1946 के बाद सबसे ज्यादा युद्ध, महिलाओं पर बढ़ा संकट
प्रकाशित २३ अक्टूबर २०२५आखिरी अपडेट २३ अक्टूबर २०२५
शेख हसीना के खिलाफ चल रहे मामले में 13 नवंबर को सुनाई जाएगी सजा
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ चल रहे मुकदमे में गुरुवार, 23 अक्टूबर को सुनवाई पूरी हो गई. बांग्लादेश के अटॉर्नी जनरल ने बताया कि इस मामले में 13 नवंबर को फैसला सुनाया जाएगा. फिलहाल भारत में रह रहीं शेख हसीना पर आरोप हैं कि पिछले साल जुलाई में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान उन्होंने “मानवता के खिलाफ अपराधों” को अंजाम दिया.
न्यूज एजेंसी एएफपी के मुताबिक, हसीना की अनुपस्थिति में 1 जून को उनके खिलाफ मुकदमे की शुरुआत हुई. इस दौरान हुई गवाहियों में आरोप लगाया गया कि हसीना ने सामूहिक हत्याओं का आदेश दिया था. गवाहों में एक ऐसा व्यक्ति भी शामिल था, जिसका चेहरा गोली लगने से क्षत-विक्षत हो गया था.
एएफपी के मुताबिक, अभियोजकों ने कोर्ट में पुलिस द्वारा सत्यापित ऑडियो टेप भी चलाए, जो यह संकेत दे रहे थे कि हसीना ने सुरक्षाबलों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ “घातक हथियार इस्तेमाल करने” का सीधा आदेश दिया था. अभियोजकों ने कोर्ट से मांग की है कि दोषी पाए जाने पर हसीना को मौत की सजा सुनाई जाए.
दुनिया में 1946 के बाद सबसे ज्यादा युद्ध, महिलाओं पर बढ़ा संकट
दुनिया इस समय 1946 के बाद सबसे ज्यादा युद्धों का सामना कर रही है. इससे महिलाओं और लड़कियों के लिए खतरा और पीड़ा बढ़ गई है. संयुक्त राष्ट्र की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, अब 67.6 करोड़ महिलाएं ऐसे इलाकों में रहती हैं जो संघर्ष क्षेत्र के 50 किलोमीटर के अंदर हैं. पिछले दो सालों में महिलाओं और बच्चों की मौतें चार गुना बढ़ीं हैं और यौन हिंसा के मामले 87 फीसदी तक बढ़ गए हैं.
यह रिपोर्ट सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1325 की 25वीं वर्षगांठ पर जारी की गई. यह प्रस्ताव महिलाओं की सुरक्षा और शांति प्रक्रिया में उनकी भूमिका सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था. लेकिन अब संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि दो दशक में जितनी भी तरक्की हुई, वो सब पीछे जा रही है.
यूएन की महिला प्रमुख सिमा बहूस ने कहा, “महिलाएं और लड़कियां बड़ी संख्या में मारी जा रही हैं, शांति वार्ताओं से बाहर रखी जा रही हैं और असुरक्षित छोड़ी जा रही हैं. महिलाओं को और वादे नहीं, बल्कि शक्ति, सुरक्षा और समान भागीदारी चाहिए.”
रिपोर्ट बताती है कि 2024 में 10 में से 9 शांति प्रक्रियाओं में कोई महिला वार्ताकार नहीं थी. जबकि वैश्विक सैन्य खर्च 2.7 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा रहा, संघर्ष क्षेत्रों में महिला संगठनों को सिर्फ 0.4 फीसदी मदद मिली. बहूस ने कहा, “दुनिया शांति में नहीं, युद्ध में निवेश कर रही है.” रिपोर्ट ने मांग की है कि महिलाओं को नेतृत्व और न्याय में बराबर स्थान मिले.
अब सीमित अधिकारी ही दे सकेंगे सोशल मीडिया से कंटेंट हटाने के आदेश
भारत सरकार ने उन अधिकारियों की संख्या सीमित कर दी है, जो इंटरनेट से कंटेंट हटाने का आदेश दे सकते हैं. नए नियमों के तहत, अब केवल संयुक्त सचिव या उससे उच्च पद वाले अधिकारी और उप-महानिरीक्षक (डीआईजी) या उससे ऊपर के पद पर कार्यरत पुलिस अधिकारी ही सोशल मीडिया कंपनियों को किसी कंटेंट को हटाने का आदेश दे सकेंगे.
