तय समय में जवाब न मिलने पर अनुमति खुद स्वीकृत मानी जाएगी और जमीन मालिकों व स्थानीय प्रशासन को पाइपलाइन बिछाने की अनुमति देना अनिवार्य किया गया है. पेट्रोलियम मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि देशभर में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है और संकट को अवसर में बदला जा रहा है. मार्च में 5.8 लाख नए घरों को पाइप्ड गैस से जोड़ा गया.
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है और अपनी करीब 60 फीसदी जरूरतें आयात से पूरी करता है. 2025 में देश ने लगभग 2.2 करोड़ टन एलपीजी आयात किया, जिस पर करीब 12 अरब डॉलर खर्च हुए. विशेषज्ञों का कहना है कि पाइप्ड गैस के विस्तार से 2030 तक एलपीजी आयात में 10–15 फीसदी की कमी आ सकती है, जिससे सब्सिडी का बोझ घटेगा और ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित व कुशल बनेगी. सरकार को उम्मीद है कि मौजूदा नीतिगत बदलावों से सालाना पाइप्ड गैस कनेक्शन की संख्या बढ़कर 75 लाख हो जाएगी.
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने पर चीन ने अमेरिका‑इस्राएल को ठहराया जिम्मेदार
चीन ने होर्मुज स्ट्रेट के प्रभावी रूप से बंद होने के लिए अमेरिका और इस्राएल को जिम्मेदार ठहराया है. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने गुरुवार को कहा कि इस स्थिति की "जड़ में अमेरिका और इस्राएल की ईरान के खिलाफ अवैध सैन्य गतिविधियां" हैं.
माओ निंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा केवल युद्धविराम और खाड़ी क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता बहाल होने से ही संभव है. अमेरिका और इस्राएल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए जाने के बाद, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी. ईरान और ओमान के बीच स्थित यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का अहम केंद्र है.
डॉनल्ड ट्रंप का उत्तराधिकारी कौन, जेडी वैंस या मार्को रूबियो?
ईरानी तट के बेहद नजदीक होने के कारण अमेरिका के लिए जहाजों को सुरक्षा देना मुश्किल माना जा रहा है और फिलहाल केवल कुछ ही टैंकरों को तेहरान की अनुमति के बाद गुजरने दिया गया है. चीन ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि इस जलमार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी मुख्य रूप से उन देशों की है जो ईरान से तेल आयात पर निर्भर हैं, न कि अमेरिका की.
महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह माफ
भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं के बीच महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर 30 जून 2026 तक कस्टम ड्यूटी पर पूरी छूट देने का फैसला किया है. वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को यह जानकारी दी.
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह कदम एक अस्थायी और लक्षित राहत के रूप में उठाया गया है, ताकि देश में जरूरी पेट्रोकेमिकल कच्चे माल की उपलब्धता बनी रहे, डाउनस्ट्रीम उद्योगों पर लागत का दबाव कम हो और सप्लाई स्थिर बनी रहे.
सरकार के अनुसार, इस छूट का फायदा उन कई सेक्टरों को मिलने की उम्मीद है जो पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर निर्भर हैं, जैसे प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल, केमिकल, ऑटो कंपोनेंट और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर. सरकार का कहना है कि इससे उत्पादों के उपभोक्ताओं को भी राहत मिलने की उम्मीद है.जर्मनी और सीरिया : नए समीकरणों की तलाश
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में बाधा पर सुप्रीम कोर्ट नाराज
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे सात न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई हिंसा और धमकाने पर कड़ा रुख अपनाया है. इनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल हैं. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इसे न्याय प्रशासन को बाधित करने का “सुनियोजित और गंभीर प्रयास” बताते हुए कहा कि अधिकारियों को कई घंटों तक न सुरक्षा मिली, न भोजन और न पानी, जबकि राज्य प्रशासन को पूर्व सूचना दी गई थी.
अदालत ने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने कहा कि यह आचरण न सिर्फ न्यायिक अधिकारियों को भयभीत करने का प्रयास है, बल्कि अदालत की साख और कानून के शासन पर सीधा हमला है. बेंच ने इसे प्रथम दृष्टया आपराधिक अवमानना करार दिया.
भारत के रक्षा निर्यात में वित्त वर्ष 2026 में 62% की बड़ी उछाल
सरकार ने गुरुवार को बताया कि भारत के रक्षा निर्यात में वित्त वर्ष 2025-26 में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह बढ़कर रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 23,622 करोड़ रुपए के मुकाबले 62.66 प्रतिशत ज्यादा है.
सरकार के मुताबिक, इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक उपक्रम (डीपीएसयू) और निजी क्षेत्र, दोनों का अहम योगदान रहा. कुल निर्यात में डीपीएसयू का हिस्सा 54.84 प्रतिशत और निजी कंपनियों का 45.16 प्रतिशत रहा. रक्षा मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि यह उपलब्धि भारत को दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातक देशों में शामिल करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप है.
