क्यों इतने खास हैं 'माउंट ऑफ ऑलिव्स' के जैतून
येरुशलम के पूरब की ओर एक लंबे टीले पर तीन पहाड़ियां हैं. इन्हीं में से एक है, माउंट ऑफ ऑलिव्स. यहां जैतून तोड़कर तेल निकालना एक प्राचीन परंपरा का हिस्सा है. मान्यता है कि ईसा मसीह ने इस पहाड़ी पर प्रार्थना की थी.

माना जाता है, ईसा ने यहां प्रार्थना की थी
कभी ये जमीन जैतून के पेड़ों से ढकी थी. जैतून के पेड़ों से इसे ही 'माउंट ऑफ ऑलिव्स' को अपना नाम मिला. इसका जिक्र बाइबिल में भी मिलता है. गॉस्पेल के मुताबिक, सूली चढ़ाने के लिए प्राचीन येरुशलम ले जाए जाने से पहले ईसा मसीह ने आखिरी रात यहीं गुजारी थी. ईसा ने यहां प्रार्थना की थी. ईसाई और यहूदी, दोनों धर्मों में इस जगह की काफी मान्यता है.
जैतून के प्राचीन पेड़
'माउंट ऑफ ऑलिव्स' पर जैतून के बहुत प्राचीन पेड़ भी हैं. इन्हें अहम सांस्कृतिक धरोहर माना जाता है. इस साल जैतून की फसल तोड़ने के मौसम में ही इस्राएल और हमास के बीच युद्धविराम हुआ. युद्ध के दौरान आशंका थी कि पेड़ों को मिसाइल से नुकसान पहुंच सकता है.
प्राचीन परंपरा का हिस्सा
अब शांत हुए माहौल में मंक और ननें 'माउंट ऑफ ऑलिव्स' और 'गेथसमनी गार्डन' में जैतून की तैयार हो चुकी फसल जमा करने में व्यस्त हैं. यह बहुत प्राचीन परंपरा रही है. जैतून तोड़ने के लिए कई देशों से वॉलंटियर भी यहां आते हैं. सिर्फ वयस्क ही नहीं, बच्चे और किशोर भी हाथ बंटाते हैं. इस तस्वीर में दो कैथलिक नन, सिस्टर मैरी बेनेडिक्ट और सिस्टर कोलोंबा नजर आ रही हैं.
जैतून तोड़कर जमा करने में लोगों की आस्था है
डिएगो दला गासा एक 'फ्रेंसिस्कन' हैं. यह कैथलिक चर्च से जुड़ा एक धार्मिक समूह है. डिएगो, 'माउंट ऑफ ऑलिव्स' पर 'गेथसमनी गार्डन' के पास एक आश्रम (हरमिटेज) में जैतून पैदावार की देखरेख करते हैं. पहाड़ी पर बने बाकी कैथलिक आश्रमों-चर्चों और उनमें रहने वाले समुदायों के लिए जैतून तोड़कर उनसे तेल जैसे उत्पाद बनाना ना तो कारोबार है, ना ही भरण-पोषण का मुख्य जरिया.
"ये जमीन एक तोहफा है"
इन लोगों के लिए यह काम प्रार्थना का एक रूप और श्रद्धा की एक अभिव्यक्ति है. जैसा कि डिएगो ने एपी से बातचीत में कहा, "यह जमीन एक तोहफा है, दैवीय उपस्थिति का एक प्रतीक है." डिएगो बताते हैं, "पवित्र जगहों का संरक्षक होने का मतलब बस उनकी रक्षा करना नहीं है, बल्कि उन्हें जीना है. शरीर से भी और आध्यात्मिक रूप से भी. दरअसल ये पवित्र जगहें हमारी रक्षा करती हैं."
इन लोगों के लिए कारोबार नहीं है जैतून की खेती
पहाड़ी पर बने आश्रमों और चर्चों के लोग बाजार में बेचने के लिए सामान नहीं बनाते हैं. इस काम में उनकी गहरी आस्था है. जैसा कि सिस्टर मैरी बेनेडिक्ट बताती हैं, "जैतून तोड़ते समय प्रार्थना करना आसान है, और प्रकृति में भी इतनी सुंदरता है. ऐसा लगता है छुट्टी बिता रहे हों."
धार्मिक कार्यों में भी इस्तेमाल होता है ऑलिव ऑइल
ये लोग जितना जैतून का तेल निकालते हैं, उसका बड़ा हिस्सा खुद ही इस्तेमाल करते हैं. धार्मिक अनुष्ठानों में भी ऑलिव ऑइल इस्तेमाल किया जाता है. यहां 'बेनेडिक्टेन मोनेस्ट्री' में रहने वालीं सिस्टर कोलोंबा ने बताया कि ईसा मसीह की मूर्ति के पास जलने वाले चर्च लैंप के जैतून का तेल पर्याप्त मात्रा में मौजूद हो, यह सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है.
आर्थिक और धार्मिक, दोनों रूपों से बड़ा प्रतीक है जैतून
इस शुष्क, रेगिस्तानी इलाके में जैतून के पेड़ बहुत अहम पैदावार हैं. सदियों से यहां जैतून उगता और उगाया जाता रहा है. वेस्ट बैंक में यहूदी सेटलर्स और फलस्तीनियों के बीच संघर्ष में जैतून के पेड़ों पर भी विवाद रहा है. यहां जैतून आर्थिक और धार्मिक, दोनों रूपों से एक मजबूत प्रतीक है.
इस बरस कम पैदावार हुई
इस साल जैतून की पैदावार काफी कम हुई. सूखा पड़ने और तेज हवाओं के कारण फूलों को बड़ा नुकसान पहुंचा. बसंत के मौसम में एक बड़ी आग में बहुत सारे पेड़ तहस-नहस भी हो गए.