यह बदलाव इलॉन मस्क की सोशल मीडिया कंपनी एक्स और भारत सरकार के बीच चली कानूनी लड़ाई के बाद किया गया है. एक्स ने कर्नाटक हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के सहयोग पोर्टल को चुनौती दी थी, जिसके तहत बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारियों को सोशल मीडिया से कंटेंट हटाने का आदेश देने का अधिकार था. सोशल मीडिया कंपनियों के लिए इन आदेशों का पालन करना जरूरी होता था.
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक्स की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद एक्स ने इस फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही थी. लेकिन उससे पहले ही केंद्र सरकार ने नियमों में बदलाव कर दिया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, नए नियम 15 नवंबर से लागू हो जाएंगे. वहीं, एक्स ने इस बारे में टिप्पणी करने के रॉयटर्स के अनुरोध का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया.
टेस्ला की बिक्री बढ़ने के बावजूद मुनाफे में आई गिरावट
टेस्ला ने लगातार चौथी तिमाही में मुनाफे में गिरावट दर्ज की है, जबकि बिक्री में बढ़ोतरी हुई. कंपनी का तिमाही मुनाफा 37 फीसदी घटकर 1.4 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले साल इसी समय 2.2 अरब डॉलर था. यह इलॉन मस्क की कंपनी के लिए लगातार चौथी तिमाही में नुकसान है. नतीजों के बाद टेस्ला के शेयर आफ्टर-आवर्स ट्रेडिंग में 3 फीसदी से ज्यादा गिर गए.
बिक्री में बढ़ोतरी इसलिए हुई क्योंकि ग्राहकों ने 1 अक्टूबर से पहले खत्म हो रहे 7,500 डॉलर के फेडरल ईवी टैक्स क्रेडिट का फायदा उठाया. हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इससे अगली तिमाही की बिक्री प्रभावित हो सकती है, क्योंकि कई खरीदारों ने पहले ही गाड़ियां खरीद लीं.
एपी समाचार एजेंसी के अनुसार, निवेशकों के साथ कॉल पर इलॉन मस्क ने कार बिक्री से ध्यान हटाकर कंपनी के अन्य प्रोजेक्ट्स की ओर मोड़ने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि टेस्लाअब अपने रोबोटैक्सी सर्विस, एआई उत्पादों और ऑप्टिमस रोबोट्स पर फोकस कर रही है.
मस्क ने कहा, “यह इतना असली लगेगा कि आपको इसे छूकर देखना पडेगा.” उन्होंने दावा किया कि यह “रोबोट आर्मी” एक दिन “दुनिया का सबसे बड़ा प्रोडक्ट” बनेगी. मस्क ने यह भी बताया कि साल के अंत तक टेक्सास में उनकी रोबोटैक्सी सेवा से “सुरक्षा मॉनिटर” हटा दिए जाएंगे और यह सेवा जल्द ही 10 और शहरों में शुरू होगी.
कथित ड्रग तस्करी करने वाली नाव पर अमेरिका ने फिर किया हमला, तीन लोगों की मौत
समाचार एजेंसी एपी की खबर के अनुसार, अमेरिकी सेना ने बुधवार को पूर्वी प्रशांत महासागर में कथित ड्रग तस्करी करने वाली नाव पर अपना नौंवा हवाई हमला किया, जिसमें नाव पर सवार तीनों लोग मारे गए. अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा, “जैसे अल-कायदा ने हमारे देश पर हमला किया, वैसे ही ये कार्टेल हमारे बॉर्डर और लोगों से युद्ध कर रहे हैं. कोई शरण या माफी नहीं—सिर्फ न्याय.” उन्होंने इन तस्करों को “हमारे हेमीस्फियर का अल-कायदा” भी बताया.
राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इन हमलों को सही ठहराते हुए कहा कि अमेरिका ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ “सशस्त्र संघर्ष” में है और इन संगठनों को “अवैध” माना गया है. हेगसेथ ने एक वीडियो भी साझा की, जिसमें एक छोटी नाव ब्राउन पैकेटों से भरी दिखी और कुछ ही सेकेंड में विस्फोट से जलकर पानी में स्थिर तैरती रही.