भारत अब केवल रक्षा प्रणालियों और उप-प्रणालियों का वैश्विक साझेदार ही नहीं है, बल्कि वित्त वर्ष 2026 तक 80 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है. साथ ही, निर्यातकों की संख्या भी बढ़कर 128 से 145 हो गई है, जो 13.3 प्रतिशत की वृद्धि है.
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकी जनता के नाम लिखा खुला पत्र
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका की जनता के नाम एक भावुक और आलोचनात्मक खुला पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को "बेतुका और खर्चीला" करार दिया है. पेजेश्कियान ने अपने पत्र की शुरुआत उन अमेरिकी नागरिकों को संबोधित करते हुए की, जो "झूठे नैरेटिव और विकृतियों के बीच सच्चाई की तलाश कर रहे हैं." उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरानी लोगों की अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों की जनता से कोई दुश्मनी नहीं है.
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने पत्र में तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि इस्राएल ने अमेरिका को इस युद्ध में घसीटा है. उन्होंने पूछा, "क्या यह सच नहीं है कि अमेरिका इस आक्रामकता में इस्राएल के प्रतिनिधि के रूप में उतरा है और उस शासन द्वारा जोड़-तोड़ का शिकार हुआ है? क्या वाकई अमेरिकी सरकार की प्राथमिकताओं की सूची में अमेरिका पहले स्थान पर है?"
पेजेश्कियान ने चेतावनी दी कि दुनिया आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है और टकराव का रास्ता पहले से कहीं अधिक आत्मघाती और निरर्थक है. उन्होंने लिखा कि टकराव और जुड़ाव के बीच का चुनाव आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेगा.
इस पत्र में राष्ट्रपति ने अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत का जिक्र नहीं किया. साथ ही, उन्होंने डॉनल्ड ट्रंप के उस दावे पर भी कुछ नहीं कहा, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि ईरान ने खुद अमेरिका से युद्धविराम की मांग की है. बता दें कि ईरानी विदेश मंत्रालय पहले ही ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर चुका है.
ईंधन की बढ़ती कीमतों के लिए ईरान जिम्मेदार: ट्रंप
ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में सफलताओं का दावा करने के बाद, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अब युद्ध के आर्थिक प्रभावों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है. ट्रंप ने वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में हुई भारी वृद्धि के लिए सीधे तौर पर ईरानी शासन को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि यह उछाल पूरी तरह से ईरानी शासन द्वारा कमर्शियल तेल टैंकरों और पड़ोसी देशों पर किए गए "आतंकवादी हमलों" का परिणाम है, जिनका इस संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं था.
क्या भारत में 'कंजेशन टैक्स' लागू करना जरूरी हो गया है?
इस युद्ध ने वैश्विक तेल बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका में गैसोलीन की औसत कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो साल 2022 के बाद पहली बार हुआ है. साथ ही ईंधन की बढ़ती कीमतों ने फिलीपींस जैसे देशों में गंभीर संकट पैदा कर दिया है, जो पिछले हफ्ते 'राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल' घोषित करने वाला पहला देश बन गया.
डॉनल्ड ट्रंप का मानना है कि जैसे ही सैन्य अभियान अपने अंतिम चरण में पहुंचेगा, तेल की कीमतों में स्थिरता आनी शुरू हो जाएगी. फिलहाल, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और तेल टैंकरों का सुरक्षित मार्ग बहाल करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है.
अमेरिका ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति से हटाए प्रतिबंध
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने बुधवार को वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के खिलाफ लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने की घोषणा की है. यह फैसला रोड्रिग्ज के पद संभालने के कुछ समय बाद आया है. वॉशिंगटन ने उनके पूर्ववर्ती निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल कर दिया था, जिन्हें 3 जनवरी को राजधानी काराकास में अमेरिकी बलों द्वारा की गई एक छापेमारी के दौरान हिरासत में लिया गया था.
प्रतिबंध हटने का क्या होगा असर?
विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय के अनुसार, रोड्रिगेज का नाम अब "विशेष रूप से नामित नागरिकों की सूची" से हटा दिया गया है. इस कदम के बाद अब रोड्रिगेज अमेरिकी कंपनियों और निवेशकों के साथ अधिक स्वतंत्रता से काम कर सकेंगी. इससे वेनेजुएला और अमेरिका के बीच आर्थिक लेनदेन के रास्ते खुलेंगे और इसे दोनों देशों के बीच बिगड़े हुए कूटनीतिक रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
डेल्सी रोड्रिगेज ने एक्स पर इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक "महत्वपूर्ण कदम" बताया. उन्होंने कहा, "हमें विश्वास है कि यह प्रगति हमारे देश पर लगे अन्य प्रतिबंधों को हटाने का मार्ग प्रशस्त करेगी, जिससे हमारे लोगों के लाभ के लिए प्रभावी द्विपक्षीय सहयोग एजेंडा तैयार किया जा सकेगा."