हालांकि, अमेरिका ने अब तक किसी भी नाव के यात्रियों पर मुकदमा नहीं चलाया है. पहले के हमले से बचे दो लोगों को उनके देश इक्वाडोर और कोलंबिया वापस भेज दिया गया था. विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकतर अमेरिकी अगर नशे से मरते हैं तो वो मौत ज्यादातर फेंटानिल नाम की दवा से होती हैं. यह दवा मेक्सिको से भूमि मार्ग से आती है, जबकि कोलंबिया का अधिकतर कोकीन पूर्वी प्रशांत महासागर से होकर तस्करी किया जाता है.
ट्रंप ने चेतावनी दी, “हम जमीन पर भी हमला कर सकते हैं. हर बार ऐसा करने से 25,000 अमेरिकी जिंदगियां बच रही हैं.” ट्रंप प्रशासन के अनुसार, इन हमलों में अब तक कम से कम 37 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि, कई अमेरिकी सांसद इस कार्रवाई की कानूनी वैधता पर सवाल उठा रहे हैं.
अमेरिका के बाद अब ईयू ने भी लगाए रूस पर नए प्रतिबंध
यूरोपीय संघ ने रूस पर अपने 19वें व्यापक प्रतिबंध पैकेज को बुधवार को स्वीकृति दे दी है. इस नए पैकेज में रूसी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के आयात पर बैन, तेल टैंकरों की शैडो-फ्लीट के खिलाफ कार्रवाई और रूस के वित्तीय क्षेत्र पर नए प्रतिबंध शामिल हैं.
एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूसी तेल उद्योग पर नए सैंक्शन लगाए थे. यह कदम मॉस्को के यूक्रेन पर आक्रमण को फंड करने वाले पैसे को रोकने और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत करने पर मजबूर करने की कोशिश है.
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के लिए यह एक बड़ी जीत है. उन्होंने ब्रसेल्स में कहा, “हम इसका इंतजार कर रहे थे. भगवान करे कि ये काम करे और यह बहुत महत्वपूर्ण है.”
युद्ध तीन साल से ज्यादा समय से चल रहा है और अभी इसके खत्म होने का कोई संकेत नहीं दिख रहा. यूक्रेनी सेना ने रूस की बड़ी सेना को लगभग 1,000 किलोमीटर लंबी सीमा पर रोक रखा है. रोजाना रूसी हमले कड़ाके की ठंड में यूक्रेन की बिजली व्यवस्था को निशाना बना रहे हैं, जबकि यूक्रेनी सेना रूसी तेल रिफाइनरी और कारखानों पर हमले कर रही है.
जेलेंस्की ने कहा, “यह दुनिया के अन्य देशों के लिए एक अच्छा संकेत है कि वे प्रतिबंधों में शामिल हों.” वहीं, रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने बुधवार को अपने रणनीतिक परमाणु बलों के अभ्यास का आदेश दिया, जिसे कई लोग बुडापेस्ट बैठक के रद्द होने की प्रतिक्रिया के तौर पर देख रहे हैं.
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रूसी तेल का आयात घटाएगा भारत?
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारत इस साल के अंत तक रूसी तेल के आयात में भारी कमी लाएगा. उन्होंने रिपोर्टरों से कहा, “जैसा कि आप जानते हैं, भारत ने मुझसे कहा है कि वे इसे बंद करेंगे. यह एक प्रक्रिया है, आप इसे एकदम से बंद नहीं कर सकते. लेकिन इस साल के अंत तक, वे इसे लगभग शून्य पर ले आएंगे. यह एक बड़ी बात है.” ट्रंप ने अमेरिकी समयानुसार बुधवार को यह बात कही.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि भारत की तेल कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करने के लिए रूसी तेल का आयात घटाएंगी. रिलायंस इंडस्ट्रीज रूसी तेल की सबसे बड़ी भारतीय खरीदार है. दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि रिलायंस रूसी तेल के आयात को घटाने या पूरी तरह से बंद करने की योजना बना रही है. इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां भी यह सुनिश्चित कर रही हैं कि उनके पास रोसनेफ्ट और लुकोइल से तेल की आपूर्ति ना हो.
इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन ने रूस के तेल उद्योग पर “भारी प्रतिबंध” लगाने की भी घोषणा की. ट्रंप प्रशासन ने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों- रोसनेफ्ट और लुकोइल पर ये नए प्रतिबंध लगाए हैं. इन प्रतिबंधों के बाद भारत समेत दुनियाभर की तेल कंपनियों के लिए इन रूसी कंपनियों के साथ व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा.
आसियान सम्मेलन में वर्चुअली शामिल होंगे पीएम मोदी
अगले हफ्ते मलेशिया में होने वाले आसियान सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली शामिल होंगे. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने लिखा, आसियान-भारत सम्मेलन में वर्चुअली शामिल होने और आसियान-भारत की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक गहरा करने के लिए उत्साहित हूं.
आसियान सम्मेलन 26 से 28 अक्टूबर तक मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में होगा. पीएम मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से फोन पर बातचीत कर उन्हें आसियान की अध्यक्षता के लिए बधाई दी और आगामी सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भी आसियान सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. मलेशिया के विदेश मंत्री ने पिछले हफ्ते जानकारी दी थी कि ट्रंप 26 अक्टूबर को मलेशिया दौरे पर पहुंचेंगे. इसके बाद ये कयास लगाए जाने लगे थे कि मलेशिया में पीएम मोदी और ट्रंप की मुलाकात हो सकती है क्योंकि पहले पीएम मोदी की सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने की उम्मीद थी. हालांकि, अब यह स्पष्ट हो गया है कि मलेशिया में दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं होगी.
रूस के लिए जासूसी के आरोपों में घिरी जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी
जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) के थुरिंजिया राज्य के नेताओं पर रूस के लिए जासूसी करने के आरोप लगे हैं. आरोप है कि इन नेताओं ने संवेदनशील मुद्दों पर संसदीय सवाल पूछकर गुप्त सूचनाएं जुटाने की कोशिश की. एएफडी के नेता मार्कुस फ्रॉनमायर की प्रस्तावित मॉस्को यात्रा ने इन आशंकाओं को और गहरा कर दिया है, जिससे जर्मन संसद के अन्य दलों में चिंता बढ़ गई है.
थुरिंजिया के गृह मंत्री जॉर्ज मायर ने कहा कि पिछले 12 महीनों में एएफडी सांसदों ने 47 सवाल दायर किए, जिनमें परिवहन, जल आपूर्ति, डिजिटल नेटवर्क और ऊर्जा ढांचे से जुड़ी जानकारी मांगी गई. मायर ने कहा, “ऐसा लगना लाजमी है कि एएफडी अपने सवालों के जरिए क्रेमलिन के आदेशों का पालन कर रहा है.” उन्होंने बताया कि एएफडी का विशेष ध्यान पुलिस की आईटी प्रणाली और ड्रोन पहचान क्षमताओं पर रहता है.
एएफडी नेता रिंगो म्यूलमान ने इन आरोपों को “बेतुकी कॉन्सपिरेसी थ्योरी” बताया और कहा कि सरकार राजनीतिक विरोधियों को बदनाम करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने दावा किया कि ऐसी पूछताछ “लोकतांत्रिक निगरानी की नींव” होती है. जर्मनी की खुफिया एजेंसी पहले ही एएफडी इकाई को “धुर दक्षिणपंथी चरमपंथी संगठन” के रूप में वर्गीकृत कर चुकी है.
बिहार: महागठबंधन ने तेजस्वी यादव को सीएम कैंडिडेट घोषित किया
वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है. यानी बिहार में महागठबंधन के चुनाव जीतने की स्थिति में तेजस्वी यादव को सीएम बनाने पर कांग्रेस सहमत हो गई है. बिहार विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के पर्यवेक्षक अशोक गहलोत ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की.
उन्होंने कहा कि सीएम कैंडिडेट के लिए तेजस्वी का नाम स्वाभाविक था और आगे बताया कि राहुल गांधी समेत सभी लोगों के दिमाग में एक ही बात थी कि तेजस्वी यादव हमारे चेहरे होंगे. उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव युवा हैं, उनका भविष्य उज्ज्वल है और जनता उनका समर्थन करेगी. उन्होंने यह भी दोहराया कि गठबंधन की सभी पार्टियां साथ मिलकर चुनाव प्रचार करेंगी.
महागठबंधन ने विकासशील इंसान पार्टी वीआईपी के प्रमुख मुकेश सहनी को उप-मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है. बिहार में 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में चुनाव होंगे और 14 नवंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे.
जर्मनी में सैन्य अभ्यास के दौरान पुलिस की गोली से सैनिक घायल
जर्मनी के दक्षिणी बवेरिया के एर्डिंग शहर में बुधवार को बुंडेसवेयर (जर्मन सेना) के एक बड़े सैन्य अभ्यास के दौरान एक सैनिक को पुलिस ने गोली मार दी. अधिकारियों के अनुसार, यह घटना एक गलतफहमी के कारण हुई. बुंडेसवेयर के ऑपरेशनल कमांड के प्रवक्ता ने बताया कि अभ्यास में शामिल सैनिकों और स्थानीय निवासियों की सूचना पर पहुंची पुलिस के बीच गलतफहमी हो गई और इसी स्थिति में गोली चल गई.
प्रवक्ता और स्थानीय पुलिस ने बताया कि घायल सैनिक को मामूली चोटें आई थीं और इलाज के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. यह अभ्यास “मार्शल पावर” नाम से चलाया जा रहा है, जिसमें लगभग 500 सैन्य पुलिसकर्मी और सैकड़ों पुलिस, अग्निशमन और राहतकर्मी शामिल हैं.
यह अभ्यास बवेरिया के कई शहरों और कस्बों में सार्वजनिक स्थानों पर हो रहा है, ताकि जर्मनी, जो एक नाटो सदस्य देश है, वह हमले की स्थिति में सही प्रतिक्रिया दे सके. पुलिस ने बताया कि उन्हें बुधवार शाम एक व्यक्ति के हथियार लेकर घूमने की सूचना मिली थी, जिसके बाद उन्होंने कई इकाइयां और एक हेलीकॉप्टर एर्डिंग के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में भेजा, इसी दौरान यह घटना हुई.
पत्रकारों पर हमलों की घटनाओं का मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने केरल, मणिपुर और त्रिपुरा में पत्रकारों पर कथित हमले की तीन अलग-अलग घटनाओं की जानकारी देने वाली मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया है. आयोग ने तीनों राज्यों के पुलिस महानिदेशकों डीजीपी को नोटिस जारी कर दो हफ्तों के भीतर सभी मामलों पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है.
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, इसी साल 30 अगस्त को केरल और मणिपुर में दो अलग-अलग पत्रकारों पर हमले हुए थे. वहीं, त्रिपुरा में 21 सितंबर को एक पत्रकार पर हमला हुआ था. ये सभी हमले कथित तौर पर उस दौरान हुए जब ये पत्रकार अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभा रहे थे या अपने काम से लौट रहे थे.
त्रिपुरा में एक पत्रकार पर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से लैस बदमाशों के एक समूह ने हमला किया था. हमलावरों ने पत्रकार की बाइक भी चुरा ली थी. मणिपुर में एक पत्रकार को एयरगन से दो बार गोली मारी गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं. वहीं, केरल में एक पत्रकार की कथित तौर पर कुछ लोगों ने मिलकर पिटाई की.
बीते महीने उत्तराखंड में भी एक स्वतंत्र पत्रकार राजीव प्रताव गायब हो गए थे. गुमशुदा होने के करीब 10 दिन बाद, 28 सितंबर को राजीव का शव भागीरथी नदी के जोशियारा बैराज से बरामद किया गया. पुलिस ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के हवाले से इसे दुर्घटना बताया. मगर, राजीव के परिजनों का आरोप है कि यह दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या है.
अमेरिका का सरकारी कर्ज 38 ट्रिलियन डॉलर के पार
समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका में संघीय सरकार के आंशिक बंद (शटडाउन) के बीच बुधवार को अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज 38 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग 3,170 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है. यह बढ़त केवल दो महीनों में हुई है. अगस्त में यह 37 ट्रिलियन डॉलर था. कोविड-19 महामारी के बाद यह सबसे तेज कर्ज बढ़ोतरी मानी जा रही है. वित्त विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा अमेरिका की तेजी से बिगड़ती वित्तीय स्थिति को दर्शाता है.
पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के पेन व्हार्टन बजट मॉडल के केंट स्मेटर्स ने कहा कि बढ़ता कर्ज समय के साथ ज्यादा महंगाई का सबब बनता है, जिससे लोगों की चीजें खरीद पाने की क्षमता घटती है. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि बहुत से लोग जानना चाहते होंगे कि क्या उनके बच्चे और पोते-पोतियां भविष्य में अच्छी स्थिति में होंगे — और क्या वे घर खरीद सकेंगे?”
गवर्नमेंट एकाउंटेबिलिटी ऑफिस (जीएओ) के अनुसार, बढ़ते कर्ज से आम अमेरिकियों पर असर पड़ेगा- घर और कार के लिए महंगे लोन, घटते वेतन और वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के रूप में. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह रुझान जारी रहा, तो आने वाले सालों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गहरा दबाव पड़ सकता है.
दिल्ली के एक्यूआई डेटा को लेकर ‘आप’ ने क्या आरोप लगाया
दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार, 23 अक्टूबर की सुबह भी हवा की स्थिति बेहद खराब रही. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में गुरुवार सुबह 6 बजे औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 362 दर्ज हुआ. सबसे ज्यादा एक्यूआई 428 आनंद विहार क्षेत्र में दर्ज हुआ, जो गंभीर श्रेणी में आता है.
सीपीसीबी के मुताबिक, गुरुवार सुबह 6 बजे आरके पुरम में 362, पटपड़गंज में 361, इंडिया गेट के आसपास 353, एम्स के पास 342 और अक्षरधाम मंदिर के पास 350 एक्यूआई दर्ज किया गया. जब एक्यूआई का आंकड़ा 200 से 300 के बीच होता है तो उसे “खराब” और जब 300 से 400 के बीच होता है, तो उसे “बेहद खराब” माना जाता है.
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि राजधानी दिल्ली में एक्यूआई के डेटा के साथ छेड़छाड़ की गई है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पार्टी की दिल्ली यूनिट के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने बुधवार को आरोप लगाया कि दिवाली की रात एक्यूआई डेटा के साथ छेड़छाड़ करने के लिए चार सरकारी एजेंसियों ने मिलकर काम किया.
इससे पहले दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा था कि आम आदमी पार्टी दिल्ली के वायु प्रदूषण के लिए “दिवाली, हिंदू और सनातनियों” को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रही है. सिरसा ने दावा किया कि शहर के प्रदूषण स्तर पर दिवाली के त्योहार का प्रभाव बेहद कम पड़ा.
बुडापेस्ट बैठक रद्द करने के बाद अमेरिका ने रूसी तेल कंपनियों पर लगाए भारी प्रतिबंध
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने बुधवार को रूस के तेल उद्योग पर “भारी प्रतिबंध” यानी सैंकशन लगाने की घोषणा की. इन प्रतिबंधों का उद्देश्य रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बातचीत की मेज पर लाना और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करना है. ट्रंप प्रशासन ने रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों — रोसनेफ्ट और लुकोइल पर ये नए प्रतिबंध लगाए हैं.
इन कदमों के लिए यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और दोनों दलों के अमेरिकी सांसदों ने लंबे समय से दबाव बनायाथा. नए प्रतिबंधों की घोषणा ट्रंप और पुतिन के बीच शिखर सम्मेलन की योजना विफल होने के एक दिन बाद की गई. ट्रंप ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि उन्होंने बैठक रद्द कर दी क्योंकि “यह उन्हें ठीक नहीं लग रहा था.”
वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ये नए प्रतिबंध मॉस्को के “बेवजह युद्ध” को खत्म करने के लिए हैं और क्रेमलिन की “युद्ध मशीन” को रोकने की कोशिश हैं. उन्होंने कहा, “हम अपने सहयोगियों को प्रोत्साहित करते हैं कि वे इन प्रतिबंधों में हमारे साथ शामिल हों और उनका पालन करें.” एपी के अनुसार, यह घोषणा ऐसे समय हुई जब रूसी ड्रोन और मिसाइल हमलों में यूक्रेन में कम से कम छह लोगों की मौत हुई, जिनमें एक महिला और उनकी दो बेटियां शामिल थीं.
इस बीच, नाटो महासचिव मार्क रुटे वॉशिंगटन में ट्रंप से मुलाकात कर रहे थे. रुटे ने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह से तैनात हों और इसके लिए हमें अमेरिकी सिस्टम की जरूरत है.” रुटे ने जोर दिया कि अमेरिकी हथियारों ने यूक्रेन को रूसी हमलों से बचाने में अहम भूमिका निभाई है. एपी के अनुसार, यूरोपीय देश और कनाडा अमेरिकी हथियार खरीदकर यूक्रेन को दे रहे हैं.